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प्राचार्य लगाए अभद्रता के आरोप, छात्रों ने किया महाविद्यालय के बाहर प्रदर्शन
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ललितपुर। श्री दीपचंद चौधरी महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कालेज के बाहर गेट पर धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप था कि महाविद्यालय में प्रमाण पत्र बनवाने गए कुछ छात्र-छात्राओं से भाई- बहन होने का सबूूत मांगते हुए प्राचार्य ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने महाविद्यालय प्रशासन से वार्ता कर मामला शांत कराया।
बुधवार सुबह करीब दस बजे छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय में एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। महाविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। एसएसआई सियाराम वर्मा पुलिस बल के साथ महाविद्यालय पहुंचे और छात्रों से प्रदर्शन का कारण पूछते हुए उन्हें समझाने का प्रयास किया। छात्रों ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह अपनी बहनों के साथ प्रमाण पत्र लेने के लिए प्राचार्य के पास पहुंचे तो प्राचार्य ने उनसे भाई - बहन होने के सबूत मांगते हुए बदसलूकी की। छात्र प्राचार्य से माफी मांगने की मांग करने लगे। जानकारी मिलने पर पुलिस ने छात्रों को समझाते हुए प्राचार्य से बातचीत कर हस्तक्षेप किया और मामला शांत कराया।
मैंने छात्रों से कोई अभद्रता नहीं की। जो छात्र- छात्राएं हमारे पास अपने डाक्यूमेंट मांगने आए थे, हमने उनसे बात की। उन्होंने मुझसे स्वयं अभद्रता की और डाक्यूमेंट जमा करने की प्रक्रिया का शासनादेश मांग लिया। हमने अभद्रता का विरोध किया तो उन्होंने हंगामा किया। हमने प्रदर्शनकारी छात्रों से मांफी नहीं मांगी, बल्कि उन्हें समझाया है।
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- डॉ. जे एस तोमर, प्राचार्य
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बुधवार सुबह करीब दस बजे छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय में एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। महाविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। एसएसआई सियाराम वर्मा पुलिस बल के साथ महाविद्यालय पहुंचे और छात्रों से प्रदर्शन का कारण पूछते हुए उन्हें समझाने का प्रयास किया। छात्रों ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह अपनी बहनों के साथ प्रमाण पत्र लेने के लिए प्राचार्य के पास पहुंचे तो प्राचार्य ने उनसे भाई - बहन होने के सबूत मांगते हुए बदसलूकी की। छात्र प्राचार्य से माफी मांगने की मांग करने लगे। जानकारी मिलने पर पुलिस ने छात्रों को समझाते हुए प्राचार्य से बातचीत कर हस्तक्षेप किया और मामला शांत कराया।
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मैंने छात्रों से कोई अभद्रता नहीं की। जो छात्र- छात्राएं हमारे पास अपने डाक्यूमेंट मांगने आए थे, हमने उनसे बात की। उन्होंने मुझसे स्वयं अभद्रता की और डाक्यूमेंट जमा करने की प्रक्रिया का शासनादेश मांग लिया। हमने अभद्रता का विरोध किया तो उन्होंने हंगामा किया। हमने प्रदर्शनकारी छात्रों से मांफी नहीं मांगी, बल्कि उन्हें समझाया है।
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- डॉ. जे एस तोमर, प्राचार्य