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लाड़ले सोनू को अपने बीच देख घर और गांव में जश्न

Mon, 07 Dec 2020 12:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 07 Dec 2020 12:54 AM IST
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sonu singh pakistani prisoner return home
घर में सोनू के साथ मौजूद परिजन व ग्रामीण - फोटो : LALITPUR
ललितपुर/मड़ावरा। तेरह वर्षों तक पाकिस्तान की जेल में रहे सोनू को अपने गांव सतवांसा में देख ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना न रहा। रविवार सुबह ही गांव की महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश रखकर सोनू की अगुवाई की, वहीं ग्रामीणों ने आतिशबाजी कर ढोल नगाड़े बजाकर उसका स्वागत किया। सोनू से मिलने के लिए आसपास के कुछ गांव के लोग और रिश्तेदारों का तांता लगा रहा। उसकी घर वापसी पर परिजनों ने गृह विभाग के अफसरों और अमर उजाला का आभार व्यक्त किया।
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बेटे के वापसी की आस छोड़ चुके सोनू के पिता रोशन सिंह ने बताया कि 13 वर्ष पूर्व जब सोनू घर से गया था तो उसकी काफी खोजबीन की गई लेकिन कुछ पता नहीं चला। 10 वर्ष तक इंतजार किया और रिश्तेदारों- नातेदारों से लेकर दूर-दराज के परिचितों तक खोजबीन की गई लेकिन सोनू का पता नहीं चला। उन्होंने बेटे के लौटने की आस छोड़ दी थी। उन्हें यह भी पता नहीं था कि उनका बेटा पाकिस्तान की जेल में है।
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सोनू को गांव में देख उनकी आंखों से खुशी से आंसू छलक रहे थे। रोशन सिंह ने कहा कि समाचार पत्र का बहुत- बहुत आभारी हूूं जिसके जरिए मुझे बीते 26 अक्तूबर को बेटे के जीवित होने और पाकिस्तान से अमृतसर पहुंचने की जानकारी हुई। उसे वापस लाने के लिए हर कदम पर साथ दिया। तभी सोनू का अपने घर और गांव आना संभव हुआ। उन्होंने विशेष सहयोग करने वाले दोनों गृह सचिव भगवान स्वरूप श्रीवासतव और तरुण गाबा का भी विशेष रूप से धन्यवाद अदा किया जिन्होंने सारी बाधाएं दूर कर सोनू की घर वापसी कराई। इससे पहले शनिवार की शाम को ललितपुर रेलवे स्टेशन पर भी झेलम एक्सप्रेस से उतरे सोनू के परिजनों समेत तमाम सामाजिक संगठनों, राजनेताओं ने गर्मजोशी के साथ उसका स्वागत किया।
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बचपन के दोस्तों ने सोनू को लगाया गले, देखते ही रो पड़ा
मड़ावरा। सोनू के रविवार की सुबह घर पहुंचते ही उसके आने की राह तक रहे उसके बचपन के दोस्तों ने भी उसे हाथोंहाथ लिया। सोनू ने भी उन्हें गले से लगा लिया। पहले तो सोनू अपने घर और आसपास के मकानों को निहारता रहा। कुछ देर बाद उसने अपने साथियों को देखा तो उन्हें देखकर रो पड़ा।

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हम दोनों साइकिल से सैदपुर पढ़ने जाते थे और वह पढ़ने में तेज था। साथ ही उसकी राइटिंग भी काफी सुंदर थी।
देवेंद्र सिंह, बचपन का सहपाठी
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सोनू को क्रिकेट से काफी लगाव था। वह उनके गांव की टीम का तेज गेंदबाज था जिसकी बदौलत कई मैच जीते गए थे।
देहर सिंह, बचपन का सहपाठी
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सोनू के स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया है। वह पहले की ही तरह गंभीर है। उसे सिर्फ भविष्य की चिंता है। सरकार से मदद की गुजारिश है।
रोहित सिंह, बचपन के सहपाठी और चचेरे भाई।

सोनू के घर आगमन पर नृत्य करतीं बच्ची

सोनू के घर आगमन पर नृत्य करतीं बच्ची- फोटो : LALITPUR

सोनू के स्वागत को सिर पर कलश रखकर खड़ी युवती

सोनू के स्वागत को सिर पर कलश रखकर खड़ी युवती- फोटो : LALITPUR

परिजनों से गले मिलता सोनू सिंह

परिजनों से गले मिलता सोनू सिंह- फोटो : LALITPUR

13 वर्ष बाद गांव लौटे सोनूसिंह का ढोल बाजों के साथ स्वागत करते ग्रामीण

13 वर्ष बाद गांव लौटे सोनूसिंह का ढोल बाजों के साथ स्वागत करते ग्रामीण- फोटो : LALITPUR

परिजनों के बीच मौजूद सोनू सिंह

परिजनों के बीच मौजूद सोनू सिंह- फोटो : LALITPUR

बुजुर्गों के साथ मौजूद पाकिस्तान से लौटा सोनू

बुजुर्गों के साथ मौजूद पाकिस्तान से लौटा सोनू- फोटो : LALITPUR

सोनू सिंह का स्वागत करते दोस्त

सोनू सिंह का स्वागत करते दोस्त- फोटो : LALITPUR

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