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Lalitpur News: किसी आवास में छत तो कहीं दरवाजा और फर्श नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
बार। ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत बरौदा डांग में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकान आज भी अधूरे पड़े हैं। किसी की छत नहीं बनी तो कहीं खिड़की, दरवाजे तक नहीं लग सके। अधिकांश लाभार्थियों को काम न मिलने से वे गांव से पलायन कर गए।
ब्लॉक मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर छह हजार की मतदाता वाली इस ग्राम पंचायत में आदिवासी समुदाय की अच्छी संख्या है। इन आदिवासियों को सरकारी योजनाओं का ढंग से लाभ नहीं मिल सका है। ग्राम पंचायत ने कुछ आदिवासियों को प्रधानमंत्री आवास तो दिए, लेकिन अधिकांश आवास अधूरे पड़े हैं। निर्माण की गुणवत्ता तो खराब है ही, तीन साल बीतने के बावजूद अब तक कई आवास पूर्ण नहीं हो सके हैं। कई में फर्श तक नहीं बनी है। यही वजह है कि अधिकांश लाभार्थी गांव से पलायन कर गए हैं।
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काम न मिलने से आदिवासी कर गए पलायन, घर में लटके ताले
मनरेगा में काम न मिलने के कारण आदिवासियों के अधिकांश घरों में ताले लगे हैं। लोग रोजगार की तलाश में महानगरों की तरफ पलायन कर गए हैं। कुछ लोग जो गांव में रह रहे हैं, वे बताते हैं कि उनके पास खेती-बाड़ी न होने के कारण अब अगर मनरेगा में भी बराबर काम न मिले तो घर परिवार चलाने के लिए शहरों में ही जाना मजबूरी है।
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-- -- -- -- -- -- वर्जन
वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 53 प्रधानमंत्री आवास आए थे, जो कि पूर्ण हो चुके हैं। गांव में वे आवास अपूर्ण हैं, जो पिछले कार्यकाल में बनवाए गए थे। मनरेगा में मजदूरी करने के लिए सहरिया बस्ती के लोगों को मनाने जाते हैं, लेकिन वे कार्य करने शहर चले जाते हैं।-
ग्राम प्रधान- सरजू बाई
-- -- -- -- -- -- बरौदा डांग में प्रधानमंत्री आवास अपूर्ण होने की कोई शिकायत नहीं मिली है। गांव के जो लोग पलायन कर गए हैं, उन्हें यहां मिलने वाली मजदूरी से अधिक रुपये मिल गए होंगे। यह स्थिति हर जगह की है।-आलोक कुमार, खंड विकास अधिकारी ब्लॉक बार
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बार। ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत बरौदा डांग में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकान आज भी अधूरे पड़े हैं। किसी की छत नहीं बनी तो कहीं खिड़की, दरवाजे तक नहीं लग सके। अधिकांश लाभार्थियों को काम न मिलने से वे गांव से पलायन कर गए।
ब्लॉक मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर छह हजार की मतदाता वाली इस ग्राम पंचायत में आदिवासी समुदाय की अच्छी संख्या है। इन आदिवासियों को सरकारी योजनाओं का ढंग से लाभ नहीं मिल सका है। ग्राम पंचायत ने कुछ आदिवासियों को प्रधानमंत्री आवास तो दिए, लेकिन अधिकांश आवास अधूरे पड़े हैं। निर्माण की गुणवत्ता तो खराब है ही, तीन साल बीतने के बावजूद अब तक कई आवास पूर्ण नहीं हो सके हैं। कई में फर्श तक नहीं बनी है। यही वजह है कि अधिकांश लाभार्थी गांव से पलायन कर गए हैं।
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काम न मिलने से आदिवासी कर गए पलायन, घर में लटके ताले
मनरेगा में काम न मिलने के कारण आदिवासियों के अधिकांश घरों में ताले लगे हैं। लोग रोजगार की तलाश में महानगरों की तरफ पलायन कर गए हैं। कुछ लोग जो गांव में रह रहे हैं, वे बताते हैं कि उनके पास खेती-बाड़ी न होने के कारण अब अगर मनरेगा में भी बराबर काम न मिले तो घर परिवार चलाने के लिए शहरों में ही जाना मजबूरी है।
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वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 53 प्रधानमंत्री आवास आए थे, जो कि पूर्ण हो चुके हैं। गांव में वे आवास अपूर्ण हैं, जो पिछले कार्यकाल में बनवाए गए थे। मनरेगा में मजदूरी करने के लिए सहरिया बस्ती के लोगों को मनाने जाते हैं, लेकिन वे कार्य करने शहर चले जाते हैं।-
ग्राम प्रधान- सरजू बाई