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भवन के व्यवसायिक उपयोग पर लगेगा स्टांप शुल्क
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Sep 2016 01:40 AM IST
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tax chori, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। शहर में ऐसे सैकड़ों भवन स्वामी हैं, जो अपने भवनों को निजी संस्थाओं व सरकारी संस्थाओं को किराए पर दिए हुए हैं, लेकिन अपनी किरायाशुदा संपत्ति को पंजीकृत नहीं कराया है और स्टांप शुल्क की चोरी करके लंबे समय से शासन को लाखों रुपये राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं। इस स्टांप शुल्क चोरी की वसूली के लिए शासन के सख्त निर्देशन पर सहायक आयुक्त स्टांप विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है।
शहर में स्थित समस्त निजी व सरकारी भवन जिन्हें किराए पर संचालित किया जा रहा है, इसका संपूर्ण ब्यौरा एकत्रित करने का काम शुरू हो गया है। आयुक्त स्टांप विभाग ने नगर पालिका व जिला पंचायत को पत्र भेजकर उनकी किरायाशुदा संपत्ति का संपूर्ण ब्यौरा तलब किया है। इस किरायाशुदा संपत्ति में किराए पर संचालित विभागों की समस्त दुकानें, भवन व अन्य ऐसी संपत्ति जो किराए पर संचालित हो रही है, उसका संपूर्ण ब्यौरा मांगा है। केवल सरकारी विभाग ही नहीं बल्कि अधिकारियों ने शहर के ऐसे समस्त निजी भवनों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है, जिन अपंजीकृत भवनों में अवैधानिक तरीके से स्कूल, बैंक, होटल, शादीघर, शो-रुम, निजी मार्केट आदि संचालित हो रहे हैं। इन भवन स्वामियों से स्टांप शुल्क वसूलकर उनका पंजीकरण कराया जाएगा।
इससे शासन को राजस्व की प्राप्ति होगी और साथ ही व्यवसाय से जुड़ी अधिक से अधिक जानकारी का ब्यौरा शासन के पास एकत्रित हो सकेगा। जनपद के इक्का-दुक्का बैंकों को छोड़कर समस्त बैंक निजी भवनों में ही संचालित हो रही है, यह भवन रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत नहीं हैं। वहीं, अनेकों निजी स्कूल हैं जो किराए के बड़े-बड़े भवनों में किराए पर संचालित हो रहे हैं, इसी तरह अनेकों अपंजीकृत भवन हैं, जिनमें होटल, कोचिंग, क्लीनिक व नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इससे शासन को लाखों रुपये राजस्व की क्षति पहुंच रही है।
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नगर पालिका को भेजा पत्र
शहर में नगर पालिका की करीब साढ़े सात सौ दुकानें हैं, इनमें से करीब सात सौ दुकानें किराए पर संचालित की जा रही है। इनमें से लगभग 70 दुकानें ही रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत हैं, बाकि अन्य दुकानें बिना पंजीकरण के ही संचालित की जा रही है। नगर पालिका की दुकानों का आवंटन अब तक विभाग व दुकान किराएदार के बीच हुए अनुबंध के आधार किया जाता रहा था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नगर पालिका को दुकानों को रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत कराना होगा और किराए पर संचालित की जाने वाली संपूर्ण संपत्ति का ब्यौरा सहायक आयुक्त स्टांप कार्यालय में देना होगा, जिससे स्टांप शुल्क वसूलकर विभाग में उसको पंजीकृत किया जा सके।
सहायक आयुक्त स्टांप अधिकारी पीएस गुप्ता ने नगर पालिका को पत्र जारी करके विभाग की किरायाशुदा संपत्ति की जानकारी मांगी है, जो किराए पर संचालित की जा रही है। इसमें मुख्य तौर पर नगर पालिका की संपूर्ण दुकानों का ब्यौरा मांगा गया है, जो किराए पर संचालित की गई है। शहर में नगर पालिका की करीब 746 शहर के विभिन्न स्थानों पर निर्मित हैं, इनमें से करीब सात सौ दुकानों आवंटित हो चुकी है और जिनका किराए पर संचालन किया जा रहा है। दुकान आवंटन के दौरान नगर पालिका व किराएदार के बीच अनुबंध के अनुसार दुकानें आवंटित करने की प्रक्रिया चली आ रही है। अनुबंध के दौरान नगर पालिका किराएदार से स्टांप शुल्क को वसूल लेता था, लेकिन दुकानों को रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत नहीं कराया गया है।
केवल नझाई बाजार में स्थित डा. भीमराव अंबेडकर कांपलेक्स में निर्मित 76 दुकानें ही ऐसी है, जिनको पंजीकृत कराया गया है। सहायक आयुक्त स्टांप अधिकारी ने नगर पालिका से किराए पर संचालित समस्त दुकानों की सूची, आवंटन की तिथि, किरायानामा की तिथि, किराया शुल्क, प्रीमियम राशि व पगड़ी राशि का ब्यौरा आदि जानकारी मांगी है। इसी ब्यौरा के आधार पर स्टांप शुल्क का अवलोकन होगा और दुकानों को पंजीकृत कराया जाएगा। वहीं, नगर पालिका की लापरवाही का खामियाजा किराएदारों को शमन शुल्क आदा करना पड़ेगा। इससे शासन को स्टांप शुल्क पर राजस्व की प्राप्ति होगी और विभाग की संपत्ति व उसके किराएदार का रिकार्ड भी शासन के पास होगा। दुकान जिस किराएदार के नाम पर पंजीकृत है कानूनी तौर पर वहीं उसका वास्तविक किराएदार माना जाएगा।
दुकानों की खरीद फरोख्त पर लगेगा अंकुश
नगर पालिका की किराए पर संचालित दुकानों का पंजीकरण होने से दुकानों की खरीद-फरोख्त पर अंकुश लग सकेगा। नपा ने दुकानों का निर्माण इस सोच से किया था कि दुकानों से संचालन से विभाग को आय की बढ़ोतरी हो सके और स्थानीय व्यापारी इन दुकानों में व्यापार कर सकें। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लोगों ने इन दुकानों का व्यापार करना ही शुरू कर दिया है। कई किराएदार दुकानों में सिकमी किराएदार रखे हुए हैं तो कईयों ने तो कई गुने दामों पर दुकानों को गुपचुप तरीके से बेच दिया है। बाद में इन किराएदार का नाम परिवर्तन कर दिया जाता है। दुकानों का पंजीकरण होने के बाद दुकान व किराएदार का ब्यौरा रजिस्ट्रार विभाग में दर्ज होगा, इससे अवैध करोबार पर अंकुश लग सकेगा और जब यह दुकानें दोबार नीलाम की जाएगीं तो राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
समस्त सरकारी व निजी भवनों की जानकारी जुटाई जा रही है, जो किराए पर संचालित ही जा रही है। इनमें आम तौर पर देखा गया है कि किरायाशुदा संपत्ति को पंजीकृत नहीं कराकर स्टांप शुल्क की चोरी की जाती है, जिससे राजस्व की क्षति पहुंचती है। शासन ने निर्देशन पर विभाग संपूर्ण जानकारी व ब्यौरा जुटा रहा है, संबंधित कुछ विभागों को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं।
- प्रकाश चंद्र गुप्ता
सहायक आयुक्त स्टांप अधिकारी, ललितपुर
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शहर में स्थित समस्त निजी व सरकारी भवन जिन्हें किराए पर संचालित किया जा रहा है, इसका संपूर्ण ब्यौरा एकत्रित करने का काम शुरू हो गया है। आयुक्त स्टांप विभाग ने नगर पालिका व जिला पंचायत को पत्र भेजकर उनकी किरायाशुदा संपत्ति का संपूर्ण ब्यौरा तलब किया है। इस किरायाशुदा संपत्ति में किराए पर संचालित विभागों की समस्त दुकानें, भवन व अन्य ऐसी संपत्ति जो किराए पर संचालित हो रही है, उसका संपूर्ण ब्यौरा मांगा है। केवल सरकारी विभाग ही नहीं बल्कि अधिकारियों ने शहर के ऐसे समस्त निजी भवनों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है, जिन अपंजीकृत भवनों में अवैधानिक तरीके से स्कूल, बैंक, होटल, शादीघर, शो-रुम, निजी मार्केट आदि संचालित हो रहे हैं। इन भवन स्वामियों से स्टांप शुल्क वसूलकर उनका पंजीकरण कराया जाएगा।
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इससे शासन को राजस्व की प्राप्ति होगी और साथ ही व्यवसाय से जुड़ी अधिक से अधिक जानकारी का ब्यौरा शासन के पास एकत्रित हो सकेगा। जनपद के इक्का-दुक्का बैंकों को छोड़कर समस्त बैंक निजी भवनों में ही संचालित हो रही है, यह भवन रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत नहीं हैं। वहीं, अनेकों निजी स्कूल हैं जो किराए के बड़े-बड़े भवनों में किराए पर संचालित हो रहे हैं, इसी तरह अनेकों अपंजीकृत भवन हैं, जिनमें होटल, कोचिंग, क्लीनिक व नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इससे शासन को लाखों रुपये राजस्व की क्षति पहुंच रही है।
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नगर पालिका को भेजा पत्र
शहर में नगर पालिका की करीब साढ़े सात सौ दुकानें हैं, इनमें से करीब सात सौ दुकानें किराए पर संचालित की जा रही है। इनमें से लगभग 70 दुकानें ही रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत हैं, बाकि अन्य दुकानें बिना पंजीकरण के ही संचालित की जा रही है। नगर पालिका की दुकानों का आवंटन अब तक विभाग व दुकान किराएदार के बीच हुए अनुबंध के आधार किया जाता रहा था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नगर पालिका को दुकानों को रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत कराना होगा और किराए पर संचालित की जाने वाली संपूर्ण संपत्ति का ब्यौरा सहायक आयुक्त स्टांप कार्यालय में देना होगा, जिससे स्टांप शुल्क वसूलकर विभाग में उसको पंजीकृत किया जा सके।
सहायक आयुक्त स्टांप अधिकारी पीएस गुप्ता ने नगर पालिका को पत्र जारी करके विभाग की किरायाशुदा संपत्ति की जानकारी मांगी है, जो किराए पर संचालित की जा रही है। इसमें मुख्य तौर पर नगर पालिका की संपूर्ण दुकानों का ब्यौरा मांगा गया है, जो किराए पर संचालित की गई है। शहर में नगर पालिका की करीब 746 शहर के विभिन्न स्थानों पर निर्मित हैं, इनमें से करीब सात सौ दुकानों आवंटित हो चुकी है और जिनका किराए पर संचालन किया जा रहा है। दुकान आवंटन के दौरान नगर पालिका व किराएदार के बीच अनुबंध के अनुसार दुकानें आवंटित करने की प्रक्रिया चली आ रही है। अनुबंध के दौरान नगर पालिका किराएदार से स्टांप शुल्क को वसूल लेता था, लेकिन दुकानों को रजिस्ट्रार विभाग में पंजीकृत नहीं कराया गया है।
केवल नझाई बाजार में स्थित डा. भीमराव अंबेडकर कांपलेक्स में निर्मित 76 दुकानें ही ऐसी है, जिनको पंजीकृत कराया गया है। सहायक आयुक्त स्टांप अधिकारी ने नगर पालिका से किराए पर संचालित समस्त दुकानों की सूची, आवंटन की तिथि, किरायानामा की तिथि, किराया शुल्क, प्रीमियम राशि व पगड़ी राशि का ब्यौरा आदि जानकारी मांगी है। इसी ब्यौरा के आधार पर स्टांप शुल्क का अवलोकन होगा और दुकानों को पंजीकृत कराया जाएगा। वहीं, नगर पालिका की लापरवाही का खामियाजा किराएदारों को शमन शुल्क आदा करना पड़ेगा। इससे शासन को स्टांप शुल्क पर राजस्व की प्राप्ति होगी और विभाग की संपत्ति व उसके किराएदार का रिकार्ड भी शासन के पास होगा। दुकान जिस किराएदार के नाम पर पंजीकृत है कानूनी तौर पर वहीं उसका वास्तविक किराएदार माना जाएगा।
दुकानों की खरीद फरोख्त पर लगेगा अंकुश
नगर पालिका की किराए पर संचालित दुकानों का पंजीकरण होने से दुकानों की खरीद-फरोख्त पर अंकुश लग सकेगा। नपा ने दुकानों का निर्माण इस सोच से किया था कि दुकानों से संचालन से विभाग को आय की बढ़ोतरी हो सके और स्थानीय व्यापारी इन दुकानों में व्यापार कर सकें। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लोगों ने इन दुकानों का व्यापार करना ही शुरू कर दिया है। कई किराएदार दुकानों में सिकमी किराएदार रखे हुए हैं तो कईयों ने तो कई गुने दामों पर दुकानों को गुपचुप तरीके से बेच दिया है। बाद में इन किराएदार का नाम परिवर्तन कर दिया जाता है। दुकानों का पंजीकरण होने के बाद दुकान व किराएदार का ब्यौरा रजिस्ट्रार विभाग में दर्ज होगा, इससे अवैध करोबार पर अंकुश लग सकेगा और जब यह दुकानें दोबार नीलाम की जाएगीं तो राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
समस्त सरकारी व निजी भवनों की जानकारी जुटाई जा रही है, जो किराए पर संचालित ही जा रही है। इनमें आम तौर पर देखा गया है कि किरायाशुदा संपत्ति को पंजीकृत नहीं कराकर स्टांप शुल्क की चोरी की जाती है, जिससे राजस्व की क्षति पहुंचती है। शासन ने निर्देशन पर विभाग संपूर्ण जानकारी व ब्यौरा जुटा रहा है, संबंधित कुछ विभागों को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं।
- प्रकाश चंद्र गुप्ता
सहायक आयुक्त स्टांप अधिकारी, ललितपुर