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Lalitpur News: 22 हजार हेक्टेयर भूमि की प्यास बुझाएगा उटारी बांध
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ललितपुर। किसानों के लिए वर्ष 2022 काफी महत्वपूर्ण रहा है। करीब 14 सालों से निर्माणाधीन चल रही उटारी बांध परियोजना इस साल पूरी होने के बाद सिंचाई विभाग के हवाले कर दी गई। अब यह बांध करीब 22 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने को तैयार हो गया है। नहरों के जरिए खेतों की प्यास बुझाने में सहायक साबित हो रहा है।
बानपुर-महरौनी क्षेत्र से निकली उटारी नदी पर उटारी बांध परियोजना का काम वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। इसका पूर्ण जलस्तर 326.80 मीटर है। न्यूनतम जलस्तर 322.80 मीटर है। बांध निर्माण के लिए 690.52 हेक्टयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। बांध परियोजना पूर्ण होने पर इससे 22 हजार हेक्टेयर भूमि को सिचिंत किया जाना है। जिसमें रबी की 1800 हेक्टेयर फसल और खरीफ का 600 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई किया जाना है। इस बांध चौदह वर्ष तक इस बांध परियोजना का निर्माण कार्य किया गया। इस वर्ष यह बांध परियोजना पूर्ण हुई और इस क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई को पूर्ण रूप से तैयार हुई। बरसात के मौसम में बांध को पूर्ण क्षमता के साथ भरा गया। जिससे ग्राम सूरीकलां, बिल्ला, बडोखरा, मिर्चवारा क्षेत्र प्रभावित हुए थे। परियोजना पूर्ण होने के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी राजघाट निर्माण खंड को तय की गई। जिस पर कुछ माह पूर्व इस बांध को राजघाट निर्माण खंड के सुपुर्द कर दिया गया था।
इस बांध से किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए 22.500 किलोमीटर की चार नहरें और माइनर बनाए गए है। उटारी बांध परियोजना पूर्ण होने से इस क्षेत्र के लोगों में काफी खुशी देखी गई थी। इसका कारण था कि सिंचाई के लिए उनके खेतों को पानी उपलब्ध हो जाना। नवंबर माह में बांध से नहरों का संचालन शुरू किया गया और किसानों के खेतों की प्यास बुझाई। हालांकि नमामि गंगे योजना में हर घर जल नल योजना के तहत चल रही पेयजल पाइप लाइन योजना में इस बांध को शामिल नहीं किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बांध से इस क्षेत्र के लोगों को पेयजल के लिए भी उपयोग में लाया जाएगा। सबकुछ ठीक रहा तो आगामी वर्षों में इस बांध से पेयजल परियोजना भी चालू की जाएगी।
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उटारी बांध परियोजना पूर्ण होने के बाद इस वर्ष इस क्षेत्र के किसानों के खेतों को सिंचाई के लिए नहरों का संचालन शुरू हो चुका है और इस क्षेत्र के किसानों को बांध से लाभ मिलना शुरू हो चुका है।
इं. मनमोहन, अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड
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बानपुर-महरौनी क्षेत्र से निकली उटारी नदी पर उटारी बांध परियोजना का काम वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। इसका पूर्ण जलस्तर 326.80 मीटर है। न्यूनतम जलस्तर 322.80 मीटर है। बांध निर्माण के लिए 690.52 हेक्टयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। बांध परियोजना पूर्ण होने पर इससे 22 हजार हेक्टेयर भूमि को सिचिंत किया जाना है। जिसमें रबी की 1800 हेक्टेयर फसल और खरीफ का 600 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई किया जाना है। इस बांध चौदह वर्ष तक इस बांध परियोजना का निर्माण कार्य किया गया। इस वर्ष यह बांध परियोजना पूर्ण हुई और इस क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई को पूर्ण रूप से तैयार हुई। बरसात के मौसम में बांध को पूर्ण क्षमता के साथ भरा गया। जिससे ग्राम सूरीकलां, बिल्ला, बडोखरा, मिर्चवारा क्षेत्र प्रभावित हुए थे। परियोजना पूर्ण होने के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी राजघाट निर्माण खंड को तय की गई। जिस पर कुछ माह पूर्व इस बांध को राजघाट निर्माण खंड के सुपुर्द कर दिया गया था।
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इस बांध से किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए 22.500 किलोमीटर की चार नहरें और माइनर बनाए गए है। उटारी बांध परियोजना पूर्ण होने से इस क्षेत्र के लोगों में काफी खुशी देखी गई थी। इसका कारण था कि सिंचाई के लिए उनके खेतों को पानी उपलब्ध हो जाना। नवंबर माह में बांध से नहरों का संचालन शुरू किया गया और किसानों के खेतों की प्यास बुझाई। हालांकि नमामि गंगे योजना में हर घर जल नल योजना के तहत चल रही पेयजल पाइप लाइन योजना में इस बांध को शामिल नहीं किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बांध से इस क्षेत्र के लोगों को पेयजल के लिए भी उपयोग में लाया जाएगा। सबकुछ ठीक रहा तो आगामी वर्षों में इस बांध से पेयजल परियोजना भी चालू की जाएगी।
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उटारी बांध परियोजना पूर्ण होने के बाद इस वर्ष इस क्षेत्र के किसानों के खेतों को सिंचाई के लिए नहरों का संचालन शुरू हो चुका है और इस क्षेत्र के किसानों को बांध से लाभ मिलना शुरू हो चुका है।
इं. मनमोहन, अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड