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बारिश से बदला मौसम का मिजाज

Sat, 28 Jan 2017 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 28 Jan 2017 01:42 AM IST
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The weather changed from rain
winter lalitpur news - फोटो : demo
बीते रोज एनसीआर एवं पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश के बाद जिले के मौसम का भी मिजाज बदल गया है। बृहस्पतिवार की रात तालबेहट क्षेत्र में कई जगहों पर ओले गिरे तो वहीं, जिला मुख्यालय समेत कई ग्रामीण स्थलों में शीत लहर के साथ हल्की बारिश भी होने से जनपद का पारा करीब छह डिग्री तक लुढ़क गया है। हल्की बारिश से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं।
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बीते एक सप्ताह से दिन व दिन जनपद में सर्दी का कहर कम होता चला जा रहा था। बढ़ते हुए तापमान के कारण विगत दो-तीन दिनों से लोगों के शरीर से गर्म कपड़ों का बोझ भी कम होता दिखाई देने लगा था।
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  दोपहर के समय कई लोग धूप से भी दूरी बनाने लगे थे। बृहस्पतिवार की देर शाम तक जनपद का अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री तक पहुंच गया था। वहीं शहर के मुख्य चौराहों पर व सार्वजनिक स्थलों पर रात के समय जलने वाले अलावों की संख्या में भी कमी आनी शुरू हो गई थी। लेकिन रात करीब साढ़े आठ बजे अचानक से जनपद में दस्तक दी। शीत लहरों ने जनपद का पारा करीब छह-सात डिग्री तक लुढ़का दिया है। शीत हवाओं के साथ देर रात करीब एक बजे से जिला मुख्यालय पर बरसात हुई और जनपद के कई ग्रामीण इलाकों में बरसात ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। शीत लहरों का सबसे अधिक कहर तो तालबेहट क्षेत्र में देखने को मिला, यहां तो बारिश व हवाओं के साथ-साथ ओले भी गिरे हैं। इसके बाद शुक्रवार की सुबह से जनपद का पारा लुड़क कर अधिकतम 20 डिग्री और न्यूनतम पारा 09 डिग्री तक पहुंच गया है।            
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ठंड नहीं पर ओला व पाला से होगा फसल को नुकसान            
कृषि उप निदेशक हंशराज बताते हैं कि तालबेहट क्षेत्र में ओलों ने फसल को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन मामूली बारिश से फसल को कोई नुक्सान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि फसल की अच्छी पैदावार के लिए बड़ी हुई ठंठ फसल के अनुकूल है। यदि कोहरा अधिक पड़ता है तो फसल में पाला लगाने से नुक्सान हो पहुंच सकता है।            
हंसराज            
उप कृषि निदेशक, ललितपुर।            
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बच्चों के साथ अस्थमा व हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज रहे सावधानी             
ललितपुर। मौसम में हुए परिवर्तन व बढ़ती हुई सर्दी के दौरान सबसे अधिक समस्या छोटे बच्चों और अस्थमा व हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को होती है, ऐसे में सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा उपचार है। यह सलाह जनपद के वरिष्ठ फिजीशियन डा. अमित चतुर्वेदी ने दी है। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में आमतौर पर सर्दी जुकाम जैसी समस्याएं होती हैं, लेकिन इस मौसम में नीमोनिया, ब्रांकाइटिस जैसी बीमारियां भी हो सकती है। सर्दियों में स्वस्थ रहना है, तो अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाये। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक होती है, उन्हें सर्दी जुकाम जैसी समस्याएं नहीं होती। गले की खराश दूर करने के लिए गुनगुने पानी में नमक डालकर गार्गल करें। 
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इन बीमारियों से रहें सतर्क            
ब्रांकाइटिस            
- 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ब्रांकाइटिस की समस्या अधिक होती है। वैसे यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखी गयी है। ऐसे में मरीज को सांस लेने में तकलीफ के साथ खांसी भी होती है, जो कई हफ्तों तक रहती है। बच्चों में ब्रांकाइटिस के कारण बुखार भी हो जाता है। अगर किसी व्यकित को लगातार बुखार और खांसी रहती है, साथ ही सीने में दर्द और खांसते समय मुंह से खून आता है, तो चिकित्सक से मिलने में देर नहीं करनी चाहिए।            

-इंफ्लूएंजा            
6 महीने से 2 साल तक के बच्चों के लिए इन्फ्लूएंजा का टीका बाजार में उपलब्ध है। अपने शिशु का टीकाकरण जरूर कराये। इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, इसके लक्षण है थकान, बुखार और सांस लेने में तकलीफा इन्फ्लूएंजा की गंभीर सिथतियों में नीमोनिया भी हो सकता है।            

-आरएसवी            
रेस्पायरेटरी सिनसायशियल वायरस के कारण लोगों को सर दर्द, बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होती है। आरएसवी सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। लेकिन बुजुर्गों और नवजात शिशुओं के लिए यह समस्या अधिक गंभीर होती है। बच्चों में सांस लेने में तकलीफ के साथ खांसी भी हो सकती है। ऐसी सिथिति नवजात शिशु के लिए नीमोनिया का कारण भी बन सकती है। यह बहुत ही संक्रामक रोग है और इसके वायरस मरीज के खांसने या छींकने से फैल जाते है।


-गैस्ट्रोएंट्राइटिस            
बच्चों में गैस्ट्रोएंट्राइटिस या आंत में और पेट में सूजन का एक कारण रोटावायरस भी हो सकता है। यह समस्या अकसर सर्दियों के अंत में और गर्मियों की शुरुआत में देखने को मिलती है। इसमें उलिटयों और दस्त की समस्या होती है जिसके कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में मरीज को ओआरएस देना चाहिए। यह बीमारी दूषित खाना खाने व दूषित पानी पीने से फैलती है।
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