फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Sharda of Talbehat, along with her water friends, had built a dam with gunny bags on the Barua River.

Lalitpur News: तालबेहट की शारदा ने जल सहेलियाें संग मिलकर बरुआ नदी पर बोरियों से बनाया था बांध

Mon, 30 Sep 2024 02:53 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 30 Sep 2024 02:53 AM IST
विज्ञापन
Sharda of Talbehat, along with her water friends, had built a dam with gunny bags on the Barua River.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

ललितपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में बुंदेलखंड में पानी की समस्या का उल्लेख किया। साथ ही बुंदेलखंड में जल संरक्षण के लिए महिलाओं के नदी पर बोरियों के बांध बनाने का उल्लेख किया। जिले के तालबेहट क्षेत्र के विजयपुरा निवासी शारदा देवी ने गांव की महिलाओं को साथ जोड़कर पांच हजार प्लास्टिक की बोरियों से बरुआ नदी पर बांध बनाया था। इससे गांव सहित आसपास के लोगों की पानी की समस्या को दूर किया था।
ललितपुर के ब्लॉक तालबेहट के अंतर्गत ग्राम विजयपुरा निवासी शारदा देवी वंशकार का विवाह 1999 में हुआ था। गांव में जब पानी का संकट हुआ तो शारदा ने घर से बाहर जाकर जल संरक्षण के लिए काम करने का प्रयास किया। उस समय घर के लोगों से सहयोग नहीं मिला। जल संरक्षण पर काम करने वाली परमार्थ संस्था ने गांव में जल संरक्षण का काम शुरू किया तो शारदा ने अपने परिवार को इसके लिए मना लिया। शारदा देवी ने गांव में जल सहेली के रूप में काम की शुरुआत की।
विज्ञापन

उन्होंने गांव की 30-40 महिलाओं को अपने साथ लेकर पानी पंचायत बनाई। वर्ष 2021 में खेतों में खड़ी फसल के लिए पानी की समस्या पैदा हुई। ऐसे में शारदा ने अपनी साथी महिलाओं के साथ मिलकर गांव से होकर गुजरी बरुआ नदी पर मौरंग से भरी बोरियों का एक बांध बनाया। इस बांध को बनाने में उन्हें 8 दिन लगे। जल संरक्षण कर शारदा देवी गांव ही नहीं जनपद की महिलाओं के लिए भी एक मिसाल बन गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

लोगों ने टोका, लेकिन नहीं भटकी लक्ष्य से
शारदा वंशकार ने जल संरक्षण का काम शुरू किया तो लोगों ने टोकना शुरू कर दिया, ताने मारे कि गांव की बहू गांव से बाहर कहां और क्यों जाती है। ताने जब असहनीय हो गए तो शारदा ने महिलाओं के साथ मिलकर अपने संगठन पानी पंचायत को और अधिक मजबूत किया। गांव में ही जल संरक्षण से संबंधित बैठकों का आयोजन करने लगीं। इसका असर यह हुआ कि जो लोग बाहर जाने को लेकर सवाल उठाते थे, वह भी जल संरक्षण के कार्यक्रमों में साथ आ गए।
नदी यात्रा से बरुआ को दिया था नया जीवन
शारदा देवी व उसकी महिला साथियों के संघर्ष की कहानी बड़ी है। जहां उसने जल संरक्षण के लिए काम किया। वहीं बरुआ नदी के अस्तित्व को बचाने में भी भूमिका निभाई। जब बरुआ नदी देखरेख के अभाव में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई थी। जब शारदा देवी और उनकी महिला साथियों ने परमार्थ संस्थान के साथ नदी यात्रा निकाली और ग्राम पंचायत व ब्लॉक स्तर पर समन्वय स्थापित कर नदी को नया जीवन देने का काम शुरू कराया। जिसके तहत नदी पर चेकडैम बने, सिल्ट सफाई हुई। नदी के दोनों ओर पौधे लगाए। वर्तमान में इस नदी से एक हजार से अधिक किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है।
----------
राष्ट्रपति ने दिया सम्मान
जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए शारदा देवी ने अपनी महिला साथियों के साथ बरुआ नदी पर पांच हजार प्लास्टिक की बोरियों का बांध बनाया तो उसके इस काम की चर्चा देश के कोने-कोने में हुई। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए शारदा देवी को वर्ष 2023 में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में सम्मानित किया।

--------
जल संरक्षण को शारदा देवी ने अपनी जल सहेलियों के साथ मिलकर प्लास्टिक की बोरियों से नदी पर बांध बनाया था। इसको लेकर राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया था। वर्तमान में शारदा जल संरक्षण को लेकर काम करने में लगी है। - केके पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed