{"_id":"58b3233d4f1c1bcd568310fe","slug":"u-dias-code-will-identify-schools","type":"story","status":"publish","title_hn":"यू-डायस कोड से पहचाने जाएंगे विद्यालय ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यू-डायस कोड से पहचाने जाएंगे विद्यालय
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Feb 2017 12:19 AM IST
विज्ञापन
school, lalitpur news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित विद्यालय अब यू-डायस कोड से पहचाने जाएंगे। जिस विद्यालय का कोड जारी नहीं होगा, उसे विद्यालयों की गिनती में नहीं गिना जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाचार्यों को स्कूलों पर डायस कोड लिखवाने के निर्देश दिए हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाती है। जिसकी आड़ में कई अमान्य स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिससे सैकड़ों बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। यह अकेले जिले की समस्या नहीं है बल्कि समूचे प्रदेश में अमान्य विद्यालयों का मकड़जाल फैला है। जिसे ध्यान में रखकर मान्य विद्यालयों के यू- डायस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक इनफार्मेशन सिस्टम) कोड जारी किए जा रहे हैं। विद्यालय कोड में जिला व ब्लाक का कोड समाहित होता है। जैसे ही शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर डायस कोड डालेंगे, वैसे ही कुछ ही क्षणों में विद्यालय की कुंडली सामने आ जाएगी।
इससे विद्यालय की मान्यता की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस मामले में निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की मनमानी उजागर हो रही है। नगर में शायद ही किसी विद्यालय पर यू डायस कोड लिखा गया हो, जिससे अभिभावकों को मान्य और अमान्य विद्यालयों में विभेद कर सकें। बीते माहों में बीएसए ने जनवाचन एवं डायस कोड लिखवाने के लिए स्कूलों को धनराशि अवमुक्त की गई थी। जिसके बाद भी तमाम प्रधानाचार्यों ने डायस कोड स्कूलों पर लिखवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
विज्ञापन
ऐसे बनता यू डायस कोड
जिले का कोड 093, ब्लाक का कोड 701 व विद्यालय कोड 100 या 200 होता है। ब्लाक बार का 701, बिरधा का 702, जखौरा का 703, तालबेहट का 704, महरौनी का 705, मड़ावरा का 706, नगर क्षेत्र का 707 कोड तय किया गया है।
विज्ञापन
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाती है। जिसकी आड़ में कई अमान्य स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिससे सैकड़ों बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। यह अकेले जिले की समस्या नहीं है बल्कि समूचे प्रदेश में अमान्य विद्यालयों का मकड़जाल फैला है। जिसे ध्यान में रखकर मान्य विद्यालयों के यू- डायस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक इनफार्मेशन सिस्टम) कोड जारी किए जा रहे हैं। विद्यालय कोड में जिला व ब्लाक का कोड समाहित होता है। जैसे ही शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर डायस कोड डालेंगे, वैसे ही कुछ ही क्षणों में विद्यालय की कुंडली सामने आ जाएगी।
विज्ञापन
इससे विद्यालय की मान्यता की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस मामले में निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की मनमानी उजागर हो रही है। नगर में शायद ही किसी विद्यालय पर यू डायस कोड लिखा गया हो, जिससे अभिभावकों को मान्य और अमान्य विद्यालयों में विभेद कर सकें। बीते माहों में बीएसए ने जनवाचन एवं डायस कोड लिखवाने के लिए स्कूलों को धनराशि अवमुक्त की गई थी। जिसके बाद भी तमाम प्रधानाचार्यों ने डायस कोड स्कूलों पर लिखवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
विज्ञापन
ऐसे बनता यू डायस कोड
जिले का कोड 093, ब्लाक का कोड 701 व विद्यालय कोड 100 या 200 होता है। ब्लाक बार का 701, बिरधा का 702, जखौरा का 703, तालबेहट का 704, महरौनी का 705, मड़ावरा का 706, नगर क्षेत्र का 707 कोड तय किया गया है।