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कंटेनमेंट जोन में फंसे शिक्षकों व कर्मचारियों का हो रहा उत्पीड़न
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ललितपुर। कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने कंटेनमेंट जोन में फंसे शिक्षकों और कर्मचारियों के उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।
जिलाध्यक्ष केदारनाथ तिवारी ने बताया कि कंटेनमेंट जोन में रोगी के घर के आसपास के रास्तों को बंद कर दिया गया है। इस वजह से आसपास रहने वाले कर्मचारियों व शिक्षकों को कार्यालय पहुंचने में असुविधा हो रही है। इसे ध्यान में रखकर जिलास्तरीय अधिकारियों को कंटेनमेंट जोन में निवास करने वाले शिक्षक और कर्मचारियों की कार्यस्थल पर उपस्थिति के संबंध में सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेने के लिए निर्देशित करने की जरूरत है। संज्ञान में आया है कि कई सरकारी कार्यालय एवं प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक भी कोरोना वायरस संक्रमित हो गए हैं, ऐसे में उन विद्यालयों को तुरंत सैनिटाइज कराने व उक्त कार्यस्थल पर कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों को होम आइसोलेशन में भेजे जाने की आवश्यकता है, लेकिन कुछ
अधिकारियों द्वारा इस प्रक्रिया को अपनाते समय शिक्षक और कर्मचारियों को उत्पीड़ित किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला बेसिक शिक्षा विभाग का सामने आया है। पिछले दिनों प्राथमिक विद्यालय खोखरा में कार्यरत एक शिक्षक को कोरोना वायरस का संक्रमण हो गया। जब कार्यरत स्टाफ आइसोलेशन में गया तो उस क्षेत्र के के सेक्टर मजिस्ट्रेट होने के कारण जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निरीक्षण के दौरान कार्यरत स्टाफ को अनुपस्थित बताकर वेतन रोक दिया। इसी प्रकार कई अध्यापकों के कंटेनमेंट जोन में फंसे होने की सूचना विद्यालय में दर्ज है। इसे नजरअंदाज कर बिना स्पष्टीकरण के शिक्षकों को अनुपस्थित दर्शा दिया गया, साथ ही वेतन भी रोक दिया गया। उन्होंने इस पर रोक लगाने की मांग की है।
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जिलाध्यक्ष केदारनाथ तिवारी ने बताया कि कंटेनमेंट जोन में रोगी के घर के आसपास के रास्तों को बंद कर दिया गया है। इस वजह से आसपास रहने वाले कर्मचारियों व शिक्षकों को कार्यालय पहुंचने में असुविधा हो रही है। इसे ध्यान में रखकर जिलास्तरीय अधिकारियों को कंटेनमेंट जोन में निवास करने वाले शिक्षक और कर्मचारियों की कार्यस्थल पर उपस्थिति के संबंध में सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेने के लिए निर्देशित करने की जरूरत है। संज्ञान में आया है कि कई सरकारी कार्यालय एवं प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक भी कोरोना वायरस संक्रमित हो गए हैं, ऐसे में उन विद्यालयों को तुरंत सैनिटाइज कराने व उक्त कार्यस्थल पर कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों को होम आइसोलेशन में भेजे जाने की आवश्यकता है, लेकिन कुछ
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अधिकारियों द्वारा इस प्रक्रिया को अपनाते समय शिक्षक और कर्मचारियों को उत्पीड़ित किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला बेसिक शिक्षा विभाग का सामने आया है। पिछले दिनों प्राथमिक विद्यालय खोखरा में कार्यरत एक शिक्षक को कोरोना वायरस का संक्रमण हो गया। जब कार्यरत स्टाफ आइसोलेशन में गया तो उस क्षेत्र के के सेक्टर मजिस्ट्रेट होने के कारण जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निरीक्षण के दौरान कार्यरत स्टाफ को अनुपस्थित बताकर वेतन रोक दिया। इसी प्रकार कई अध्यापकों के कंटेनमेंट जोन में फंसे होने की सूचना विद्यालय में दर्ज है। इसे नजरअंदाज कर बिना स्पष्टीकरण के शिक्षकों को अनुपस्थित दर्शा दिया गया, साथ ही वेतन भी रोक दिया गया। उन्होंने इस पर रोक लगाने की मांग की है।
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