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तालाब सूखने से मत्स्य पालन को भारी नुकसान

Sun, 01 May 2016 01:38 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Sun, 01 May 2016 01:38 AM IST
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talab, fishing
सूख्‍ाा तालाब - फोटो : demo pic
ललितपुर। सूखे की मार से केवल पानी का संकट ही नहीं गहराया है, बल्कि पानी आधारित व्यवसाय भी लड़खड़ा गए हैं। ग्राम सभा के तालाब सूखने से मत्स्य पालन को भारी नुकसान हुआ है, जिसका नतीजा यह हुआ कि विभाग लक्ष्य के इर्द-गिर्द भी नहीं पहुंच सका है। ऐसे में मत्स्य पालक सूखा राहत के लिए शासन की ओर निहार रहे हैं।
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बुंदेलखंड में तालाब लोगों के लिए जीवनदायी हैं। तालाबों से जहां किसान सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं, वहीं मत्स्य पालकों के लिए रोजगार का जरिया भी बने हुए हैं। इस साल जिले में औसत से कम बारिश हुई है, जिससे तालाब बरसात के पानी से लबालब नहीं हो सके थे। इसके बाद भी जनपद के 115 में से 91 तालाबों में मत्स्य पालन कराया गया। मत्स्य विभाग ने बरसात के सीजन में 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन का लक्ष्य रखा था। इसे ध्यान में रखकर पट्टेधारकों व निजी तालाबों को करीब दो करोड़ रुपये के मत्स्य बीज का वितरण किया गया। माताटीला परिक्षेत्र में 17.3 लाख रुपये का मत्स्य बीज बांटा गया। मत्स्य पालकों ने इस बीज को तालाबों में छोड़ दिया। जब तक बीज बड़ी मछली का रूप लेता, तब तक तालाबों में पानी कम हो गया। परिणाम यह हुआ कि मछली विकास नहीं कर सकी, जिससे विभाग लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष मछली का उत्पादन 38 से 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही रह गया। मत्स्य पालकों का कहना है कि मार्च माह में ही तालाबों की तस्वीर बदल गई थी। अधिकतर तालाबों में पानी पोखर की भांति सिमटा नजर आने लगा था। अप्रैल माह में दो-चार तालाबों को छोड़कर अधिकतर तालाबों में पानी सूख गया है। उधर, सहायक निदेशक मत्स्य विजय पाल का कहना है कि सूखे के कारण मत्स्य पालन प्रभावित हुआ है। वह सर्वे के अभाव में वास्तविक नुकसान की जानकारी नहीं दे सके।
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यहां भी हुआ था मत्स्य पालन
राजघाट बांध में मध्य प्रदेश का मत्स्य महासंघ, माताटीला बांध में मत्स्य विकास निगम, गोविंद सागर बांध में मत्स्य विकास निगम, जामनी बांध में मत्स्य विकास निगम, रोहणी बांध में मत्स्य विकास निगम, शहजाद बांध व सजनम बांध में मत्स्य जीवी सहकारी संघ, मानसरोवर झील तालबेहट में मत्स्य विभाग ने मछली पालन कराया है।

प्रभावितों को मिलेगी सूखा राहत
ग्राम सभा तालाबों के पट्टेधारक व निजी तालाबों के मत्स्य पालकों को सूखा राहत राशि प्रदान की जाएगी। मत्स्य विभाग ने जिले के 80 पालकों का चिह्नींकरण किया है। इन मत्स्य पालकों को 8,200 रुपये के हिसाब से सूखा राहत राशि दी जाएगी। विभागीय अफसरों ने इसकी मंजूरी के लिए कार्ययोजना शासन को भेजी है।


दो दर्जन सूख गए तालाब
तहसील ललितपुर व पाली अंतर्गत ग्राम सभा के तालाब सूख गए हैं। इनमें ग्राम गनगौरा, बम्होरीकलां, दावनी, लागौन, मड़वारी, जैरवारा, लागौन, सीरोनखुर्द, बुढ़वार, दावनी, कालापहाड़, किसलवांस, रसोई, जीरौन, कुमरौल, महोली, बिरधा, आलापुर, बरखेरा, टीला, पाली, बालाबेहट, देवगढ़ व ऊमरी के तालाब शामिल हैं। ग्राम रजवारा व दैलवारा के तालाब में मामूली ही पानी रह गया है। जो किसी भी दिन समाप्त हो सकता है। इस तरह दो दर्जन तालाबों का पानी सूख गया है।
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