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Lalitpur News: पेयजल संकट से परेशान ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
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संवाद न्यूज एजेंसी
जाखलौन। ब्लॉक बिरधा अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरई में चार हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। पेयजल पाइप लाइन पड़ने के बाद मात्र एक दिन पानी मिला और बाद में सप्लाई बंद हो गई। इस कारण ग्रामीणों को दूरदराज लगे हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा है। बुधवार को ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर पेयजल आपूर्ति सुचारु कराने की मांग की।
पिपरई में अब तक पेयजल आपूर्ति की सुविधा नहीं है। पानी के लिए हैंडपंप ही एक मात्र सहारा है। क्षेत्र में जल स्तर नीचे होने से कुछ ही हैंडपंप पानी दे रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पेयजल संकट विकराल हो जाता है। ग्रामीणों को दूर स्थित कुओं से पानी जुटाना पड़ता है।
बुधवार को ग्रामीण सड़क पर उतर आए। जल निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पानी की मांग की। आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही से पानी नहीं मिल पा रहा है। एक माह पहले पानी आया, जिसके बाद से बूंद भी नहीं टपकी। पहले खदानें बंद होने रोजगार छिन गया था, अब पेयजल की दिक्कत हो रही है। पानी की समस्या से कई लोग पलायन तक कर गए। कूपों से गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। इससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों को शिकायती पत्र देने के बाद भी ठोस पहल नहीं हो सकी। द
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जाखलौन। ब्लॉक बिरधा अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरई में चार हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। पेयजल पाइप लाइन पड़ने के बाद मात्र एक दिन पानी मिला और बाद में सप्लाई बंद हो गई। इस कारण ग्रामीणों को दूरदराज लगे हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा है। बुधवार को ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर पेयजल आपूर्ति सुचारु कराने की मांग की।
पिपरई में अब तक पेयजल आपूर्ति की सुविधा नहीं है। पानी के लिए हैंडपंप ही एक मात्र सहारा है। क्षेत्र में जल स्तर नीचे होने से कुछ ही हैंडपंप पानी दे रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पेयजल संकट विकराल हो जाता है। ग्रामीणों को दूर स्थित कुओं से पानी जुटाना पड़ता है।
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बुधवार को ग्रामीण सड़क पर उतर आए। जल निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पानी की मांग की। आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही से पानी नहीं मिल पा रहा है। एक माह पहले पानी आया, जिसके बाद से बूंद भी नहीं टपकी। पहले खदानें बंद होने रोजगार छिन गया था, अब पेयजल की दिक्कत हो रही है। पानी की समस्या से कई लोग पलायन तक कर गए। कूपों से गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। इससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों को शिकायती पत्र देने के बाद भी ठोस पहल नहीं हो सकी। द
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