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Lalitpur News: 29 साल में बदली जिले की तस्वीर, सिंचाई और पेयजल सुविधाओं में आई बड़ी क्रांति
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के गठन के बाद बीते 29 वर्षों में ललितपुर ने विकास की लंबी यात्रा तय की है। सिंचाई और पेयजल सुविधाओं के क्षेत्र में हुए बदलावों ने जिले की तस्वीर बदल दी है। इस परिवर्तन का साक्षी न केवल जनपदवासी रहे हैं, बल्कि अमर उजाला ने भी विकास के हर पड़ाव को करीब से देखा और दर्ज किया है। इन वर्षों में जहां बांध परियोजनाओं की संख्या दोगुनी हुई, वहीं जल जीवन मिशन के जरिए गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने लगा है।
विंध्याचल पर्वतमाला की तलहटी में बसे ललितपुर जिले से बेतवा, जामनी, सजनाम, शहजाद, धसान, बंडई, ओड़ी, सौंर, उटारी और रोहिणी समेत कई नदियां प्रवाहित होती हैं। वर्ष 1997 से पहले जिले में गोविंद सागर, जामनी, माताटीला, राजघाट, सजनाम, शहजाद और रोहिणी समेत सात प्रमुख बांध परियोजनाएं संचालित थीं। इसके बावजूद किसानों को सिंचाई और पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता था। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नदियों पर निर्भर थे।
जिले के गठन के बाद सिंचाई संसाधनों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। इसके तहत कचनौंदा, जमड़ार, भावनी, बंडई, लोअर रोहिणी, उटारी और भौंरट बांध परियोजनाओं की सौगात मिली। इनमें से भौंरट बांध परियोजना निर्माणाधीन है। इन परियोजनाओं से निकली नहरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने लगा। परिणामस्वरूप खेती की उत्पादकता बढ़ी और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।
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वर्तमान में जिले में 13 बांध परियोजनाएं संचालित हैं, जबकि एक परियोजना निर्माणाधीन है। इसके अलावा बालाबेहट क्षेत्र में सौंर नदी पर नई बांध परियोजना की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
पेयजल क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य तेजी से किया गया है। जिले के 551 गांवों में से 500 से अधिक गांवों तक पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति शुरू हो चुकी है। इससे ग्रामीणों की कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नदियों पर निर्भरता कम हुई है और उन्हें घरों पर ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
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शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना और जाखलौन पंप कैनाल से बढ़ी सिंचाई क्षमता
हाल ही में शहजाद बांध पर करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना का निर्माण पूरा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले के दौरे के दौरान इसका लोकार्पण किया था। रबी सीजन से इस परियोजना के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं जाखलौन क्षेत्र में बेतवा नदी पर निर्मित जाखलौन पंप कैनाल परियोजना भी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके जरिए बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई सुविधा मिल रही है।
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जिले में सिंचाई के प्रमुख साधन
900 किलोमीटर लंबा नहर नेटवर्क
3,120 निजी नलकूप
35,245 पक्के कूप
3.15 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि
2.91 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र
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जल जीवन मिशन की प्रगति
• 15 पाइप पेयजल परियोजनाएं संचालित
• 3,218 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई
• 551 गांवों तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य
• 1,70,366 घरों में नल कनेक्शन
• हजारों ग्रामीण परिवारों को मिल रहा शुद्ध पेयजल
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ललितपुर। जिले के गठन के बाद बीते 29 वर्षों में ललितपुर ने विकास की लंबी यात्रा तय की है। सिंचाई और पेयजल सुविधाओं के क्षेत्र में हुए बदलावों ने जिले की तस्वीर बदल दी है। इस परिवर्तन का साक्षी न केवल जनपदवासी रहे हैं, बल्कि अमर उजाला ने भी विकास के हर पड़ाव को करीब से देखा और दर्ज किया है। इन वर्षों में जहां बांध परियोजनाओं की संख्या दोगुनी हुई, वहीं जल जीवन मिशन के जरिए गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने लगा है।
विंध्याचल पर्वतमाला की तलहटी में बसे ललितपुर जिले से बेतवा, जामनी, सजनाम, शहजाद, धसान, बंडई, ओड़ी, सौंर, उटारी और रोहिणी समेत कई नदियां प्रवाहित होती हैं। वर्ष 1997 से पहले जिले में गोविंद सागर, जामनी, माताटीला, राजघाट, सजनाम, शहजाद और रोहिणी समेत सात प्रमुख बांध परियोजनाएं संचालित थीं। इसके बावजूद किसानों को सिंचाई और पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता था। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नदियों पर निर्भर थे।
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जिले के गठन के बाद सिंचाई संसाधनों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। इसके तहत कचनौंदा, जमड़ार, भावनी, बंडई, लोअर रोहिणी, उटारी और भौंरट बांध परियोजनाओं की सौगात मिली। इनमें से भौंरट बांध परियोजना निर्माणाधीन है। इन परियोजनाओं से निकली नहरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने लगा। परिणामस्वरूप खेती की उत्पादकता बढ़ी और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।
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वर्तमान में जिले में 13 बांध परियोजनाएं संचालित हैं, जबकि एक परियोजना निर्माणाधीन है। इसके अलावा बालाबेहट क्षेत्र में सौंर नदी पर नई बांध परियोजना की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
पेयजल क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य तेजी से किया गया है। जिले के 551 गांवों में से 500 से अधिक गांवों तक पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति शुरू हो चुकी है। इससे ग्रामीणों की कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नदियों पर निर्भरता कम हुई है और उन्हें घरों पर ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना और जाखलौन पंप कैनाल से बढ़ी सिंचाई क्षमता
हाल ही में शहजाद बांध पर करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना का निर्माण पूरा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले के दौरे के दौरान इसका लोकार्पण किया था। रबी सीजन से इस परियोजना के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं जाखलौन क्षेत्र में बेतवा नदी पर निर्मित जाखलौन पंप कैनाल परियोजना भी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके जरिए बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई सुविधा मिल रही है।
जिले में सिंचाई के प्रमुख साधन
900 किलोमीटर लंबा नहर नेटवर्क
3,120 निजी नलकूप
35,245 पक्के कूप
3.15 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि
2.91 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र
जल जीवन मिशन की प्रगति
• 15 पाइप पेयजल परियोजनाएं संचालित
• 3,218 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई
• 551 गांवों तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य
• 1,70,366 घरों में नल कनेक्शन
• हजारों ग्रामीण परिवारों को मिल रहा शुद्ध पेयजल