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चालीस करोड़ फूंके, फिर भी कंठ सूखे
lalitpur
Updated Thu, 29 Dec 2016 01:28 AM IST
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TANK
- फोटो : amar ujala
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तालबेहट व बार ब्लाक के चौबीस गांव की पैंतीस हजार आबादी को पेयजल मुहैया कराने के लिए शुरू की गई मथुरा डांग परियोजना अफसरों की लापरवाही का शिकार हो गई है। छह साल में चालीस करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद भी पानी की टंकियां खाली हैं। नलों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को हैंडपंप व कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत वर्ष 2010 में तालबेहट व बार ब्लॉक के चौबीस गांवों में पानी पहुंचाने के लिए मथुरा डांग परियोजना शुरू की गई थी। इस परियोजना के तहत शहजाद बांध से पानी को लिफ्ट करके तालबेहट ब्लॉक के खैरी डांग, खैरा डांग, खिरिया डांग, कंगीरपुरा, ककरेला, सुनपुरा, संसुवा, वर्सवाहा, जिजरवारा, रजपुरा, रमपुरा, मनपुरा, चुनगी व बार ब्लॉक के बरौदा डांग, पारौन, भैलोन सूबा, मथुराडांग, लडवारी, सेमराडांग,बसतगुंवा,धमना, गढिया, पुलवारा, गैँदोरा आदि गांवों में पहुंचाया जाना था। करोड़ों रुपये खर्च करके गांव-गांव पानी की टंकियां बनाई गईं। पाइप लाइन डाली गई। इस कार्य में भारी लापरवाही बरती गई।
पाइप लाइन बिछाने का कार्य अनुभवहीन ठेकेदारों को दे दिया गया। पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत का काम टेंडर न करके छोटे- छोटे वर्क आर्डर में पूरा किया गया। टुकड़ों में काम होने के चलते पाइप लाइन बिछाने का काम गुणवत्तापूर्वक तरीके से नहीं किया गया जिस कारण टेस्टिंग होने पर इन पाइपों से पानी रिसने लगा। एग्रीमेंट के जरिए काम होने से ठेकेदारों को भी गुणवत्ताविहीन काम के लिए विभाग जिम्मेदार नहीं ठहरा पाया। वहीं टंकियों में भी रिसाव होने लगा। इस कारण यह योजना अब तक सफल नहीं हो पाई।
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इसी साल मई माह में मथुरा डांग परियोजना के तहत पहली बार पेयजल की आपूर्ति की गई। कुछ ही गांवों में पानी पहुंच सका। कई जगहों पर पाइप लीकेज व टंकी लीकेज से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। जून में शहजाद बांध में जलस्तर से कम होने से पानी की आपूर्ति हो गई। इसके बाद इस ओर गौर नहीं किया गया। इस बार मानसून अच्छा होने से शहजाद बांध लबालब भरा हुआ है। इसके बावजूद पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
यहां बनी है टंकियां
मथुरा डांग पेयजल योजना के तहत पांच जोन बनाकर बरौदा डांग, पारौन, सेमरा डांग, लड़वारी, पुलवारा में टंकियां बनाई गईं है। पुलवारा व लड़वारी की टंकी में लीकेज है। लंबे समय से इस लीकेज को सही करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री पहुंचे थे लडवारी
मथुरा डांग पेयजल योजना के तहत शामिल 24 गांवों में ग्राम लड़वारी भी शामिल है। ग्राम लड़वारी में सहारिया द्वारा घास की रोटी खाने की खबर मीडिया में चलने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गांव का दौरा किया था। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए जल निगम ने तेजी से काम किया। कुछ गांवों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई लेकिन बाद में हालत जस के तस हो गए।
कौन बोल रहा है सही
वोल्टेज की समस्या के कारण मथुरा डांग परियोजना का सुचारु रुप से संचालन नहीं हो पा रहा है। जल्द ही वोल्टेज की समस्या को दूर कर लिया जाएगा और सभी गांवों में पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
आर एस कटियार
अधिशासी अभियंता सिविल जल निगम
वोल्टेज की समस्या को दूर कर लिया गया है। पंप हाउस पर लगा ट्रांसफार्मर महीनों से खराब पड़ा है। विद्युत विभाग से इसको बदलने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी तक बदला नहीं गया है।
एसपी सिंह अधिशासी अभियंता यांत्रिक जल निगम
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राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत वर्ष 2010 में तालबेहट व बार ब्लॉक के चौबीस गांवों में पानी पहुंचाने के लिए मथुरा डांग परियोजना शुरू की गई थी। इस परियोजना के तहत शहजाद बांध से पानी को लिफ्ट करके तालबेहट ब्लॉक के खैरी डांग, खैरा डांग, खिरिया डांग, कंगीरपुरा, ककरेला, सुनपुरा, संसुवा, वर्सवाहा, जिजरवारा, रजपुरा, रमपुरा, मनपुरा, चुनगी व बार ब्लॉक के बरौदा डांग, पारौन, भैलोन सूबा, मथुराडांग, लडवारी, सेमराडांग,बसतगुंवा,धमना, गढिया, पुलवारा, गैँदोरा आदि गांवों में पहुंचाया जाना था। करोड़ों रुपये खर्च करके गांव-गांव पानी की टंकियां बनाई गईं। पाइप लाइन डाली गई। इस कार्य में भारी लापरवाही बरती गई।
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पाइप लाइन बिछाने का कार्य अनुभवहीन ठेकेदारों को दे दिया गया। पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत का काम टेंडर न करके छोटे- छोटे वर्क आर्डर में पूरा किया गया। टुकड़ों में काम होने के चलते पाइप लाइन बिछाने का काम गुणवत्तापूर्वक तरीके से नहीं किया गया जिस कारण टेस्टिंग होने पर इन पाइपों से पानी रिसने लगा। एग्रीमेंट के जरिए काम होने से ठेकेदारों को भी गुणवत्ताविहीन काम के लिए विभाग जिम्मेदार नहीं ठहरा पाया। वहीं टंकियों में भी रिसाव होने लगा। इस कारण यह योजना अब तक सफल नहीं हो पाई।
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इसी साल मई माह में मथुरा डांग परियोजना के तहत पहली बार पेयजल की आपूर्ति की गई। कुछ ही गांवों में पानी पहुंच सका। कई जगहों पर पाइप लीकेज व टंकी लीकेज से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। जून में शहजाद बांध में जलस्तर से कम होने से पानी की आपूर्ति हो गई। इसके बाद इस ओर गौर नहीं किया गया। इस बार मानसून अच्छा होने से शहजाद बांध लबालब भरा हुआ है। इसके बावजूद पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
यहां बनी है टंकियां
मथुरा डांग पेयजल योजना के तहत पांच जोन बनाकर बरौदा डांग, पारौन, सेमरा डांग, लड़वारी, पुलवारा में टंकियां बनाई गईं है। पुलवारा व लड़वारी की टंकी में लीकेज है। लंबे समय से इस लीकेज को सही करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री पहुंचे थे लडवारी
मथुरा डांग पेयजल योजना के तहत शामिल 24 गांवों में ग्राम लड़वारी भी शामिल है। ग्राम लड़वारी में सहारिया द्वारा घास की रोटी खाने की खबर मीडिया में चलने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गांव का दौरा किया था। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए जल निगम ने तेजी से काम किया। कुछ गांवों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई लेकिन बाद में हालत जस के तस हो गए।
कौन बोल रहा है सही
वोल्टेज की समस्या के कारण मथुरा डांग परियोजना का सुचारु रुप से संचालन नहीं हो पा रहा है। जल्द ही वोल्टेज की समस्या को दूर कर लिया जाएगा और सभी गांवों में पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
आर एस कटियार
अधिशासी अभियंता सिविल जल निगम
वोल्टेज की समस्या को दूर कर लिया गया है। पंप हाउस पर लगा ट्रांसफार्मर महीनों से खराब पड़ा है। विद्युत विभाग से इसको बदलने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी तक बदला नहीं गया है।
एसपी सिंह अधिशासी अभियंता यांत्रिक जल निगम