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देश को जोड़ सकती है हिंदी
ललितपुर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2015 12:47 AM IST
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तालबेहट (ललितपुर)। प्रदेश राज्यपाल श्रीराम नाइक ने कहा कि राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का जीवन असाधारण था। उनका मानना था कि हिंदी ही एक मात्र ऐसी भाषा है, जो देश भर को जोड़ सकती है। हिंदी के प्रचार- प्रसार के लिए उन्होंने काफी कष्ट उठाए। वह भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जयंती एवं सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
हैलीकाप्टर खराब होने के कारण 30 मिनट विलंब से पहुंचे राज्यपाल ने क्षमा मांगते हुए कहा कि कार्यक्रम में आने के दो कारण हैं। पहला राजर्षि पुुरुषोत्तमदास टंडन के महोत्सव में आकर आपसे मिलना और दूसरा उत्तर प्रदेश में आए मुझे 13 माह हुए है। मैं काफी घूमा हूं। प्रदेश के 75 जिलों में से मैं 46 जिलों में घूम चुका हूं। राजर्षि टंडन के जीवन पर प्रकार डालते हुए उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें नजदीक से देखा है। टंडन जी देश के इतिहास में असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। सन 1857 के संग्राम को अंग्रेजों ने बगावत कहा था। यह बगावत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता का पहला युद्ध था। सावरकर ने उसे उजागर किया था। सन 1857 के बाद लगभग 25 वर्ष बाद राजर्षि का जन्म हुआ।
उस समय सबसे बड़ी चुनौती देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने की थी। स्वाधीनता आंदोलन में टंडन शामिल हुए और महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई, लेकिन उनका उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद कैसा देश बने यह था। यह उनकी सोच थी। इसी भूमिका में उन्होंने हिंदी का आकलन किया। हिंदी सबको जोड़ सकती है। हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए उन्होंने जीवन भर कष्ट उठाया।
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वह पत्रकार भी थे। उस समय की पत्रकारिता आजादी प्राप्त करने का ध्येय थी। टंडन जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह ज्ञान के सागर थे। सहजता उनके जीवन में थी। इसी कारण देवराहा बाबा द्वारा उन्हें राजर्षि की उपाधि दी । वह संविधान सभा के सदस्य थे तथा वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाना चाहते थे, क्योंकि वंदे मातरम आजादी का महामंत्र था। अंत में तय हुआ था कि वंदेमातरम को राष्ट्रगान जैसा सम्मान मिलता रहेगा।
उन्होंने कहा कि जब वह वर्ष 1992 में लोकसभा के सदस्य बनकर पहुंचे तो उन्होंने जन गण मन और वंदे मातरम को लोकसभा और राज्यसभा में शुरू कराने का प्रयास किया और अंतत: सफलता मिल गई। उन्होंने कहा कि राजर्षि टंडन के कारण ही हिंदी को सम्मान मिला है। राजर्षि टंडन के आग्रह पर भी उत्तर प्रदेश की न्याय प्रक्रिया हिंदी में सबसे पहले शुरू हुई। इस मौके पर उन्होंने उर्दू के बारे में कहा कि उर्दू वर्ग विशेष की भाषा नहीं है, बल्कि यह भी आमजन की भाषा है। तीस मिनट राज्यपाल ने हिंदी उत्थान के किए गए कार्यों को याद किया।
नगर पंचायत अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने तालबेहट की ऐतिहासिक एवं भौगोलिक स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि तालबेहट सांप्रदायिक सद्भावना की नगरी है। भाजपा विधानमंडल में नेता प्रतिपक्ष सुरेश खन्ना ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राजर्षि हिंदुस्तान की हस्ती थे। वह बचपन से लेकर अंतिम समय तक देश के लिए समर्पित रहे। वह सादगी एवं त्याग की सच्ची मूर्ति थे। उन्होंने हिंदी को हक एवं सम्मान दिलाने के लिए काफी कार्य किया। खत्री महासभा के अखिल भारतीय अध्यक्ष महेन्द्र कपूर ने भी अपने राजर्षि के जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें आडंबर रहित व्यक्ति बताया।
इससे पूर्व महामहिम राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर एवं राजर्षि के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम से पूर्व एवं बाद में सामूहिक राष्ट्रीय गान हुआ। कार्यक्रम के बाद में कार्यक्रम के संयोजक अनिल कंचन ने उन्हें एक स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में कालपी के पूर्व विधायक डा. अरुण मेहरोत्रा, अनिल कुमार कंचन, मनोज पुरोहित, बिपिन कंचन, आनंद कंचन, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रदीप चौबे, भगवत दयाल सिंधी, सांसद प्रतिनिधि डा. जगदीश सिंह चौहान, संतोष साहनी, राजीव खत्री, राजकुमार टंडन, श्याम किशोर खन्ना आदि उपस्थित रहे। संचालन रमेश चंद्र ने किया।
बाक्स .......
विभिन्न संगठनों ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन
ललितपुर। मंगलवार को राज्यपाल श्रीराम नाइक के तालबेहट आगमन पर विभिन्न संगठनों ने उन्हें ज्ञापन सौंपे।
भारतीय जनता पार्टी के ज्ञापन में पाली तहसील में शामिल किए गए गांव धौलपुरा, गदौरा, खिरिया, उबारी, पटना, पारौल, डोंगरा खुर्द, गुढ़ा, बरेजा, दिगवार आदि को मड़ावरा तहसील में शामिल करने, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि का मुआवजा शीघ्र दिलाने की मांग की गई। इस मौके पर भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रदीप चौबे, बब्बूराजा बुंदेला, हरीराम निरंजन, डा. जगदीश सिंह चौहान, भगवत दयाल सिंधी, शशिशेखर पांडेय, महेश श्रीवास्तव, देवेंद्र गुरु आदि उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने राज्यपाल को दिए ज्ञापन में तालबेहट राजकीय बालिका इंटर कालेज में विज्ञान संकाय शुरू कराने, मड़ावरा में गर्ल्स इंटर कालेज और ललितपुर में गर्ल्स कालेज, पीएन इंटर कालेज में विज्ञान संकाय शुरू कराने, इग्नू का सेंटर नेहरू महाविद्यालय में बनाए जाने की मांग की। इस मौके पर पवन साहू, शिवम सोनी, गौरव गौतम, गजेंद्र प्रताप सिंह, अजय नायक आदि उपस्थित रहे।
उप्र व्यापार मंडल ने ज्ञापन देकर जिले को पर्यटन के नक्शे पर लाने, जिले को ज्यादा से ज्यादा बिजली देने की मांग की गई। इस मौके पर जिलाध्यक्ष अजय जैन साइकिल, राजेश बड़कुल, अभिषेक सोनी, अशोक दैलवारा आदि उपस्थित रहे।
श्री दिंगबर जैन पंचायत समिति ने संलेखना (संथारा) पर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि जैन समाज को उनके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाए। इस मौके पर अनिल अंचल, प्रदीप सतरवांस, राजेंद्र कुमार जैन, डा. अक्षय टड़ैया, महेंद्र जैन मयूर, नरेंद्र कड़ंकी, अजय जैन साइकिल, अशोक दैलवारा, मनोज बबीना, राजेश बड़कुल, अभिषेक सोनी आदि उपस्थित रहे।
बुंदेलखंड नागरिक मोर्चा के संयोजक भूपेंद्र जैन ने क्षेत्र के विकास के लिए ज्ञापन सौंपे। इसमें बुंदेलखंड पर्यटन परिपथ बनाए जाने, बुंदेलखंड विकास निगम की स्थापना करने बुंदेलखंड सिंचाई विकास निगम का गठन करने और ललितपुर को वाटर स्पोर्ट हब बनाए जाने की मांग की। इस मौके पर विनीत चतुर्वेदी, अभय श्रीमाली आदि साथ रहे।
तालबेहट में युवा भारत के राजेन्द्र शर्मा ने अपने ज्ञापन में सर्वजन समान शिक्षा प्रणाली को लागू कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले सुल्तानपुर के बर्खास्त शिक्षक शिवकुमार पाठक को बहाल किए जाने एवं दोनों सदनों में सम्मानित करने की मांग की। वहीं, नगर पंचायत अध्यक्षा मुक्ता ने नगर की विकास के संबंध में एक ज्ञापन दिया।
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हैलीकाप्टर खराब होने के कारण 30 मिनट विलंब से पहुंचे राज्यपाल ने क्षमा मांगते हुए कहा कि कार्यक्रम में आने के दो कारण हैं। पहला राजर्षि पुुरुषोत्तमदास टंडन के महोत्सव में आकर आपसे मिलना और दूसरा उत्तर प्रदेश में आए मुझे 13 माह हुए है। मैं काफी घूमा हूं। प्रदेश के 75 जिलों में से मैं 46 जिलों में घूम चुका हूं। राजर्षि टंडन के जीवन पर प्रकार डालते हुए उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें नजदीक से देखा है। टंडन जी देश के इतिहास में असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। सन 1857 के संग्राम को अंग्रेजों ने बगावत कहा था। यह बगावत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता का पहला युद्ध था। सावरकर ने उसे उजागर किया था। सन 1857 के बाद लगभग 25 वर्ष बाद राजर्षि का जन्म हुआ।
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उस समय सबसे बड़ी चुनौती देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने की थी। स्वाधीनता आंदोलन में टंडन शामिल हुए और महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई, लेकिन उनका उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद कैसा देश बने यह था। यह उनकी सोच थी। इसी भूमिका में उन्होंने हिंदी का आकलन किया। हिंदी सबको जोड़ सकती है। हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए उन्होंने जीवन भर कष्ट उठाया।
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वह पत्रकार भी थे। उस समय की पत्रकारिता आजादी प्राप्त करने का ध्येय थी। टंडन जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह ज्ञान के सागर थे। सहजता उनके जीवन में थी। इसी कारण देवराहा बाबा द्वारा उन्हें राजर्षि की उपाधि दी । वह संविधान सभा के सदस्य थे तथा वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाना चाहते थे, क्योंकि वंदे मातरम आजादी का महामंत्र था। अंत में तय हुआ था कि वंदेमातरम को राष्ट्रगान जैसा सम्मान मिलता रहेगा।
उन्होंने कहा कि जब वह वर्ष 1992 में लोकसभा के सदस्य बनकर पहुंचे तो उन्होंने जन गण मन और वंदे मातरम को लोकसभा और राज्यसभा में शुरू कराने का प्रयास किया और अंतत: सफलता मिल गई। उन्होंने कहा कि राजर्षि टंडन के कारण ही हिंदी को सम्मान मिला है। राजर्षि टंडन के आग्रह पर भी उत्तर प्रदेश की न्याय प्रक्रिया हिंदी में सबसे पहले शुरू हुई। इस मौके पर उन्होंने उर्दू के बारे में कहा कि उर्दू वर्ग विशेष की भाषा नहीं है, बल्कि यह भी आमजन की भाषा है। तीस मिनट राज्यपाल ने हिंदी उत्थान के किए गए कार्यों को याद किया।
नगर पंचायत अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने तालबेहट की ऐतिहासिक एवं भौगोलिक स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि तालबेहट सांप्रदायिक सद्भावना की नगरी है। भाजपा विधानमंडल में नेता प्रतिपक्ष सुरेश खन्ना ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राजर्षि हिंदुस्तान की हस्ती थे। वह बचपन से लेकर अंतिम समय तक देश के लिए समर्पित रहे। वह सादगी एवं त्याग की सच्ची मूर्ति थे। उन्होंने हिंदी को हक एवं सम्मान दिलाने के लिए काफी कार्य किया। खत्री महासभा के अखिल भारतीय अध्यक्ष महेन्द्र कपूर ने भी अपने राजर्षि के जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें आडंबर रहित व्यक्ति बताया।
इससे पूर्व महामहिम राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर एवं राजर्षि के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम से पूर्व एवं बाद में सामूहिक राष्ट्रीय गान हुआ। कार्यक्रम के बाद में कार्यक्रम के संयोजक अनिल कंचन ने उन्हें एक स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में कालपी के पूर्व विधायक डा. अरुण मेहरोत्रा, अनिल कुमार कंचन, मनोज पुरोहित, बिपिन कंचन, आनंद कंचन, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रदीप चौबे, भगवत दयाल सिंधी, सांसद प्रतिनिधि डा. जगदीश सिंह चौहान, संतोष साहनी, राजीव खत्री, राजकुमार टंडन, श्याम किशोर खन्ना आदि उपस्थित रहे। संचालन रमेश चंद्र ने किया।
बाक्स .......
विभिन्न संगठनों ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन
ललितपुर। मंगलवार को राज्यपाल श्रीराम नाइक के तालबेहट आगमन पर विभिन्न संगठनों ने उन्हें ज्ञापन सौंपे।
भारतीय जनता पार्टी के ज्ञापन में पाली तहसील में शामिल किए गए गांव धौलपुरा, गदौरा, खिरिया, उबारी, पटना, पारौल, डोंगरा खुर्द, गुढ़ा, बरेजा, दिगवार आदि को मड़ावरा तहसील में शामिल करने, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि का मुआवजा शीघ्र दिलाने की मांग की गई। इस मौके पर भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रदीप चौबे, बब्बूराजा बुंदेला, हरीराम निरंजन, डा. जगदीश सिंह चौहान, भगवत दयाल सिंधी, शशिशेखर पांडेय, महेश श्रीवास्तव, देवेंद्र गुरु आदि उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने राज्यपाल को दिए ज्ञापन में तालबेहट राजकीय बालिका इंटर कालेज में विज्ञान संकाय शुरू कराने, मड़ावरा में गर्ल्स इंटर कालेज और ललितपुर में गर्ल्स कालेज, पीएन इंटर कालेज में विज्ञान संकाय शुरू कराने, इग्नू का सेंटर नेहरू महाविद्यालय में बनाए जाने की मांग की। इस मौके पर पवन साहू, शिवम सोनी, गौरव गौतम, गजेंद्र प्रताप सिंह, अजय नायक आदि उपस्थित रहे।
उप्र व्यापार मंडल ने ज्ञापन देकर जिले को पर्यटन के नक्शे पर लाने, जिले को ज्यादा से ज्यादा बिजली देने की मांग की गई। इस मौके पर जिलाध्यक्ष अजय जैन साइकिल, राजेश बड़कुल, अभिषेक सोनी, अशोक दैलवारा आदि उपस्थित रहे।
श्री दिंगबर जैन पंचायत समिति ने संलेखना (संथारा) पर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि जैन समाज को उनके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाए। इस मौके पर अनिल अंचल, प्रदीप सतरवांस, राजेंद्र कुमार जैन, डा. अक्षय टड़ैया, महेंद्र जैन मयूर, नरेंद्र कड़ंकी, अजय जैन साइकिल, अशोक दैलवारा, मनोज बबीना, राजेश बड़कुल, अभिषेक सोनी आदि उपस्थित रहे।
बुंदेलखंड नागरिक मोर्चा के संयोजक भूपेंद्र जैन ने क्षेत्र के विकास के लिए ज्ञापन सौंपे। इसमें बुंदेलखंड पर्यटन परिपथ बनाए जाने, बुंदेलखंड विकास निगम की स्थापना करने बुंदेलखंड सिंचाई विकास निगम का गठन करने और ललितपुर को वाटर स्पोर्ट हब बनाए जाने की मांग की। इस मौके पर विनीत चतुर्वेदी, अभय श्रीमाली आदि साथ रहे।
तालबेहट में युवा भारत के राजेन्द्र शर्मा ने अपने ज्ञापन में सर्वजन समान शिक्षा प्रणाली को लागू कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले सुल्तानपुर के बर्खास्त शिक्षक शिवकुमार पाठक को बहाल किए जाने एवं दोनों सदनों में सम्मानित करने की मांग की। वहीं, नगर पंचायत अध्यक्षा मुक्ता ने नगर की विकास के संबंध में एक ज्ञापन दिया।