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Lalitpur News: महायोजना का नक्शा छह माह बाद भी नहीं हो सका तैयार
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। छह माह से शहर के विकास व विस्तार का खाका तैयार नहीं हो पा रहा है। इसके लिए दिल्ली की कंपनी को नामित किया गया है। कंपनी के कर्मचारियों ने यहां आधा-अधूरा सर्वे किया है, इससे शहर का विकास अवरुद्ध है।
शहर के विकास की महायोजना 2011 तैयार की गई थी। इसके लिए पूर्व में इसका नक्शा बनाया गया था। लेकिन, कुछ खामियों को देखते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने उसे निरस्त कर दिया था। नए सिरे से महायोजना तैयार करने के लिए दिल्ली की एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन, कंपनी अभी तक नक्शा तैयार नहीं कर पाई है। कंपनी ने विधिवत सर्वे भी नहीं किया। इस संबंध में विनियमित क्षेत्र से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। कंपनी के कार्य में रुचि न दिखाने के कारण जनपद की विस्तार योजनाएं ठप पड़ी हैं।
पिछली महायोजना वर्ष 1998 में लागू हुई थी, जो वर्ष 2011 तक थी। वर्तमान में शहर का विस्तार काफी हो गया है, महायोजना तैयार न होने से अव्यवस्थित तरीके से शहर का विकास हो रहा है। आसपास के ग्रामीण इलाकों में कॉलोनी काटकर लोगों ने अपने आवास बना लिए हैं। हरित पट्टी का भी सही निर्धारण नहीं हो पा रहा है।
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नक्शा तैयार होने के बाद भी लगता है छह माह समय
नक्शा तैयार होने के बाद उस पर आपत्ति मांगी जाती है, जिसका निस्तारण जिला स्तरीय कमेटी करती है। यही नहीं नक्शा तैयार करते समय नगर पालिका व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को साथ में लिया जाता है, जिससे सड़कों पर भूमि के प्रकार की सही जानकारी हो सके।
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महायोजना का नक्शा इसलिए हुआ था निरस्त
कंपनी ने जो नक्शा तैयार किया था, उसमें नियम विरुद्ध तरीके से पुराने नक्शे में दिखाई गई भूमि का स्वरूप परिवर्तन कर दिया गया था। इसलिए उस नक्शे को निरस्त करते हुए नए सिरे से नक्शा तैयार किया गया।
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कंपनी ने अभी तक महायोजना का नक्शा तैयार नहीं किया है। कई बार रिमाइंडर जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा जा चुका है।
ओपी मालवीय, अवर अभियंता नक्शा विभाग।
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ललितपुर। छह माह से शहर के विकास व विस्तार का खाका तैयार नहीं हो पा रहा है। इसके लिए दिल्ली की कंपनी को नामित किया गया है। कंपनी के कर्मचारियों ने यहां आधा-अधूरा सर्वे किया है, इससे शहर का विकास अवरुद्ध है।
शहर के विकास की महायोजना 2011 तैयार की गई थी। इसके लिए पूर्व में इसका नक्शा बनाया गया था। लेकिन, कुछ खामियों को देखते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने उसे निरस्त कर दिया था। नए सिरे से महायोजना तैयार करने के लिए दिल्ली की एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन, कंपनी अभी तक नक्शा तैयार नहीं कर पाई है। कंपनी ने विधिवत सर्वे भी नहीं किया। इस संबंध में विनियमित क्षेत्र से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। कंपनी के कार्य में रुचि न दिखाने के कारण जनपद की विस्तार योजनाएं ठप पड़ी हैं।
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पिछली महायोजना वर्ष 1998 में लागू हुई थी, जो वर्ष 2011 तक थी। वर्तमान में शहर का विस्तार काफी हो गया है, महायोजना तैयार न होने से अव्यवस्थित तरीके से शहर का विकास हो रहा है। आसपास के ग्रामीण इलाकों में कॉलोनी काटकर लोगों ने अपने आवास बना लिए हैं। हरित पट्टी का भी सही निर्धारण नहीं हो पा रहा है।
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नक्शा तैयार होने के बाद भी लगता है छह माह समय
नक्शा तैयार होने के बाद उस पर आपत्ति मांगी जाती है, जिसका निस्तारण जिला स्तरीय कमेटी करती है। यही नहीं नक्शा तैयार करते समय नगर पालिका व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को साथ में लिया जाता है, जिससे सड़कों पर भूमि के प्रकार की सही जानकारी हो सके।
महायोजना का नक्शा इसलिए हुआ था निरस्त
कंपनी ने जो नक्शा तैयार किया था, उसमें नियम विरुद्ध तरीके से पुराने नक्शे में दिखाई गई भूमि का स्वरूप परिवर्तन कर दिया गया था। इसलिए उस नक्शे को निरस्त करते हुए नए सिरे से नक्शा तैयार किया गया।
कंपनी ने अभी तक महायोजना का नक्शा तैयार नहीं किया है। कई बार रिमाइंडर जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा जा चुका है।
ओपी मालवीय, अवर अभियंता नक्शा विभाग।