{"_id":"5eac71c88ebc3e908b260211","slug":"three-bus-send-labour-his-house-lalitpur-news-jhs165782958","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमझरा घाटी सीमा से तीन बसों से मजदूरों को भेजा गया उनके घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमझरा घाटी सीमा से तीन बसों से मजदूरों को भेजा गया उनके घर
विज्ञापन
बसों से जाते अमझरा घाटी में फंसे मजदूर
- फोटो : LALITPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डोंगराखुर्द। एक मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन, कोरोना वायरस के कारण मजदूरों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। शुक्रवार को अमझरा घाटी बार्डर पर फंसे मजदूरों को तीन बसों के माध्यम से उनके घरों को भेजा गया।
मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर पैदल सफर करके, भूखे पेट, नंगे पैर, राज्यों की सीमाओं पर कड़े पहरे, वनवासी जीवन जैसे हालातों से गुजरना पड़ रहा है। मजदूरों ने कभी सोचा नहीं होगा कि उनके लिए ऐसा भी दिन आएगा। यदि गांवों में मजदूरों को रोजगार मिल जाए तो उन्हें शहरों की ओर क्यों भागना पड़े। जनपद की उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश सीमा अमझरा घाटी पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम गौना के पास बड़ी संख्या में बाहर से मजदूर आए थे, लेकिन बार्डर पर फंस गए । उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी थे। उन्हें कभी खाना मिल गया तो कभी भूखे पेट भी सोना पड़ा था। रात्रि में खुले आसमान की नीचे सोने को मजबूर होना पड़ा था। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से लगातार प्रकाशित किया। जिसे संज्ञान में लेकर अधिकारियों ने स्पेशल बसों द्वारा मजदूरों को उनके गृह जनपद भिजवाजा गया।
शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार विजेता, तहसीलदार अभिषेक कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी फूलचंद, थाना प्रभारी आनंद पांडेय नाराहट, गजेंद्र सिंह, उदयवीर सिंह, अभय सिंह कानूनगो ने रोडवेज की तीन बसों के माध्यम से मजदूरों को गृह जनपद भिजवा दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर पैदल सफर करके, भूखे पेट, नंगे पैर, राज्यों की सीमाओं पर कड़े पहरे, वनवासी जीवन जैसे हालातों से गुजरना पड़ रहा है। मजदूरों ने कभी सोचा नहीं होगा कि उनके लिए ऐसा भी दिन आएगा। यदि गांवों में मजदूरों को रोजगार मिल जाए तो उन्हें शहरों की ओर क्यों भागना पड़े। जनपद की उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश सीमा अमझरा घाटी पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम गौना के पास बड़ी संख्या में बाहर से मजदूर आए थे, लेकिन बार्डर पर फंस गए । उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी थे। उन्हें कभी खाना मिल गया तो कभी भूखे पेट भी सोना पड़ा था। रात्रि में खुले आसमान की नीचे सोने को मजबूर होना पड़ा था। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से लगातार प्रकाशित किया। जिसे संज्ञान में लेकर अधिकारियों ने स्पेशल बसों द्वारा मजदूरों को उनके गृह जनपद भिजवाजा गया।
विज्ञापन
शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार विजेता, तहसीलदार अभिषेक कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी फूलचंद, थाना प्रभारी आनंद पांडेय नाराहट, गजेंद्र सिंह, उदयवीर सिंह, अभय सिंह कानूनगो ने रोडवेज की तीन बसों के माध्यम से मजदूरों को गृह जनपद भिजवा दिया है।
विज्ञापन