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कल होगा शांतिनाथ का जिनबिंब पंचकल्याणक
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अतिशय क्षेत्र क्षेत्रपाल बानपुर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते मुनि सुप्रभ सागर जी महाराज।
- फोटो : LALITPUR
बानपुर (ललितपुर)। आचार्य विशुद्धसागर महाराज के स्वर्णिम जन्म जयंती वर्ष 2020-21 के सुअवसर पर श्रमण सुप्रभ सागर और श्रमण प्रणत सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में 23 से 29 अप्रैल तक श्री 1008 शांतिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव विश्वशांति महायज्ञ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बानपुर में आयोजित किया जाएगा।
रविवार 21 मार्च को दोपहर में श्रमण सुप्रभ सागर और प्रणत सागर महाराज ससंघ सान्निध्य में उक्त पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए पात्रों का चयन किया जाएगा। इसमें महोत्सव के प्रमुख पात्रों भगवान के माता-पिता, सौधर्म इंद्र, महेंद्र इंद्र, कुबेर, यज्ञनायक, सामान्य इंद्र आदि का विधिवत रूप से चयन किया जाएगा। ससंघ द्वय का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है पंचकल्याणक
बानपुर के क्षेत्रपाल अतिशय क्षेत्र में विराजमान मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैन समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण महोत्सव है। यह आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है। पौराणिक पुरुषों के जीवन का संदेश घर-घर पहुंचाने के लिए इन महोत्सवों में पात्रों का अवलंबन लेकर सक्षम जीवन यात्रा को रेखांकित किया जाता है। पुण्यशाली व्यक्ति को ही पंचकल्याणक में पात्र बनने का सौभाग्य प्राप्त होता है, इसलिए पात्र चयन में अपने सौभाग्य को जगाएं।
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रविवार 21 मार्च को दोपहर में श्रमण सुप्रभ सागर और प्रणत सागर महाराज ससंघ सान्निध्य में उक्त पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए पात्रों का चयन किया जाएगा। इसमें महोत्सव के प्रमुख पात्रों भगवान के माता-पिता, सौधर्म इंद्र, महेंद्र इंद्र, कुबेर, यज्ञनायक, सामान्य इंद्र आदि का विधिवत रूप से चयन किया जाएगा। ससंघ द्वय का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है पंचकल्याणक
बानपुर के क्षेत्रपाल अतिशय क्षेत्र में विराजमान मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैन समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण महोत्सव है। यह आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है। पौराणिक पुरुषों के जीवन का संदेश घर-घर पहुंचाने के लिए इन महोत्सवों में पात्रों का अवलंबन लेकर सक्षम जीवन यात्रा को रेखांकित किया जाता है। पुण्यशाली व्यक्ति को ही पंचकल्याणक में पात्र बनने का सौभाग्य प्राप्त होता है, इसलिए पात्र चयन में अपने सौभाग्य को जगाएं।
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