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राज्यमंत्री, सदर विधायक समेत चार दिग्गज तीन घंटे तक रहे न्यायिक हिरासत में

Fri, 25 Oct 2019 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Oct 2019 01:27 AM IST
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state minister, mla and 4 other were judicial custody for  3 hour
न्यायालय से बाहर निकलते राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ व सदर विधायक रामरतन कुशवाहा - फोटो : LALITPUR
राज्यमंत्री व विधायक तीन घंटे तक रहे न्यायिक हिरासत में
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ललितपुर। विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में दर्ज हुए मुकदमे में बृहस्पतिवार को श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ और सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। तीन घंटे तक हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत दे दी गई। इसी तरह पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक फेरनलाल अहिरवार को भी अलग-अलग मामलों में तीन घंटे से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा। बाद में उन्हें भी जमानत दे दी गई।
अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (एमएलए/एमपी) उमेश कुमार सिरोही की अदालत में चल रहे मामले में अपर शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया कि 15 फरवरी 2017 को तत्कालीन उपनिरीक्षक मुहम्म्द अफजल ने विधायक रामरतन कुशवाहा के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें कहा था कि छह फरवरी 2017 को रामरतन कुशवाहा ने सैकड़ों की संख्या में जुलूस निकालकर आचार संहिता का उल्लंघन किया। विधायक 17 अक्तूबर 2019 को कोर्ट में तलब हुए थे। इस पर 24 अक्तूबर की तिथि नियत कर दी गई थी। इस पर सदर विधायक रामरतन कुशवाहा बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े ग्यारह बजे कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया। जमानत अर्जी पर सुनवाई दोपहर बाद हुई। सुनवाई के बाद जमानत दे दी गई। जमानत मुचलका दाखिल करने पर उन्हें रिहा किया गया और साक्ष्य के लिए सात नवंबर को उपस्थित होने के आदेश दिए।
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दूसरे मामले में ढाई वर्ष पहले विधानसभा चुनाव के दौरान उड़नदस्ता मजिस्ट्रेट सुनील भारद्वाज ने महरौनी कोतवाली में तहरीर देकर भाजपा प्रत्याशी मनोहरलाल पंथ (राज्यमंत्री) व रामरतन कुशवाहा (सदर विधायक) के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन एवं भीड़ को प्रलोभन देने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें विवेचक द्वारा फाइनल रिपोर्ट लगी दी थी। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने श्रम एवं सेवायोजन मंत्री व विधायक को 21 अक्तूबर को तहत तलब किया था। दोनों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया, जहां से दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया। सुनवाई के बाद जमानत एवं मुचलका दाखिल करने का आदेश न्यायालय द्वारा दिया गया। इसके बाद न्यायालय ने दोनों को जमानत दे दी। अब न्यायालय ने सात नबंवर को उपस्थित होने के लिए आदेश दिए।
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तीसरे मामले में पूर्व विधायक फेरनलाल अहिरवार को चेक बाउंस के एक मामले को जमानत लेने के बाद भी नियत तारीख पर उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने वारंट जारी कर न्यायालय में तलब किया गया था। बृहस्पतिवार को पूर्व विधायक ने न्यायालय में उपस्थित होकर वारंट वापस कराया। उन्हें भी न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। न्यायालय द्वारा बयान लेकर साक्ष्य के लिए सात नवंबर की तारीख नियत कर दी।
इसी प्रकार पूर्व मंत्री पूरन सिंह बुंदेला पर वन अधिनियम के तहत लगभग 15 मुकदमों के मामले में न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर अपर सत्र न्यायाधीश ने 17 अक्तूबर को गैर जमानती वारंट जारी किए थे। बृहस्पतिवार को पूर्व मंत्री ने अपने साथियों हरी सिंह एवं पुष्पेंद्र सिंह के साथ न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। न्यायालय ने उन्हें अपनी अभिरक्षा में लेकर जमानत अर्जी पर सुनवाई की और मुचलका लेकर उन्हें रिहा कर दिया गया। सात नवंबर 2019 की तारीख नियत करके व्यक्तिगत रुप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए गए।

पूर्व सपा जिलाध्यक्ष व उनके परिवार पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला धारा 307 के तहत न्यायालय में अपने साथियों के साथ उपस्थित हुए। न्यायालय द्वारा आदेशित किया गया कि सात नबंवर 2019 के पूर्व उच्च न्यायालय के स्टे के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट (स्टे की स्थिति) से अवगत कराएं। इसके लिए सात नवंबर तिथि नियत की गई।
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