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नौ वर्ष से सुचारु नहीं हो पा रही पाइप लाइन से पेयजल आपूर्ति
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ललितपुर। गर्मी शुरु होते ही कई गांवों पानी की किल्लत होने लगी है। विकासखंड महरौनी के ग्राम पड़वां में इस बार भी पेयजल संकट गहराने लगा है। हैंडपंपों का जलस्तर गर्मी आते ही नीचे खिसकने लगा हैं। गांव में बनी पानी की टंकी न भर पाने के कारण पेयजलापूर्ति स्थायी नहीं रह पाती है।
गांव में पाइप पेयजल योजना लगभग नौ वर्षों से सुचारु नहीं है। योजना के तहत विभाग ने बोरिंग करके ट्यूबवेल के जरिए ग्राम पडवां व धवारी में जलापूर्ति शुरू की थी, लेकिन, कुछ समय बाद यह बोर खराब हो गया और तभी से दोनों ग्रामों की पेयजल व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग पानी के बिल लगातार जारी करता है, लेकिन पेयजल आपूर्ति अधिकांश समय ठप रहती है। पिछले वर्ष ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायत करने पर प्रशासन हरकत में आया था और एक निजी बोरिंग से पेयजलापूर्ति शुरू कराई थी। लेकिन, अब तक इस योजना के तहत गहरी बोरिंग विभाग नहीं करा सका। इससे हर वर्ष पेयजल संकट गहरा जाता है। ग्रामीणों की मांग है कि शीघ्र ही नई योजना प्रस्तावित की जाए और गांव में गहरी बोरिंग हो। पाइप लाइन पूरे गांव में बिछवाई जाए, ताकि हर मोहल्ले में आसानी से जलापूर्ति की व्यवस्था बन सके।
5500 की आबादी में 18 हैंडपंप
ग्राम पंचायत पड़वां में करीब 5500 की आबादी है। आबादी को पेयजल मुहैया कराए जाने के लिए गांव में 32 हैंडपंप हैं और एक पानी की टंकी है। लेकिन, गांव में मात्र 18 हैंडपंप ही थोड़ा- बहुत पानी दे रहे हैैं। बाकी हैंडपंप गर्मी शुरु होने से पहले ही सूख गए हैं। पानी की टंकी से पर्याप्त पानी नहीं आता है, क्योंकि वह भी निजी बोरिंग से भरी जाती है। पानी की टंकी के लिए कोई भी सरकारी बोरिंग चालू नहीं है। पूरे गांव में टंकी का पानी नहीं पहुंच पाता है।
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गांव में पेयजल व्यवस्था ठीक नहीं है। पीने के पानी के लिए भी बहुत दूर तक जाना पड़ता है। गांव में पानी का संकट है। जहां पानी भरने के लिए जाते हैं, वहां लोगों की भीड़ होती है।
- हरलाल
गांव में पानी का बड़ा संकट है, हर वर्ष गर्मियों का मौसम शुरू होते ही समस्या बढ़ने लगती है। गांव में लगे हैंडपंप पानी छोड़ने लगे हैं। लोगों को पानी भरने काफी दूर- दूर तक जाना पड़ता है।
- मर्दन सिंह
गांव में पेयजल का संकट बढ़ने लगा है। गांव के हैंडपंप सूखने लगे हैं, ऐसे में टंकी की पेयजलापूर्ति का एकमात्र सहारा रहता है। लेकिन, यह व्यवस्था स्थायी नहीं हो सकी। लगातार मांग की जा रही है कि गहरी बोरिंग कराते हुए ग्राम में बड़ी टंकी बनवाई जाए व गांव में पाइप लाइन बिछवाई जाए, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका।
- धनीराम वर्मा
गांव में पानी की बहुत गंभीर समस्या है। पानी भरने के लिए हम लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है, टंकी मोहल्ले में लगे हैंडपंप से पानी निकलना कम हो गया है। रुक- रुक कर हैंडपंप से पानी भर पाते हैं। पानी भरने के लिए रात में भी जागना पड़ता है।
- साड़ूमलवारी
हमारे मोहल्ले में पानी का बहुत बड़ा संकट रहता है। हैंडपंप सूख गए हैं। गांव में बनी पेयजल योजना की टंकी का पानी यहां तक ठीक से नहीं आ पाता। कुछ लोग घरों के सामने पाइप लाइन के किनारे गहरे गड्ढे बनाकर उनमें एकत्रित हुए पानी से बर्तन भर पाते हैं।
- इंद्रराज दुबे
हमारा गांव विकासखंड महरौनी के पेयजल संकट वाले ग्रामों में आता है, ग्राम पंचायत ने गत वर्ष अस्थायी व्यवस्था बनवाने के लिए कुछ मोहल्लों में पाइप बिछवाया था, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। उच्चाधिकारियों से ग्राम की पाइप पेयजल योजना के तहत टंकी निर्माण व डीप (गहरी) बोरिंग की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया, फिर भी प्रयास किया जाता है कि ग्रामीणों को पानी की समस्या न हो।
- मंजूलता बैस, ग्राम प्रधान पड़वां
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गांव में पाइप पेयजल योजना लगभग नौ वर्षों से सुचारु नहीं है। योजना के तहत विभाग ने बोरिंग करके ट्यूबवेल के जरिए ग्राम पडवां व धवारी में जलापूर्ति शुरू की थी, लेकिन, कुछ समय बाद यह बोर खराब हो गया और तभी से दोनों ग्रामों की पेयजल व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग पानी के बिल लगातार जारी करता है, लेकिन पेयजल आपूर्ति अधिकांश समय ठप रहती है। पिछले वर्ष ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायत करने पर प्रशासन हरकत में आया था और एक निजी बोरिंग से पेयजलापूर्ति शुरू कराई थी। लेकिन, अब तक इस योजना के तहत गहरी बोरिंग विभाग नहीं करा सका। इससे हर वर्ष पेयजल संकट गहरा जाता है। ग्रामीणों की मांग है कि शीघ्र ही नई योजना प्रस्तावित की जाए और गांव में गहरी बोरिंग हो। पाइप लाइन पूरे गांव में बिछवाई जाए, ताकि हर मोहल्ले में आसानी से जलापूर्ति की व्यवस्था बन सके।
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5500 की आबादी में 18 हैंडपंप
ग्राम पंचायत पड़वां में करीब 5500 की आबादी है। आबादी को पेयजल मुहैया कराए जाने के लिए गांव में 32 हैंडपंप हैं और एक पानी की टंकी है। लेकिन, गांव में मात्र 18 हैंडपंप ही थोड़ा- बहुत पानी दे रहे हैैं। बाकी हैंडपंप गर्मी शुरु होने से पहले ही सूख गए हैं। पानी की टंकी से पर्याप्त पानी नहीं आता है, क्योंकि वह भी निजी बोरिंग से भरी जाती है। पानी की टंकी के लिए कोई भी सरकारी बोरिंग चालू नहीं है। पूरे गांव में टंकी का पानी नहीं पहुंच पाता है।
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गांव में पेयजल व्यवस्था ठीक नहीं है। पीने के पानी के लिए भी बहुत दूर तक जाना पड़ता है। गांव में पानी का संकट है। जहां पानी भरने के लिए जाते हैं, वहां लोगों की भीड़ होती है।
- हरलाल
गांव में पानी का बड़ा संकट है, हर वर्ष गर्मियों का मौसम शुरू होते ही समस्या बढ़ने लगती है। गांव में लगे हैंडपंप पानी छोड़ने लगे हैं। लोगों को पानी भरने काफी दूर- दूर तक जाना पड़ता है।
- मर्दन सिंह
गांव में पेयजल का संकट बढ़ने लगा है। गांव के हैंडपंप सूखने लगे हैं, ऐसे में टंकी की पेयजलापूर्ति का एकमात्र सहारा रहता है। लेकिन, यह व्यवस्था स्थायी नहीं हो सकी। लगातार मांग की जा रही है कि गहरी बोरिंग कराते हुए ग्राम में बड़ी टंकी बनवाई जाए व गांव में पाइप लाइन बिछवाई जाए, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका।
- धनीराम वर्मा
गांव में पानी की बहुत गंभीर समस्या है। पानी भरने के लिए हम लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है, टंकी मोहल्ले में लगे हैंडपंप से पानी निकलना कम हो गया है। रुक- रुक कर हैंडपंप से पानी भर पाते हैं। पानी भरने के लिए रात में भी जागना पड़ता है।
- साड़ूमलवारी
हमारे मोहल्ले में पानी का बहुत बड़ा संकट रहता है। हैंडपंप सूख गए हैं। गांव में बनी पेयजल योजना की टंकी का पानी यहां तक ठीक से नहीं आ पाता। कुछ लोग घरों के सामने पाइप लाइन के किनारे गहरे गड्ढे बनाकर उनमें एकत्रित हुए पानी से बर्तन भर पाते हैं।
- इंद्रराज दुबे
हमारा गांव विकासखंड महरौनी के पेयजल संकट वाले ग्रामों में आता है, ग्राम पंचायत ने गत वर्ष अस्थायी व्यवस्था बनवाने के लिए कुछ मोहल्लों में पाइप बिछवाया था, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। उच्चाधिकारियों से ग्राम की पाइप पेयजल योजना के तहत टंकी निर्माण व डीप (गहरी) बोरिंग की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया, फिर भी प्रयास किया जाता है कि ग्रामीणों को पानी की समस्या न हो।
- मंजूलता बैस, ग्राम प्रधान पड़वां