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जन औषधि केंद्र में एक महीने से दवाइयों का टोटा
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जिला अस्पताल परिसर में स्थित जन औषधि केंद्र
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। जिला अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र में एक माह से अधिक समय से दवाइयों का टोटा बना हुआ है। अब केवल 40 फीसदी दवाइयां उपलब्ध हैं, जो एक माह तक चल जाएंगी। इसके बाद आपूर्ति न होने पर स्टॉक निल हो जाएगा। केंद्र में दवाइयों की कमी का खामियाजा निर्धन मरीजों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, मरीजों को मजबूरन महंगी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
केंद्र सरकार द्वारा मरीजों को सस्ती दरों में दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि योजना चलाई गई है। जिला मुख्यालय पर इकलौता जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल परिसर में संचालित किया जा रहा है, जहां पर लगभग 600 प्रकार की दवाइयां व 50 प्रकार के उत्पाद मिलते हैं, लेकिन वर्तमान में जन औषधि केंद्र पर एक माह से दवाइयों की कमी बनी हुई है। आर्डर के बाद भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाईं हैं। स्थित यह है कि केंद्र पर 40 फीसदी दवाइयां उपलब्ध हैं, जो एक माह में बिक जाएंगी। एक माह में आपूर्ति न होने पर केंद्र बंद करने की नौबत आ जाएगी।
उधर, दवा लेने आ रहे अधिकांश मरीजों को दवा नहीं मिल पा रही है। साथ ही सर्जरी का कोई सामान नहीं है। मरीज केंद्र पर आकर दवा की मांग करते हैं पर दवाइयां न होने से मायूस होकर वापस हो जाते हैं। मरीजों को मजबूरी में महंगी दवाइयां खरीदना पड़ रही है। कई निर्धन मरीज पैसों के अभाव में बिना दवा के ही वापस हो रहे हैं।
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चिकित्सकों की कमी से नहीं हो पा रही बिक्री
केंद्र संचालक दीपचंद्र कुशवाहा ने बताया कि चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इससे सभी दवाइयों चलन में नहीं हैं। सीमित मात्रा में ही मरीजों को सस्ती दवा और सर्जिकल प्रोडक्ट का लाभ मरीजों को मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि 50 फीसदी दवाइयों की बिक्री ही हो पाती है।
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कैसे पहुंचे केंद्र तक, रास्ते में है सेप्टिक टैंक का गड्डा
जन औषधि केंद्र के सामने एक सेप्टिक टैंक बना हुआ है, जिसे मरम्मत के खोला गया है। जिसे एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी बंद नहीं किया गया है। इससे अधिकांश मरीज केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। निकलने में गड्ढे में गिरने का भय रहता है। साथ ही गंदी दुर्गंध से ठहरना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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केंद्र के सामने खुले गड्ढे की शीघ्र ही मरम्मत कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा और बंद कराया जाएगा।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष
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केंद्र सरकार द्वारा मरीजों को सस्ती दरों में दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि योजना चलाई गई है। जिला मुख्यालय पर इकलौता जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल परिसर में संचालित किया जा रहा है, जहां पर लगभग 600 प्रकार की दवाइयां व 50 प्रकार के उत्पाद मिलते हैं, लेकिन वर्तमान में जन औषधि केंद्र पर एक माह से दवाइयों की कमी बनी हुई है। आर्डर के बाद भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाईं हैं। स्थित यह है कि केंद्र पर 40 फीसदी दवाइयां उपलब्ध हैं, जो एक माह में बिक जाएंगी। एक माह में आपूर्ति न होने पर केंद्र बंद करने की नौबत आ जाएगी।
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उधर, दवा लेने आ रहे अधिकांश मरीजों को दवा नहीं मिल पा रही है। साथ ही सर्जरी का कोई सामान नहीं है। मरीज केंद्र पर आकर दवा की मांग करते हैं पर दवाइयां न होने से मायूस होकर वापस हो जाते हैं। मरीजों को मजबूरी में महंगी दवाइयां खरीदना पड़ रही है। कई निर्धन मरीज पैसों के अभाव में बिना दवा के ही वापस हो रहे हैं।
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चिकित्सकों की कमी से नहीं हो पा रही बिक्री
केंद्र संचालक दीपचंद्र कुशवाहा ने बताया कि चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इससे सभी दवाइयों चलन में नहीं हैं। सीमित मात्रा में ही मरीजों को सस्ती दवा और सर्जिकल प्रोडक्ट का लाभ मरीजों को मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि 50 फीसदी दवाइयों की बिक्री ही हो पाती है।
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कैसे पहुंचे केंद्र तक, रास्ते में है सेप्टिक टैंक का गड्डा
जन औषधि केंद्र के सामने एक सेप्टिक टैंक बना हुआ है, जिसे मरम्मत के खोला गया है। जिसे एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी बंद नहीं किया गया है। इससे अधिकांश मरीज केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। निकलने में गड्ढे में गिरने का भय रहता है। साथ ही गंदी दुर्गंध से ठहरना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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केंद्र के सामने खुले गड्ढे की शीघ्र ही मरम्मत कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा और बंद कराया जाएगा।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष