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पीड़ितों को अब तक नहीं मिल सकी क्षतिपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:50 AM IST
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bitut bibhag, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। डेढ़ दर्जन से अधिक विद्युत दुर्घटनाओं के पीड़ितों को अनुसंधान आख्या की रिपोर्ट नहीं होने के कारण क्षतिपूर्ति नहीं मिल सकी है। लोक अदालत में आए ऐसे मामलों के निपटारे के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर गत दिनों विद्युत सुरक्षा निदेशालय की टीम ने जनपद आकर विद्युत दुर्घटनाओं की अनुसंधान आख्या देने के लिए निरीक्षण किया है।
जनपद में विद्युत दुर्घटनाओं में पशुओं व मानवों की मौत जब तब होती रहती है। विद्युत दुर्घटनाओं में मृत्यु होने पर बिजली विभाग द्वारा फार्म-44 सूचना के 24 घंटे के भीतर सुरक्षा निदेशालय को भेजना होता है। जिस पर सुरक्षा निदेशालय की टीम उस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच करती है।
जांच में सुरक्षा निदेशालय द्वारा दुर्घटना होने के कारण का पता लगाकर कमियों को दूर किया जाता है, ताकि दोबारा से दुर्घटना न हो सके। इसके साथ ही सुरक्षा निदेशालय द्वारा विभागीय लापरवाही या फिर अन्य कारणों से हुई दुर्घटना का पता लगाकर अनुसंधान रिपोर्ट में पूर्ण विवरण दिया जाता है। जिसके आधार पर पीड़ित को विद्युत दुर्घटना की क्षतिपूर्ति विभाग द्वारा दी जाती है। लेकिन बहुत से मामलों में विभागीय लापरवाही के चलते विद्युत दुर्घटना में मानव या पशु क्षति होने पर फार्म-44 समय से भरकर सुरक्षा निदेशालय को नहीं भेजा जाता है, जिसके चलते अनुसंधान आख्या में देरी हो जाती है और पीड़ितों को क्षतिपूर्ति पाने के लिए महीनों या फिर कई बार वर्षों तक भटकना होता है।
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अदालत के विद्युत दुर्घटना वाले करीब डेढ़ दर्जन वाद लंबित चल रहे हैं। जिसके लिए खुद जिलाधिकारी ने सुरक्षा निदेशालय से अनुसंधान आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। तीन दिन पूर्व सुरक्षा निदेशालय द्वारा जनपद आकर विद्युत दुर्घटनाओं की अनुसंधान आख्या देने के लिए मामलों का निरीक्षण किया गया।
दुर्घटना होने के बाद भी दूर नहीं होती कमियां
सुरक्षा निदेशालय द्वारा दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाकर कमियां दूर करने के निर्देश जारी किए जाते हैं, ताकि आगे से उस स्थान पर दुर्घटनाएं न हो सकेें। लेकिन विभाग सुरक्षा निदेशालय द्वारा बताई जाने वाली कमियों को दूर नहीं करता है। इसका कारण यह है कि विभागीय अधिकारी खुद जिम्मेदार होते हैं। मेंटीनेंस का भुगतान संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को ही करना होता है। इसी वजह से फार्म-44 सुरक्षा निदेशालय को समय से भेजने में हीलाहवाली की जाती है।
विद्युत दुर्घटना पर यह है प्रक्रिया
विद्युत दुर्घटना में पशु या मानव के घायल या मृत्यु होने पर घटना की सूचना, घटनाक्रम की संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट, चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट जो सीएमओ से सत्यापित हो, फसल जलने या अन्य विद्युत दुर्घटनाओं के संबंध में विद्युत विभाग को देनी होती है। इसके बाद विभाग द्वारा घटना की पुष्टि होने पर निरीक्षण उपरांत फार्म-44 सुरक्षा निदेशालय को भेजता है, जिस पर सुरक्षा निदेशालय अपनी अनुसंधान आख्या देता है, जिसके आधार पर पीड़ित को क्षतिपूर्ति दी जाती है।
ह में विभिन्न प्रकार के विद्युत दुर्घटनाओं के मामलों में 40 पीड़ितों को 15 लाख पंद्रह हजार रुपए क्षतिपूर्ति दी गई है। यह क्षतिपूर्ति कई पीड़ितों को घटना के चार से पांच वर्ष बाद दी जा सकी है।
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जनपद में विद्युत दुर्घटनाओं में पशुओं व मानवों की मौत जब तब होती रहती है। विद्युत दुर्घटनाओं में मृत्यु होने पर बिजली विभाग द्वारा फार्म-44 सूचना के 24 घंटे के भीतर सुरक्षा निदेशालय को भेजना होता है। जिस पर सुरक्षा निदेशालय की टीम उस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच करती है।
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जांच में सुरक्षा निदेशालय द्वारा दुर्घटना होने के कारण का पता लगाकर कमियों को दूर किया जाता है, ताकि दोबारा से दुर्घटना न हो सके। इसके साथ ही सुरक्षा निदेशालय द्वारा विभागीय लापरवाही या फिर अन्य कारणों से हुई दुर्घटना का पता लगाकर अनुसंधान रिपोर्ट में पूर्ण विवरण दिया जाता है। जिसके आधार पर पीड़ित को विद्युत दुर्घटना की क्षतिपूर्ति विभाग द्वारा दी जाती है। लेकिन बहुत से मामलों में विभागीय लापरवाही के चलते विद्युत दुर्घटना में मानव या पशु क्षति होने पर फार्म-44 समय से भरकर सुरक्षा निदेशालय को नहीं भेजा जाता है, जिसके चलते अनुसंधान आख्या में देरी हो जाती है और पीड़ितों को क्षतिपूर्ति पाने के लिए महीनों या फिर कई बार वर्षों तक भटकना होता है।
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अदालत के विद्युत दुर्घटना वाले करीब डेढ़ दर्जन वाद लंबित चल रहे हैं। जिसके लिए खुद जिलाधिकारी ने सुरक्षा निदेशालय से अनुसंधान आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। तीन दिन पूर्व सुरक्षा निदेशालय द्वारा जनपद आकर विद्युत दुर्घटनाओं की अनुसंधान आख्या देने के लिए मामलों का निरीक्षण किया गया।
दुर्घटना होने के बाद भी दूर नहीं होती कमियां
सुरक्षा निदेशालय द्वारा दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाकर कमियां दूर करने के निर्देश जारी किए जाते हैं, ताकि आगे से उस स्थान पर दुर्घटनाएं न हो सकेें। लेकिन विभाग सुरक्षा निदेशालय द्वारा बताई जाने वाली कमियों को दूर नहीं करता है। इसका कारण यह है कि विभागीय अधिकारी खुद जिम्मेदार होते हैं। मेंटीनेंस का भुगतान संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को ही करना होता है। इसी वजह से फार्म-44 सुरक्षा निदेशालय को समय से भेजने में हीलाहवाली की जाती है।
विद्युत दुर्घटना पर यह है प्रक्रिया
विद्युत दुर्घटना में पशु या मानव के घायल या मृत्यु होने पर घटना की सूचना, घटनाक्रम की संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट, चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट जो सीएमओ से सत्यापित हो, फसल जलने या अन्य विद्युत दुर्घटनाओं के संबंध में विद्युत विभाग को देनी होती है। इसके बाद विभाग द्वारा घटना की पुष्टि होने पर निरीक्षण उपरांत फार्म-44 सुरक्षा निदेशालय को भेजता है, जिस पर सुरक्षा निदेशालय अपनी अनुसंधान आख्या देता है, जिसके आधार पर पीड़ित को क्षतिपूर्ति दी जाती है।
ह में विभिन्न प्रकार के विद्युत दुर्घटनाओं के मामलों में 40 पीड़ितों को 15 लाख पंद्रह हजार रुपए क्षतिपूर्ति दी गई है। यह क्षतिपूर्ति कई पीड़ितों को घटना के चार से पांच वर्ष बाद दी जा सकी है।