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बच्चों का संकल्प, हर्बल रंगों से खेलेंगे होली

Thu, 25 Mar 2021 01:22 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 25 Mar 2021 01:22 AM IST
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student oath to use herbal color
प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा में एक दूसरे पर फूलों की पंखुड़ी उड़ाते बच्चे - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। रंगों के बगैर होली का त्योहार असंभव है, लेकिन केमिकल वाले रंगों के इस्तेमाल से स्वास्थ्य और सौंदर्य संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं। इससे बचने के लिए बच्चे केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग न करने का संकल्प ले रहे हैं। होली में खास तौर से प्रयोग किए जाने वाले गहरे रंग कई तरह के खतरनाक केमिकलयुक्त व ऑक्सीडाइड होते हैं। यह रंग स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं। केमिकल युक्त रंग त्वचा को खराब करने के साथ ही जलन, खुजली, सूजन जैसी समस्याओं के जरिए त्वचा की गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। इन केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल करने से आंखों की रोशनी भी जा सकती है। हवा में उड़ते हुए रंग सांस संबंधी समस्याएं दे सकते हैं। इसके प्रयोग से बचने के लिए बच्चे खतरनाक रंगों के प्रयोग न करने का खुद तो संकल्प ले ही रहे हैं, आसपास के लोगों को भी इसके प्रयोग से बचने को प्रेरित कर रहे हैं। बच्चों ने इस बारे में अपनी बात भी रखी।
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01- सबसे अच्छे हैं फूलों के रंग
हेमंत यादव का कहना है कि सबसे अच्छे फूलों के रंग हैं। इससे शरीर को भी कोई नुकसान नहीं होता है। टेसू (पलाश) के फूलों को रातभर पानी में भिगोकर बहुत ही सुन्दर नारंगी रंग बनाया जा सकता है। टेसू के फूलों के रंग को होली का पारंपरिक रंग माना जाता है। हरसिंगार के फूलों को पानी में भिंगोकर इससे तैयार रंग से होली का पर्व मनायेंगे। अपने मित्रों को भी जागरूक करेंगे।
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02- लौट रहे प्राकृतिक रंगों की ओर -
मुस्कान पटेल का कहना है कि वर्तमान समय में रासायनिक रंगों की सुलभता ने भले ही लोगों को प्रकृति से दूर कर दिया हो, लेकिन रासायनिक रंगों से होने वाले नुकसान और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण लोग दोबारा प्रकृति की ओर रुख करने लगे हैं। प्रकृति की अनुपम छटा को बिखेरने वाले रंग हमें प्रकृति के संरक्षण का संदेश देते रहे हैं।
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यह रखें सावधानियां-
अच्छी गुणवत्ता वाले रंगों का प्रयोग करें।
परमानेंट रंगों से दूर रहें क्योंकि इनमें डाई होती है।
पानी में घुलनशील रंगों का प्रयोग करें।
गोल्डन, हरा, सिल्वर रंगों का बहुत ज्यादा प्रयोग न करें।
सूखे रंगों में सिलिका के तत्व होते हैं जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इनका प्रयोग न करें।
फोटो 8,9,10
देहरे बाबा स्कूल ने बच्चों ने खेली फूलों की होली
ललितपुर। विकासखंड जखौरा अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा में बच्चों ने पुष्पों से होली खेली। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने फूूलों की पंखुड़ी एक दूसरे पर उड़ाकर होली मनाई। इस दौरान दिव्या कोरी, पूजा कुशवाहा, वृंदावन, भाषा कुशवाहा, मानसी राय, नीरज राय ने फूलों की होली का जमकर लुत्फ उठाया। इससे पहले प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी ने फूल और उनकी पंखुड़ी का इंतजाम किया और बच्चों को इन्हें उपलब्ध कराया। उन्होंने बताया कि फूलों की होली से कोई नुकसान नहीं होता है, जबकि केमिकल रंग त्वचा व कपड़े खराब करते हैं। इस मौके पर शिक्षिका बबीता तिवारी, मनीषा देवी, कल्पना, सन्ध्या प्रजापति मौजूद रही।
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