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पाण्डवन मेले में आए लोगों की पहाड़ों से रिसते पानी ने प्यास बुझाई

Wed, 22 Jan 2020 12:12 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 12:12 AM IST
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The water from the mountains quenched the thirsty of people in pandawan festival
पांडव वन मेला में लगी भीड़ - फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द। पांडव वन में लगे मेला में लोगों की भारी भीड़ रही, लेकिन मेला में आने वाले लोगों की प्यास बुझाने के लिए कोई इंतजाम नहीं था। केवल पहाड़ से रिसने वाले प्राकृतिक स्रोत से निकल रहे जल से हजारों लोगों ने प्यास बुझाई। यह जल स्थानीय लोगों में ‘जलायु’ के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर लगने वाले मेला का मंगलवार को समापन हो गया।
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पांडव वन चारों तरफ से घने जंगल से घिरा है। चार किलोमीटर इर्द-गिर्द कोई भी मकान नहीं है। यहां तक पहुंचने का रास्ता बहुत दुर्गम है। सुनसान और टेढ़ी-मेढ़ी पहाड़ी पर स्थित हनुमानजी मंदिर पर वर्षों से मकर संक्रांति पर मेला लगता है। पहाड़ पर पांच शिवलिंग लगे हैं, लेकिन मान्यता है कि यह शिवलिंग नहीं, बल्कि पांच पांडवों के स्वरूप हैं। साथ में द्रोपदी का भी स्वरूप है। यहीं पर आम के पेड़ के नीचे पत्थर की चट्टानों से यह जल हमेशा रिसता रहता है, जो पांडवों की प्रतिमाओं पर आता है। इसी रिसाव वाले स्थान पर हौदी बना दी गई है, जिसमें पानी इकट्ठा होता है। इस पानी के अलावा अन्य कोई पानी का स्रोत नहीं है, केवल एक हैंडपंप लगा है।
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मेला में प्रतिदिन आसपास के हजारों लोगों का आना-जाना रहा, लेकिन यहां पर किसी को पानी की असुविधा नहीं हुई। पहाड़ से निकलने वाले प्राकृतिक जलस्रोत से लोगों ने अपनी प्यास बुझाई। एक और वजह, इस प्राकृतिक जल को पीने की मान्यता भी है। इस जल को यहां के निवासी जलायु कहते हैं।
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मेला तक पहुंचने के लिए वाहनों की सुविधा नहीं होने के बाद भी परिवार के परिवार यहां आते हैं। बुजुर्ग अपने नाती-पोतों को कंधों पर बैठाकर लाते हैं। दुकानदार अपनी दुकानें लगाते हैं, जिसमे चाय-नाश्ता, सौंदर्य-प्रसाधन, किराना, नाई, झूला, बच्चों के खिलोने, गुब्बारे, मिट्टी के बर्तनों सहित महिलाओं के लिए घर गृहस्थी के उपयोग की वस्तुएं मिलती है। मंगलवार को अंतिम दिन क्षेत्रीय लोगों और मध्य प्रदेश के अनेक श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर ढोल-नगड़िया के साथ नाच- गानों से भरे बुंदेली गीतों द्वारा मेले में उपस्थित लोगों का आनंद दोगुना कर दिया। मेला में श्रीमद्भागवत कथा दिव्या भारती ने सुनाई। मंगलवार को कथा की पूर्णाहुति भी हो गई। कन्याभोज एवं भंडारे के बाद मेला का समापन हो गया।

पुलिस व्यवस्था रही मुस्तैद
घने जंगलों के बीच लगने वाले पांडव वन मेला में पुलिस की व्यवस्था मुस्तैद रही। हजारों की भीड़ होने के बाद भी मेला में किसी तरह की अव्यवस्था नहीं रही। मेला समिति द्वारा पुलिसकर्मियों का सम्मान किया गया। आयोजन सफल बनाने में ग्राम भौंती, पारौल, पटना, बरौदिया, नीमखेरा, सिगंवारा, बरखेड़ा, गुरयाना, डोंगराखुर्द, दिदौनियां, पहाड़ी कलां आदि के ग्राम प्रधानों व क्षेत्रीय लोंगों की भूमिका रही।

पांडव वन में पहाड़ से रिसते पानी से जलाभिषेक करते श्रद्घालु

पांडव वन में पहाड़ से रिसते पानी से जलाभिषेक करते श्रद्घालु- फोटो : LALITPUR

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