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कोरोना काल में कुपोषित बच्चों को छोड़ा भगवान भरोसे
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ललितपुर। सरकार की जनहितकारी योजनाओं में से एक कुपोषण मुक्त भारत योजना भी है। इस योजना के तहत सरकार ने कुपोषण से जूझ रहे बच्चों का उपचार कर उन्हें ठीक किया जाता है। लेकिन लॉकडाउन के बाद से जिम्मेदार लापरवाह नजर आ रहे हैं। मार्च से अब तक न तो मरीजों को चिंहित किया गया है न ही उपचार मिल सक ा है।
बाल विकास जहां कुपोषित बच्चों के चिह्नींकरण का दावा कर रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग इससे अंजान है, बाल विकास द्वारा अब तक कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई है। इससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने का जिम्मा बाल विकास विभाग का है। बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार दिया जाता है। जिससे प्रसव के दौरान किसी प्रकार की कमी न हो, और स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दें। प्रसव के बाद से ही बच्चों को टीकाकरण व एक दिवस में आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चे के स्वास्थ्य की जांच होती है। जिसमें बच्चे की लंबाई के अनुसार वजन व उम्र के हिसाब से वजन की माप की जाती है। इस दौरान कुछ मानक तक वजन कम होने पर कुपोषित कहा जाता है। ऐसे बच्चों को केंद्र पर ही पौष्टिक आहार देकर स्वस्थ करने का प्रयास किया जाता है।
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यदि उम्र व लंबाई की अपेक्षा अधिक वजन कम होता है, तो ऐसे बच्चे अतिकुपोषित बीमारी से ग्रसित होते हैं। इन बच्चों केे अस्पतालों में स्थित एनआरसी केंद्र पर भर्ती कर पौष्टिक आहार व उपचार दिया जाता है। जहां पर मानक अनुसार वजन होने के बाद डिस्चार्ज किया जाता जाता है।
लेकिन कोरोना काल में बच्चों के स्वास्थ्य को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। यहां पर मार्च से अगस्त माह तक न तो आंगनबाड़ी द्वारा कुपोषित बच्चों को मार्क नहीं किया गया है। बच्चे चिंहित न होने से उपचार भी नहीं मिल सका है। बच्चों को घातक बनी कुपोषण जैसी गंभीर बीमारी में भी जिम्मेदार उदासीन नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं ओपीडी सेवाएं ठप होने से भी अतिकुपोषित बच्चे चिंहित नहीं हो सके हैं। ऐसे में कई अतिकुपोषित बच्चों को बिना उपचार के ही रहना पड़ा है। बीते वर्ष 2019 के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो अप्रैल से अगस्त तक 480 अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर उपचार दिया गया था, लेकिन गत वर्ष के माह में स्वास्थ्य विभाग के पास अतिकुपोषित बच्चों का आंकड़ा तक नहीं है। जबकि बाल विकास विभाग अतिकुपोषित बच्चों के चिह्नींकरण का दावा कर रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग इससे अंजान बना हुआ है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बाल विकास विभाग द्वारा विभाग को अब तक कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। जनपद में एनआरसी केंद्र भी बंद चल रहे हैं। इससे बिना उपचार के ही रहना पड़ रहा है।
लॉक डाउन से अब तक के अतिकुपोषित बच्चों की कोई सूचना नहीं है। एनआरसी सेंटर बंद होने से उपचार भी नहीं दिया गया है। - डॉ. गुलाम हुसैन, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
बीते माह में जनपद में 1737 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं। वहीं अल्प कुपोषित बच्चों की संख्या 11240 पाई गई है। - पुष्पा वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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बाल विकास जहां कुपोषित बच्चों के चिह्नींकरण का दावा कर रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग इससे अंजान है, बाल विकास द्वारा अब तक कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई है। इससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
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कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने का जिम्मा बाल विकास विभाग का है। बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार दिया जाता है। जिससे प्रसव के दौरान किसी प्रकार की कमी न हो, और स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दें। प्रसव के बाद से ही बच्चों को टीकाकरण व एक दिवस में आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चे के स्वास्थ्य की जांच होती है। जिसमें बच्चे की लंबाई के अनुसार वजन व उम्र के हिसाब से वजन की माप की जाती है। इस दौरान कुछ मानक तक वजन कम होने पर कुपोषित कहा जाता है। ऐसे बच्चों को केंद्र पर ही पौष्टिक आहार देकर स्वस्थ करने का प्रयास किया जाता है।
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यदि उम्र व लंबाई की अपेक्षा अधिक वजन कम होता है, तो ऐसे बच्चे अतिकुपोषित बीमारी से ग्रसित होते हैं। इन बच्चों केे अस्पतालों में स्थित एनआरसी केंद्र पर भर्ती कर पौष्टिक आहार व उपचार दिया जाता है। जहां पर मानक अनुसार वजन होने के बाद डिस्चार्ज किया जाता जाता है।
लेकिन कोरोना काल में बच्चों के स्वास्थ्य को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। यहां पर मार्च से अगस्त माह तक न तो आंगनबाड़ी द्वारा कुपोषित बच्चों को मार्क नहीं किया गया है। बच्चे चिंहित न होने से उपचार भी नहीं मिल सका है। बच्चों को घातक बनी कुपोषण जैसी गंभीर बीमारी में भी जिम्मेदार उदासीन नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं ओपीडी सेवाएं ठप होने से भी अतिकुपोषित बच्चे चिंहित नहीं हो सके हैं। ऐसे में कई अतिकुपोषित बच्चों को बिना उपचार के ही रहना पड़ा है। बीते वर्ष 2019 के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो अप्रैल से अगस्त तक 480 अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर उपचार दिया गया था, लेकिन गत वर्ष के माह में स्वास्थ्य विभाग के पास अतिकुपोषित बच्चों का आंकड़ा तक नहीं है। जबकि बाल विकास विभाग अतिकुपोषित बच्चों के चिह्नींकरण का दावा कर रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग इससे अंजान बना हुआ है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बाल विकास विभाग द्वारा विभाग को अब तक कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। जनपद में एनआरसी केंद्र भी बंद चल रहे हैं। इससे बिना उपचार के ही रहना पड़ रहा है।
लॉक डाउन से अब तक के अतिकुपोषित बच्चों की कोई सूचना नहीं है। एनआरसी सेंटर बंद होने से उपचार भी नहीं दिया गया है। - डॉ. गुलाम हुसैन, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
बीते माह में जनपद में 1737 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं। वहीं अल्प कुपोषित बच्चों की संख्या 11240 पाई गई है। - पुष्पा वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी