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श्रीमद्भागवत कथा मनोरंजन का साधन नहीं : कथा व्यास
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। श्रीधाम वृंदावन से आए कथा व्यास पंडित जयकिशन दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनोरंजन का साधन नहीं है। यह कल्प वृक्ष के समान है और साक्षात भगवान कृष्ण हैं। श्रीमद्भागवत कथा को पूरी श्रद्धा और नियम संयम के साथ कराना चाहिए। कथा श्रवण के साथ हमें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। वह मंगलवार को तालाबपुरा में डोंडा घाट पर स्थित बालाजी महाराज मंदिर पर श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा के प्रथम दिवस पर व्यास ने श्रद्धालुओं से कहा कि बहुत ही सौभाग्य से कथा कराने और श्रवण करने को मिलती है। श्रद्धाभाव से श्रवण करने पर विशेष फल मिलता है। उन्होंने नौजवानों की शिक्षा और संस्कार पर चर्चा करते हुए कहा कि आजकल के बच्चे अच्छी शिक्षा तो ग्रहण कर रहे हैं लेकिन संस्कारों की कमी होती जा रही है। जबकि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार भी बहुत जरूरी है। कथा में मुख्य यजमान दीपक पाठक, शिवम कृष्ण शास्त्री, पुजारी रामलखन नागाईच, राजेंद्र दीक्षित, रमेश श्रीवास्तव, कबीर सिंहा, राकेश रैकवार, राकेश सैनी, देवेंद्र पाठक, सुधीर श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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ललितपुर। श्रीधाम वृंदावन से आए कथा व्यास पंडित जयकिशन दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनोरंजन का साधन नहीं है। यह कल्प वृक्ष के समान है और साक्षात भगवान कृष्ण हैं। श्रीमद्भागवत कथा को पूरी श्रद्धा और नियम संयम के साथ कराना चाहिए। कथा श्रवण के साथ हमें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। वह मंगलवार को तालाबपुरा में डोंडा घाट पर स्थित बालाजी महाराज मंदिर पर श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा के प्रथम दिवस पर व्यास ने श्रद्धालुओं से कहा कि बहुत ही सौभाग्य से कथा कराने और श्रवण करने को मिलती है। श्रद्धाभाव से श्रवण करने पर विशेष फल मिलता है। उन्होंने नौजवानों की शिक्षा और संस्कार पर चर्चा करते हुए कहा कि आजकल के बच्चे अच्छी शिक्षा तो ग्रहण कर रहे हैं लेकिन संस्कारों की कमी होती जा रही है। जबकि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार भी बहुत जरूरी है। कथा में मुख्य यजमान दीपक पाठक, शिवम कृष्ण शास्त्री, पुजारी रामलखन नागाईच, राजेंद्र दीक्षित, रमेश श्रीवास्तव, कबीर सिंहा, राकेश रैकवार, राकेश सैनी, देवेंद्र पाठक, सुधीर श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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