फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Tiddi group attack

टिड्डीदल से खरीफ की फसलों को बचाना बना चुनौती

Mon, 29 Jun 2020 11:16 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2020 11:16 PM IST
विज्ञापन
Tiddi group attack
टिड्डी - फोटो : ??????
ललितपुर। बरसात के बाद टिड्डी दल का खतरा और बढ़ गया है। खेतों में पैदा होने वाली खरीफ की फसलें टिड्डियों के लिए भोजन बनेंगी। ऐसे में खरीफ की फसल को बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। एक महीने से अधिक समय से टिड्डियां क्षेत्र में मंडरा रही हैं। टिड्डियों के झुंड के झुंड मध्यप्रदेश के रास्ते जिले के गांवों के ऊपर से निकल जा रहे हैं, लेकिन खेत खाली होने के कारण अब तक टिड्डियों से किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन, अब बरसात शुरू हो गई है और खेतों में खरीफ फसलों की बुवाई भी शुरू हो गई है। ऐसे में टिड्डी दल से खेतों में फसलों को सुरक्षित बचाना किसानों के लिए चुनौती साबित होने वाला है। जिले का किसान टिड्डियों के हमले को लेकर जागरूक नहीं है और न ही वह जानता है कि टिड्डियों से फसलों को कैसे बचाया जाए। एक तरह से कोरोना की तरह ही टिड्डियों का हमला भी पहली बार हो रहा है।
विज्ञापन

टिड्डियों को अभी तक खेत खाली होने के कारण भोजन के रूप में पीपल का पत्ता ही मिला था। टिड्डियों के झुंड के हमले का ही असर था कि जिस पीपल के पेड़ पर टिड्डियां बैठीं, उस पीपल के पेड़ के सभी हरे पत्ते टिड्डियों ने तीन से चार मिनट में ही खा लिए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि टिड्डियां अपने भोजन को कितनी जल्दी चट कर जाती हैं।
विज्ञापन

खरीफ फसलों में उड़द, मूंग, सोयाबीन, बाजरा, मक्का आदि प्रमुख फसलें होती हैं। बुंदेलखंड में अब तक खेती की जो परंपरा है, उसके अनुसार किसान खरीफ की फसलों का बीज खेतों में डाल देता है और फिर निश्चिंत हो जाता है और वह खेतों की ओर बहुत कम जाता है। इसलिए टिड्डियों के हमले में किसानों की फसलों को अधिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि टिड्डियों को एक खेत की फसल खाने में दो से तीन मिनट ही लगेंगे और जब तक किसान कुछ समझेगा, तब तक फसलें नष्ट हो जाएंगी। ऐसे में किसानों के सामने अपनी फसलों को बचाने की चुनौती आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

मैदानी इलाकों में दिए हैं अंडे
टिड्डियों के हमले से यह पूरा साल प्रभावित रहेगा। भले ही मानसून अच्छा आए, लेकिन टिड्डियों से फसलों को बचा पाना किसानों के सामने बहुत बड़ी परीक्षा साबित होगी। टिड्डियां भुरभुरी मिट्टी में अंडे देती हैं। इसलिए गंगा और यमुना के दोआबा में टिड्डियों की पैदावार बढ़ने की आशंका है।

किसानों को बहुत जागरूक होकर खेतों की रखवाली करने की जरूरत है। जो किसान जरा सी भी लापरवाही करेंगे, उनके खेतों में टिड्डियां हमला करके फसल को नष्ट कर सकती हैं। यह पूरा साल किसानों के लिए कठिन साबित होगा। जो किसान जागरूक होंगे, वही फसलों की रक्षा कर पाएंगे। कृषि विभाग टिड्डियों से फसलों के बचाव के लिए पूरा प्रयास कर रहा है। - गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed