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Lalitpur News: कोई 25 किमी पैदल चला, तो किसी ने बाइक के दिए 500 रुपये
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में गंगा स्नान के बाद बृहस्पतिवार देर रात और शुक्रवार सुबह हजारों श्रद्धालु लौट आए। श्रद्धालुओं ने गंगा व संगम घाटों तक 25 से 30 किलोमीटर तक पैदल चलकर देर शाम तक स्नान किया। फिर उन्हें ट्रेन, बस व अन्य साधनों से लौटने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन, कुंभ स्नान कर लौटे श्रद्धालुओं ने अपार प्रसन्नता भी जाहिर की।
श्रद्धालुओं की कई ट्रेनें, बसें और चार पहिया वाहन लौट आए हैं, जबकि अब भी बहुत से श्रद्धालु वापस आ रहे हैं। श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा का वृतांत सुनाते हुए कहा, यह कुंभ वाकई अलग था। हादसा भी बड़ा हुआ, उन्हें परेशान भी होना पड़ा, लेकिन गंगा या संगम घाटों पर स्नान का अलग ही अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि स्नान के लिए गंगा घाटों तक 25 से 30 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। कहीं 300 से 500 रुपये तक देकर बाइक से कई किलोमीटर जाना पड़ा, तो घाटों से कुछ किलोमीटर पहले तक पैदल ही जाना पड़ा। फिर मौनी अमावस्या पर गंगा जी या संगम में स्नान किया। करोड़ों की भीड़ में थोड़ी-बहुत परेशानी हुई, लेकिन स्नान के बाद उन्हें अपार प्रसन्नता हुई।
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कुंभ जाते समय कर्बी चित्रकूट से ही जाम लगना शुरू हो गया था। किसी प्रकार बस आगे बढ़ी तो प्रयागराज से पचास किलोमीटर पहले बस रोक दी गई। वहां से कुछ किमी पैदल चले, फिर बाइक वालों ने पांच-पांच सौ प्रति सवारी ली और संगम से 22 किमी पहले छोड़ दिया। फिर पैदल चलने के बाद दूसरी बाइक की। उसने दो सौ रुपये लेकर चार किमी छोड़ा। इसके बाद पैदल चलकर शाम साढ़े पांच बजे अरिर घाट पर स्नान किया। बाद में बस 22 किमी पहले तक आ गई, तो बस में रुकी हुई सवारियां भी स्नान के लिए पहुंचीं। लौटते समय बस मामा-भांजा चौराहा पर मिल गई।-सुरेंद्र सिंह बुंदेला, सिद्धन रोड।
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गांव व परिवार के 30 लोग कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन से गए थे। सूबेदारगंज से 17 किमी तक पैदल चलकर मौनी अमावस्या पर शाम को गंगा घाट पर स्नान किया। भीड़ अधिक होने से कुछ परेशानी हुई, लेकिन घाट पर पहुंचकर स्नान आसानी से हो गया। यह पहला कुंभ स्नान था, जो यादगार रहेगा। भगदड़ की जानकारी होने पर कुछ चिंतित जरूर हो गए थे, लेकिन बाद में व्यवस्थाएं ठीक कर दी गईं।-अरविंद भास्कर, ग्राम मकरीपुर, नाराहट।
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महाकुंभ में भीड़ बहुत थी, जिससे 17-18 किमी पैदल चलना पड़ा। लग रहा था कि स्नान होंगे कि नहीं, लेकिन जब घाट पर पहुंची तो कुंभ का मतलब समझ में आया। गंगाजी में स्नान के बाद लौटते समय लंगर में भोजन भी किया। फिर लौटने के लिए पहले कानपुर गई। वहां से परिवार के साथ साबरमती एक्सप्रेस से वापस ललितपुर आ गई। काफी अच्छा अनुभव रहा।-प्रेमरानी, मकरीपुर।
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महाकुंभ जाने पर कई किमी पैदल चलकर शाम को घाटों पर परिवार के साथ पहुंची। स्नान करके अलग ही आनंद आया। लौटते समय भी ट्रेनों में भारी भीड़ थी, जिससे घंटों खड़े होकर आना पड़ा। ट्रेन में बैठने की कोई जगह नहीं थी। ललितपुर आकर ही स्टेशन पर बैठने को मिला, लेकिन स्नान कर लिया, तो सारी परेशानी भूल गई।-रामसखी, नेहरूनगर।
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महाकुंभ में स्नान के लिए 27 जनवरी को ही कुंभ स्पेशल ट्रेन से प्रयागराज साथियों के साथ गया था। नैनी स्टेशन पर ट्रेन रुकने पर वहीं उतर गए और फिर वहां से पैदल ही चल दिए। 28 जनवरी को तो यमुनाजी में ही स्नान किए, बाद में दूसरे दिन मौनी अमावस्या पर गंगा घाट पर स्नान किया। संगम में स्नान नहीं कर पाया। अब कुंभ स्पेशल ट्रेन से ही लौटा हूं।-यशवंत सिंह परमार, ग्राम सेरवांसकलां।
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प्रयागराज स्टेशन से पहले ही उतर गया था और वहां कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करके गंगा घाट पर भीड़ के बीच से पहुंचे, तो स्नान किया। दिनभर भीड़ में पैदल चलकर स्टेशन पर लौटा तो बृहस्पतिवार शाम को ट्रेन मिलने पर अब आए हैं। कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन से काफी राहत मिली है।
-जंडैल सिंह, सेरवांसकलां।
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ललितपुर। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में गंगा स्नान के बाद बृहस्पतिवार देर रात और शुक्रवार सुबह हजारों श्रद्धालु लौट आए। श्रद्धालुओं ने गंगा व संगम घाटों तक 25 से 30 किलोमीटर तक पैदल चलकर देर शाम तक स्नान किया। फिर उन्हें ट्रेन, बस व अन्य साधनों से लौटने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन, कुंभ स्नान कर लौटे श्रद्धालुओं ने अपार प्रसन्नता भी जाहिर की।
श्रद्धालुओं की कई ट्रेनें, बसें और चार पहिया वाहन लौट आए हैं, जबकि अब भी बहुत से श्रद्धालु वापस आ रहे हैं। श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा का वृतांत सुनाते हुए कहा, यह कुंभ वाकई अलग था। हादसा भी बड़ा हुआ, उन्हें परेशान भी होना पड़ा, लेकिन गंगा या संगम घाटों पर स्नान का अलग ही अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि स्नान के लिए गंगा घाटों तक 25 से 30 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। कहीं 300 से 500 रुपये तक देकर बाइक से कई किलोमीटर जाना पड़ा, तो घाटों से कुछ किलोमीटर पहले तक पैदल ही जाना पड़ा। फिर मौनी अमावस्या पर गंगा जी या संगम में स्नान किया। करोड़ों की भीड़ में थोड़ी-बहुत परेशानी हुई, लेकिन स्नान के बाद उन्हें अपार प्रसन्नता हुई।
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कुंभ जाते समय कर्बी चित्रकूट से ही जाम लगना शुरू हो गया था। किसी प्रकार बस आगे बढ़ी तो प्रयागराज से पचास किलोमीटर पहले बस रोक दी गई। वहां से कुछ किमी पैदल चले, फिर बाइक वालों ने पांच-पांच सौ प्रति सवारी ली और संगम से 22 किमी पहले छोड़ दिया। फिर पैदल चलने के बाद दूसरी बाइक की। उसने दो सौ रुपये लेकर चार किमी छोड़ा। इसके बाद पैदल चलकर शाम साढ़े पांच बजे अरिर घाट पर स्नान किया। बाद में बस 22 किमी पहले तक आ गई, तो बस में रुकी हुई सवारियां भी स्नान के लिए पहुंचीं। लौटते समय बस मामा-भांजा चौराहा पर मिल गई।-सुरेंद्र सिंह बुंदेला, सिद्धन रोड।
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गांव व परिवार के 30 लोग कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन से गए थे। सूबेदारगंज से 17 किमी तक पैदल चलकर मौनी अमावस्या पर शाम को गंगा घाट पर स्नान किया। भीड़ अधिक होने से कुछ परेशानी हुई, लेकिन घाट पर पहुंचकर स्नान आसानी से हो गया। यह पहला कुंभ स्नान था, जो यादगार रहेगा। भगदड़ की जानकारी होने पर कुछ चिंतित जरूर हो गए थे, लेकिन बाद में व्यवस्थाएं ठीक कर दी गईं।-अरविंद भास्कर, ग्राम मकरीपुर, नाराहट।
महाकुंभ में भीड़ बहुत थी, जिससे 17-18 किमी पैदल चलना पड़ा। लग रहा था कि स्नान होंगे कि नहीं, लेकिन जब घाट पर पहुंची तो कुंभ का मतलब समझ में आया। गंगाजी में स्नान के बाद लौटते समय लंगर में भोजन भी किया। फिर लौटने के लिए पहले कानपुर गई। वहां से परिवार के साथ साबरमती एक्सप्रेस से वापस ललितपुर आ गई। काफी अच्छा अनुभव रहा।-प्रेमरानी, मकरीपुर।
महाकुंभ जाने पर कई किमी पैदल चलकर शाम को घाटों पर परिवार के साथ पहुंची। स्नान करके अलग ही आनंद आया। लौटते समय भी ट्रेनों में भारी भीड़ थी, जिससे घंटों खड़े होकर आना पड़ा। ट्रेन में बैठने की कोई जगह नहीं थी। ललितपुर आकर ही स्टेशन पर बैठने को मिला, लेकिन स्नान कर लिया, तो सारी परेशानी भूल गई।-रामसखी, नेहरूनगर।
महाकुंभ में स्नान के लिए 27 जनवरी को ही कुंभ स्पेशल ट्रेन से प्रयागराज साथियों के साथ गया था। नैनी स्टेशन पर ट्रेन रुकने पर वहीं उतर गए और फिर वहां से पैदल ही चल दिए। 28 जनवरी को तो यमुनाजी में ही स्नान किए, बाद में दूसरे दिन मौनी अमावस्या पर गंगा घाट पर स्नान किया। संगम में स्नान नहीं कर पाया। अब कुंभ स्पेशल ट्रेन से ही लौटा हूं।-यशवंत सिंह परमार, ग्राम सेरवांसकलां।
प्रयागराज स्टेशन से पहले ही उतर गया था और वहां कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करके गंगा घाट पर भीड़ के बीच से पहुंचे, तो स्नान किया। दिनभर भीड़ में पैदल चलकर स्टेशन पर लौटा तो बृहस्पतिवार शाम को ट्रेन मिलने पर अब आए हैं। कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन से काफी राहत मिली है।
-जंडैल सिंह, सेरवांसकलां।