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Lalitpur News: राजघाट बांध के पानी से बिरधा ब्लॉक में खेती को मिल सकती है नई राह

Fri, 13 Feb 2026 12:02 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 13 Feb 2026 12:02 AM IST
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Water from Rajghat Dam can provide a new avenue for agriculture in Birdha block.
केन-बेतवा लिंक से झांसी को पानी भेजने की जरूरत होगी खत्म, सदन में मुद्दा उठने पर खुल सकता है नहर निर्माण का रास्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के बाद राजघाट बांध में प्रदेश के हिस्से का करीब 10 टीएमसी (हजार मिलियन घन फीट) पानी बचने की संभावना है। वर्तमान में यह पानी झांसी भेजा जाता है, लेकिन परियोजना लागू होने के बाद इसकी आवश्यकता नहीं रहेगी। ऐसे में बचे पानी का उपयोग विकासखंड बिरधा की सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने में किया जा सकता है। किसानों ने इस संबंध में आवाज उठानी शुरू कर दी है और जनप्रतिनिधियों से सदन में मुद्दा उठाने की मांग की है।

राजघाट बांध में प्रदेश के हिस्से का कुल 14 टीएमसी पानी आता है। इनमें से 10 टीएमसी पानी झांसी भेजा जाता है, जबकि चार टीएमसी पानी का उपयोग जिले में सिंचाई और पाइप पेयजल योजनाओं में होता है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के बाद झांसी को अलग से पानी उपलब्ध होने लगेगा, जिससे राजघाट का 10 टीएमसी पानी जिले के उपयोग के लिए उपलब्ध हो सकेगा।
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बिरधा ब्लॉक के किसानों का कहना है कि यदि इस अतिरिक्त पानी से नहर निकाली जाए तो वर्षों से सिंचाई संकट झेल रहे क्षेत्र को बड़ी राहत मिल सकती है। क्षेत्र के कई गांव अब भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। पर्याप्त सिंचाई संसाधन न होने से रबी फसलों का रकबा सीमित रह जाता है। किसानों का तर्क है कि नहर बनने से गेहूं, चना और मसूर जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ेगा और खेती लाभकारी बनेगी।
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बताया जाता है कि बिरधा ब्लॉक के अधिकांश भू-भाग में नहर सिंचाई की सुविधा नहीं है। बालाबेहट में डैम निर्माण की योजना तकनीकी कारणों से सफल नहीं हो सकी थी। ऐसे में किसानों का मानना है कि राजघाट से नहर निकालना अपेक्षाकृत कम लागत में स्थायी समाधान हो सकता है।


किसानों की आवाज
फोटो --22
अगर राजघाट में पानी बचेगा तो उसका पहला हक स्थानीय किसानों का होना चाहिए। नहर बन जाए तो हमारी आधी समस्या खत्म हो जाएगी।
चंद्रभूषण तिवारी, किसान, बम्हौरी
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हर साल ट्यूबवेल से सिंचाई में खर्च बढ़ता जा रहा है। डीजल और बिजली दोनों महंगे हैं। नहर का पानी मिल जाए तो लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी।
धीरज सिंह लोधी, किसान, करमरा
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केन-बेतवा परियोजना विकास के लिए है तो उसका फायदा हमें भी दिखना चाहिए। बिरधा क्षेत्र सूखे की मार झेलता है, यहां सिंचाई की स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
— तुलसीदास कुशवाहा, किसान, बछलापुर
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सरकार सर्वे कराकर जल्द योजना बनाए। अगर कैनाल निकलेगी तो पलायन भी रुकेगा और युवा खेती की ओर लौटेंगे।
— हरगोविंद झां, किसान, मगरपुर
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वर्जन
केन-बेतवा लिंक योजना के तहत राजघाट बांध में 10 टीएमसी पानी बचेगा। इस पानी का उपयोग बिरधा ब्लॉक क्षेत्र की सिंचाई के लिए हो सके, इसके लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध किया जाएगा। इससे हजारों किसानों को लाभ मिल सकेगा।
मनोहर लाल पंथ, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री
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