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शौचालय योजना के प्रति जागरूक नहीं शहरवासी

Tue, 16 Feb 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Tue, 16 Feb 2016 12:45 AM IST
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Shrwasi awareness toilet plan
ललितपुर। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सरकार शहरी क्षेत्र में खुले में शौच पर रोक लगाने का काम कर रही है। इसके तहत जिन घरों में शौचालय नहीं हैं, उनके आवेदन लेकर उन्हें अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
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लेकिन, शहरवासी इसके प्रति उदासीन बने हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ दो लोगों ने ही इसका लाभ उठाया है, जबकि शासन ने 21 लाभार्थियों के लिए पहली किस्त जारी कर दी है।
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भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वच्छ भारत मिशन योजना में सरकार की प्रमुखता है कि हर घर में शौचालय हो। इसके लिए प्रदेश सरकार के सहयोग से शौचालय विहीन घरों में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में शौचालय का निर्माण कराने के लिए आवेदकों की होड़ लगी है। अब तक नगर पालिका के पास चार हजार आनलाइन आवेदन आ चुके हैं।
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इसी क्रम में भारत सरकार ने 20 जनवरी के आसपास 21 शौचालय निर्माण कराने के लिए दो हजार रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से पहली किस्त जारी कर दी थी। लेकिन, करीब एक माह बीतने को है और अभी तक मात्र दो लाभार्थी की योजना के नियमानुसार किस्त की धनराशि प्राप्त कर पाए हैं।

यह है योजना का नियम
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में शौचालय विहीन घरों में शौचालय बनवाले के लिए सरकार आठ हजार रुपये की अनुदान राशि का सहयोग कर रही है। अनुदान राशि में भारत सरकार व प्रदेश सरकार दोनों का बराबर का योगदान है।

अनुदान राशि का लाभ लेने के लिए लाभार्थियों को पहले अपने रुपये खर्च करके शौचालय का कम से कम 25 प्रतिशत निर्माण कराना होगा। उसके बाद नगर पालिका के अधिकारी उक्त निर्माण का निरीक्षण करके फोटोग्राफी के साथ शासन को रिपोर्ट अपलोड करेंगे। इसके बाद लाभार्थी सरकार से मिलने वाली अनुदान राशि का लाभ ले सकेंगे।

जागरूकता का है अभाव
शौचालय निर्माण के लिए भले ही अब तक चार हजार आवेदन आनलाइन भरे जा जा चुके हों, लेकिन आवेदकों को योजना के बारे में जानकारी नहीं है। उनको सिर्फ इतना पता है कि शौचालय निर्माण के लिए सरकार आठ हजार रुपये दे रही है।

आवेदक इस योजना के प्रति कितना जागरूक हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि एक माह बीतने वाला है व शासन से स्वीकृत 21 लाभार्थियों में से सिर्फ दो लाभार्थियों ने नियमानुसार स्वयं की लागत से 25 प्रतिशत शौचालय का निर्माण कराया और अनुदान राशि प्राप्त की है।

दरअसल, आवेदन सरकार की अन्य योजनाओं की तरह ही इसे भी ले रहे हैं कि वह अनुदान राशि को आसानी से प्राप्त कर किसी अन्य कार्य में प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए आवेदक शौचालय निर्माण के लिए आनलाइन आवेदन तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें योजना की जानकारी नहीं होने के कारण वह सिर्फ आवेदन करने तक ही सीमित हैं।

सबसे ज्यादा आवेदन करने वाली महिलाएं
शौचालय निर्माण के लिए अब तक हो चुके चार हजार आवेदनों में से 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। जानकारी के अभाव में महिलाएं समझती हैं कि शौचालय के पात्रों की सूची में उन्हें वरीयता मिलेगी। जबकि, शासनादेश अथवा नियमावली में ऐसा कुछ नियम नहीं है, योजना का लाभ पूरे परिवार को पहुंचाना है।

योजना के प्रति आवेदकों की जागरूकता जांचने के लिए जब आवेदक महिला मुहल्ला पिसनारी निवासी सुखवती झां और मुहल्ला तालाबपुरा निवासी आंनद कुंवर यादव से बात की तो उन्होंने बताया कि महिलाओं को पहले लाभ मिलेगा।


इस योजना के तहत शासन ने वार्ड पार्षदों को अपने-अपने वार्डों का स्वच्छता दूत बनाया है। नगर पालिका पार्षदों के सहयोग से उनके क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाएगी, इसके लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है।
- राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
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