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Lalitpur News: इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने शुरू कराई थी गिरिराज जी की पूजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बालाजी मंदिर प्रांगण में पांचवें दिन की कथा में गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई गई। कथा व्यास ने कहा कि श्री कृष्ण ने इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए गिरिराज जी की पूजा की।
शहर के तालाबपुरा में डोंड़ाघाट स्थित बालाजी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावनधाम से पधारे कथावाचक पं. जयकिशन दास महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण के कहने पर ही बृजवासियों ने गोवर्धन पहुंचकर गोवर्धन पर्वत का पूजन की और छप्पन भोग लगाया। आज भी वृंदावन में बांके बिहारी को दिन में आठ बार भोग लगाया जाता है। पूरे सात दिन भगवान श्रीकृष्ण ने भूखे प्यासे रहकर गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा था और इंद्र के प्रकोप से बृजवासियों और गो माताओं को बचाए रखा था। कथा में पूतना उद्धार एवं बकासुर वध का वृतांत सुनाते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म व बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन किया। बताया कि गोपियों ने कई वर्षों तक तप किया था, तब भगवान ने उनके बीच अवतार लेकर उनको आनंद प्रदान किया।
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ललितपुर। बालाजी मंदिर प्रांगण में पांचवें दिन की कथा में गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई गई। कथा व्यास ने कहा कि श्री कृष्ण ने इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए गिरिराज जी की पूजा की।
शहर के तालाबपुरा में डोंड़ाघाट स्थित बालाजी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावनधाम से पधारे कथावाचक पं. जयकिशन दास महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण के कहने पर ही बृजवासियों ने गोवर्धन पहुंचकर गोवर्धन पर्वत का पूजन की और छप्पन भोग लगाया। आज भी वृंदावन में बांके बिहारी को दिन में आठ बार भोग लगाया जाता है। पूरे सात दिन भगवान श्रीकृष्ण ने भूखे प्यासे रहकर गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा था और इंद्र के प्रकोप से बृजवासियों और गो माताओं को बचाए रखा था। कथा में पूतना उद्धार एवं बकासुर वध का वृतांत सुनाते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म व बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन किया। बताया कि गोपियों ने कई वर्षों तक तप किया था, तब भगवान ने उनके बीच अवतार लेकर उनको आनंद प्रदान किया।
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