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Lalitpur News: एमपी के मेले के लिए भी छोड़ा जा रहा पानी, ललितपुर वालों की बढ़ रही परेशानी

Fri, 02 Dec 2022 07:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Dec 2022 07:00 AM IST
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Water is being released for MP's fair as well, Lalitpur residents are facing increasing problems
ललितपुर। जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार जामनी बांध पर लोड बढ़ता जा रहा है। मध्यप्रदेश को पानी देने के चलते बांध के पानी का फायदा जिले के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जिले को इस बांध से सिंचाई और पीने का पानी बमुश्किल मिल पाता है। जबकि मध्यप्रदेश में बांध का पानी का प्रयोग पेयजल और सिंचाई के साथ धार्मिक मेले में स्नान के लिए भी किया जाता है।
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जामनी बांध का निर्माण वर्ष 1973 में हुआ था। बांध निर्माण के बाद 1974 में यूपी-एमपी के बीच हुए समझौते के आधार पर इसका 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश के लिए आरक्षित किया गया था। इसके बाद मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ को सिंचाई के लिए बांध से 13 किमी लंबी नहर के जरिए 60 क्यूसेक पानी दिया जाता है। हालांकि इसके एवज में मध्य प्रदेश 12.48 प्रति हजार घन फुट के हिसाब से रकम देता है। वहीं पेयजल के लिए एमपी में पानी जामनी नदी के माध्यम से कुंडेश्वर में बने बैराज से होकर टीकमगढ़ में पहुंचता है। साथ ही टीकमगढ क्षेत्र स्थित अंजनी माता मंदिर पर प्रतिवर्ष लगने वाले मेले के लिए भी एक एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी दिया जाता है।
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इसका असर यह होता है कि जब जिले के किसानों और लोगों को बांध से पानी की जरूरत होती है, तो बांध अपने न्यूनतम स्तर तक पहुंच जाता है। इससे क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल के लिए लोगोें को दिक्कत होती है। इसे लेकर ग्रामीण कई बार प्रशासन से विरोध जता चुके हैं।
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एमपी पहुंच गया था जल आयोग
मध्य प्रदेश को दिए जाने वाले पानी की तय की गई धनराशि जब सिंचाई विभाग से एमपी शासन से मांगी, तो मामला जल आयोग पहुंच गया। बकाया धनराशि करोड़ों रुपये में है। जल आयोग में एमपी शासन ने यह तर्क रखा था कि मध्य प्रदेश से निकली हुई नदियों पर उत्तर प्रदेश ने अपने बांध बनाए है। इसलिए बांधों से उन्हें पानी निशुल्क दिया जाए। मामला केंद्रीय जल आयोग में लंबित है।
67 एमसीएम पानी आरक्षित है सिंचाई के लिए
बांध का जलस्तर 403.55 मीटर है। बांध की भंडारण क्षमता 92.87 एमसीएम है। जिसमें सिंचाई के लिए 67 एमसीएम पानी आरक्षित है। पेयजल व अन्य उपयोग के लिए 1.42 एमसीएम है। उपयोगी जल की मात्रा 84 एमसीएम निश्चित की गई है। जामनी बांध से सिंचाई के लिए 230 किलोमीटर लंबी नहरें संचालित होती हैं। जिसके जरिए 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई की जाती है। इसमें सर्वाधिक सिंचाई रबी के सीजन में की जाती है।

मध्य प्रदेश के टीकमढ़ क्षेत्र में स्थित अंजनी माता मंदिर पर लगने वाले मेले में बांध से प्रतिवर्ष एक एमसीएम पानी छोड़ा जाता है। यह पानी अप्रैल माह में दिया जाता है। बांध से छोड़ा गया पानी टीकमगढ़ रजवाहा के माध्यम से मंदिर के पास बने कुंड में पहुंचता है। जिलाधिकारी की अनुमति के बाद इस पानी को दिया जाता है।
सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड ललितपुर
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