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ट्रांसफार्मर ने रोकी नलकूप की धार

Tue, 29 Nov 2016 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 29 Nov 2016 12:38 AM IST
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The edge of the transformer stopped tubewells
water crisis, lalitpur news - फोटो : demo
ट्रांसफार्मर के अभाव में जनपद के डेढ़ सौ नलकूप कनेक्शन बंद हैं। ऐसे में किसानों को सिंचाई कार्य के लिए परेशान होना पड़ रहा है। 
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शासन की सामान्य योजना के तहत किसानों को विद्युत नलकूप संयोजन के लिए 68 हजार रुपए की छूट का प्रावधान है। इसके चलते किसानों द्वारा नलकूप संयोजन के लिए विद्युत विभाग में लगातार आवेदन किए जा रहे हैं। विद्युत विभाग द्वारा टीसी जारी होने के बाद उपभोक्ताओं ने कनेक्शनों की धनराशि भी जमा कर दी गई है। विद्युत ट्रांसफार्मर, विद्युत खंभे, तार, इंसुलेटर व अन्य विद्युत सामान उपलब्ध कराने को सूची विद्युत स्टोर पहुंचा दी गई है। चार दिन पूर्व तक विद्युत स्टोर में 207 उपभोक्ताओं के सापेक्ष मात्र 64 ट्रांसफार्मर ही बंट सके हैं। 
हालांकि विभाग द्वारा दो दिन बाद चौबीस ट्रांसफार्मर आने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में विद्युत स्टोर विभाग द्वारा अब भी 143 ट्रांसफार्मर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाना बाकी है। विद्युत ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं होने के चलते किसानों को सिंचाई कार्य में बाधा हो रही है। इतनी अधिक राशि जमा करने के बाद भी उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं होने से फसलें होने से पहले ही सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
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सिंचाई के दूसरे साधन की जुगाड़ भी फेल 
 नलकूप विद्युत संयोजन के लिए ट्रांसफार्मर नहीं मिलने के चलते जैसे-तैसे किसानों द्वारा आसपास के लोगों से अन्य स्रोतों के माध्यम से खेती में सिंचाई की जुगाड़ की जा रही है, लेकिन बहुत से किसानों को सिंचाई के दूसरे साधन जुटाने में भी सफलता नहीं मिल पा रही है। ऐसे में बुवाई के दौरान  सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे फसलें उगने से पूर्व ही सूख सकती हैं।
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जहां ट्रांसफार्मर हैं, वहां लो-वोल्टेज
 विद्युत विभाग द्वारा जिन उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर उपलब्ध करा दिए गए हैं, उनको लो-वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है। नाराहट, बिरधा, महरौनी और बालाबेहट क्षेत्र के सैकड़ों किसानों  को लो-वोल्टेज की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे क्षेत्रों में बिजली मिलने के बाद भी किसानों के ट्यूबवेल शोपीस बने हुए हैं, जिससे उन्हें सिंचाई के लिए नहर, कुआं, नदी, तालाब व अन्य साधन जुटाने पड़ रहे हैं।
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