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परिवार न्यायालय की नई इमारत होगी तैयार, भूमि तलाश में जुटा राजस्व विभाग
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ललितपुर। परिवार न्यायालय की नई इमारत बनाने के लिए जिले में भूमि की तलाश की जा रही है। हाईकोर्ट की एक्सल टीम द्वारा शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। जिसे मंजूरी मिल गई है। जिला न्यायाधीश के आदेश पर तहसीलदार सदर ने काम शुरू करा दिया है। परिवार न्यायालय का करीब आधा हेक्टेयर भूमि में निर्माण होगा।
परिवार न्यायालय अधिनियम 1994 के तहत प्रत्येक जिले में परिवार न्यायालय की स्थापना की गई। न्यायालय में परिवारों में होने वाले विवादों जिसमें तलाक, ज्यूडिशल सेप्रेेशन, दांपत्य जीवन की पुर्नस्थापना, भरण पोषण, बच्चे की कस्टडी, पति-पत्नी के बीच होने वाले संपत्ति विवाद और पारिवारिक विवाद निपटाए जाते हैं।
वर्तमान में इस परिवार न्यायालय का संचालन न्यायालय परिसर में किया जा रहा है। लेकिन अब परिवार न्यायालय के लिए नई इमारत बनाने की कवायद तेज हो गई है। आधा हेक्टेयर में बनने वाली इस कोर्ट में वादकारियों के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। न्यायालय परिसर के आसपास भूमि न होने के कारण जिला मुख्यालय के करीब भूमि की तलाश की जा रही है। जनपद न्यायाधीश के आदेश पर तहसीलदार सदर श्याममणि त्रिपाठी के नेतृत्व में गठित राजस्व विभाग की टीम भूमि तलाशने में जुट गई है।
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समझौता करवाने की प्राथमिकता
परिवार न्यायालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों के मध्य समझौता करवाने और परिवारों कोटूटने नहीं देना है। जब भी कोई तलाक से संबधित मामला प्रस्तुत किया जाता है, तो सबसे पहले न्यायालय द्वारा पक्षकारों में समझौता करवाने का प्रयास किया जाता है। पक्षकारों में किसी प्रकार का समझौता होने की संभावना खत्म हो जाने के बाद ही न्यायाधीश तलाक की कार्रवाई प्रारंभ करते हैं।
परिवार न्यायालय की इमारत निर्माण के लिए न्याय विभाग के आदेशों के क्रम में करीब आधा हेक्टेयर भूमि की तलाश की जा रही है। शीघ्र ही भूमि को चिह्नित कर न्याय विभाग के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
- श्याममणि त्रिपाठी, तहसीलदार सदर
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परिवार न्यायालय अधिनियम 1994 के तहत प्रत्येक जिले में परिवार न्यायालय की स्थापना की गई। न्यायालय में परिवारों में होने वाले विवादों जिसमें तलाक, ज्यूडिशल सेप्रेेशन, दांपत्य जीवन की पुर्नस्थापना, भरण पोषण, बच्चे की कस्टडी, पति-पत्नी के बीच होने वाले संपत्ति विवाद और पारिवारिक विवाद निपटाए जाते हैं।
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वर्तमान में इस परिवार न्यायालय का संचालन न्यायालय परिसर में किया जा रहा है। लेकिन अब परिवार न्यायालय के लिए नई इमारत बनाने की कवायद तेज हो गई है। आधा हेक्टेयर में बनने वाली इस कोर्ट में वादकारियों के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। न्यायालय परिसर के आसपास भूमि न होने के कारण जिला मुख्यालय के करीब भूमि की तलाश की जा रही है। जनपद न्यायाधीश के आदेश पर तहसीलदार सदर श्याममणि त्रिपाठी के नेतृत्व में गठित राजस्व विभाग की टीम भूमि तलाशने में जुट गई है।
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समझौता करवाने की प्राथमिकता
परिवार न्यायालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों के मध्य समझौता करवाने और परिवारों कोटूटने नहीं देना है। जब भी कोई तलाक से संबधित मामला प्रस्तुत किया जाता है, तो सबसे पहले न्यायालय द्वारा पक्षकारों में समझौता करवाने का प्रयास किया जाता है। पक्षकारों में किसी प्रकार का समझौता होने की संभावना खत्म हो जाने के बाद ही न्यायाधीश तलाक की कार्रवाई प्रारंभ करते हैं।
परिवार न्यायालय की इमारत निर्माण के लिए न्याय विभाग के आदेशों के क्रम में करीब आधा हेक्टेयर भूमि की तलाश की जा रही है। शीघ्र ही भूमि को चिह्नित कर न्याय विभाग के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
- श्याममणि त्रिपाठी, तहसीलदार सदर