{"_id":"694d854cb62b415e130bfe74","slug":"there-has-been-a-steady-decline-in-the-number-of-families-receiving-100-days-of-employment-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-148562-2025-12-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: एक सौ दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या में लगातार गिरावट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: एक सौ दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या में लगातार गिरावट
विज्ञापन
चालू वित्तीय वर्ष के नौ माह में महज 3,269 परिवारों को मिला पूरा रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी/सिलावन। सरकार भले ही विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना लागू करने की तैयारी कर रही हो, लेकिन वर्तमान में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जिले में 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बीते पांच वर्षों के आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि 100 दिन का रोजगार हासिल करने वाले परिवारों की संख्या में हर वर्ष लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिले के छह ब्लॉकों में 20,471 परिवारों को 100 दिन का पूरा रोजगार मिला था। वहीं, 2022-23 में यह संख्या घटकर 14,698 रह गई, यानी 5,773 परिवार इस दायरे से बाहर हो गए। वित्तीय वर्ष 2023-24 में गिरावट और गहराई, जब केवल 11,952 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका। वर्ष 2024-25 में यह संख्या और सिमटकर 11,845 रह गई।चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के नौ माह बीत जाने के बावजूद अब तक महज 3,269 परिवार ही 100 दिन का रोजगार प्राप्त कर सके हैं।
नए कानून में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी
मनरेगा की जगह लेने वाले नए कानून वीबी-जी राम जी के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। माना जा रहा है कि इस कानून के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता और मजबूती मिलेगी। इसका उद्देश्य गांवों में रहने वाले श्रमिकों, किसानों और भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ाना तथा उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यह योजना महिलाओं, कमजोर वर्गों और जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -
मनरेगा के तहत रोजगार की उपलब्धता काम की मांग, मौसम और बजट आवंटन पर निर्भर करती है। कई बार सभी श्रमिक पूरे 100 दिन का काम नहीं मांगते। इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष के आंकड़े आंशिक हैं, इसलिए इनमें कमी दिखाई दे रही है। स्थिति में सुधार के लिए अधिक से अधिक कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं।
हृदेश अहिरवार
अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, मनरेगा
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी/सिलावन। सरकार भले ही विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना लागू करने की तैयारी कर रही हो, लेकिन वर्तमान में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जिले में 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बीते पांच वर्षों के आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि 100 दिन का रोजगार हासिल करने वाले परिवारों की संख्या में हर वर्ष लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिले के छह ब्लॉकों में 20,471 परिवारों को 100 दिन का पूरा रोजगार मिला था। वहीं, 2022-23 में यह संख्या घटकर 14,698 रह गई, यानी 5,773 परिवार इस दायरे से बाहर हो गए। वित्तीय वर्ष 2023-24 में गिरावट और गहराई, जब केवल 11,952 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका। वर्ष 2024-25 में यह संख्या और सिमटकर 11,845 रह गई।चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के नौ माह बीत जाने के बावजूद अब तक महज 3,269 परिवार ही 100 दिन का रोजगार प्राप्त कर सके हैं।
विज्ञापन
नए कानून में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी
मनरेगा की जगह लेने वाले नए कानून वीबी-जी राम जी के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। माना जा रहा है कि इस कानून के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता और मजबूती मिलेगी। इसका उद्देश्य गांवों में रहने वाले श्रमिकों, किसानों और भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ाना तथा उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यह योजना महिलाओं, कमजोर वर्गों और जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
विज्ञापन
मनरेगा के तहत रोजगार की उपलब्धता काम की मांग, मौसम और बजट आवंटन पर निर्भर करती है। कई बार सभी श्रमिक पूरे 100 दिन का काम नहीं मांगते। इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष के आंकड़े आंशिक हैं, इसलिए इनमें कमी दिखाई दे रही है। स्थिति में सुधार के लिए अधिक से अधिक कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं।
हृदेश अहिरवार
अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, मनरेगा