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स्वकर निर्धारण सर्वे में हुई जमकर लापरवाही

Tue, 05 Jul 2016 01:22 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Tue, 05 Jul 2016 01:22 AM IST
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सेल्‍फ टेक्‍स - फोटो : amar ujala
ललितपुर। स्वकर निर्धारण प्रणाली का सर्वे पूरा हो गया है, सर्वे कार्य में निष्पक्षता व पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सर्वे का कार्य बाहरी कंपनी द्वारा कराया गया था। लेकिन हाल ही में नगर पालिका द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में कंपनी की सर्वे रिपोर्ट में काफी अनियमितताएं पाई गई हैं। नगर पालिका की आय बढ़ाने के लिए शासन ने ग्रहकर निर्धारण में स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू कर दी है। इस प्रणाली के तहत मकान की बनावट व स्थिति के आधार पर कर निर्धारण किया जाएगा। नगर पालिका क्षेत्र में स्वकर प्रणाली लागू करने के लिए नगर क्षेत्र के समस्त मकानों व खाली पढ़े प्लाटों का सर्वे व संपूर्ण जानकारी शासन द्वारा निर्धारित प्रारुप पर भरने का कार्य अलीगढ़ की निजी कंपनी जोनटेक लिमिटेड द्वारा कराया गया है। कंपनी ने सर्वे करके अपनी रिपोर्ट नगर पालिका को सौंप दी है। नगर पालिका कर अधीक्षक हेमंत सिंह और अभिषेक कुमार चौबे द्वारा सिविल लाइन क्षेत्र के वार्ड नंबर 08 और 12 में कंपनी द्वारा किए गए सर्वे सूची के आधार पर भौतिक सत्यापन किया, इस दौरान सर्वे के कार्य में काफी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। इस प्रणाली में कर निर्धारण के लिए मकान व प्लाट का क्षेत्र, क्षेत्रफल, सड़कों का मापदंड व चौड़ीकरण, पक्का भवन, कच्चा भवन, आलीशान भवन इन सब का ब्यौरा प्रारुप में भरा जाना था। लेकिन कंपनी द्वारा इन सब जानकारियों में गड़बड़ी की गई है, जिसका खुलासा भौतिक सत्यापन के दौरान हुआ है।
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नहीं हुआ कंपनी का भुगतान
नगर पालिका द्वारा स्वकर प्रणाली का सर्वे कराना का ठेका करीब 70 लाख रुपये में निजी कंपनी को दिया गया था। विगत माह कंपनी ने सर्वे का कार्य कर लिया गया है, वर्तमान में नगर पालिका के पुराने रिकोर्ड से नई सूची का मिलान किया जा रहा है।  गनिमत रही कि अभी तक कंपनी का कोई भुगतान नहीं किया गया है, इससे पहले ही अनियमितताएं सामने आ गई हैं। अगर यहीं कमियां व अनियमितताएं भुगतान के बाद सामने आती तो, फिर नगर पालिका लाखों रुपये खर्च होने के बाद हाथ मलते रह जाती।
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आय में होगी करोड़ों रुपये की बढ़ोत्तरी
वर्तमान में नगर पालिका क्षेत्र में करीब 26 हजार मकानों से लगभग 30 लाख रुपये की वार्षिक वसूली होती है। लेकिन स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू होने के बाद पालिका को करोड़ों रुपये का मुनाफा होगा। पालिका में दर्ज 26 हजार मकानों की संख्या 35 हजार के पार हो जाएगी। वर्तमान में गृहकर की पुरानी प्रणाली के आधार पर लगभग सभी मकानों पर न्यूनतम कर वसूला जा रहा है, लेकिन स्वकर प्रणाली में मकान की बनावट व स्थिति के आधार पर कर वसूला जाएगा। इससे नगर पालिका की आय में तीन से चार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की बढ़ोत्तरी हो जाएगी।
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व्यवसायिक भवनों का दर्शाया गया आवासीय
स्वकर प्रणाली के अंतर्गत आवासीय भवनों के सापेक्ष व्यवसायिक भवनों पर करीब पांच गुना कर वसूला जाएगा। इसलिए कई व्यवसायिक भवन स्वामियों ने अपने भवन को आवासीय भवन में दर्शाया है। भवन स्वामियों ने भवन में रहने वाले किराएदारों की जानकारी को भी सर्वे टीम से छिपाया है। यदि कंपनी द्वारा किए गए सर्वे की उच्च स्तरीय जांच की जाए तो बहुत खामियां उजागर हो सकती हैं और नगर पालिका को होने वाली राजस्व क्षति से भी बचाया जा सकता है।

केस -01
नगर पालिका की टीम द्वारा वार्ड नंबर 12 में सिविल  लाइर्न क्षेत्र में भौतिक सत्यान के दौरान एक मकान की  नाप करने  मकान की का क्षेत्रफल 1280 वर्ग फुट निकला। जबकि कंपनी द्वारा जारी  सूची में उसका कुल क्षेत्रफल 1,280 वर्गफुट की जगह 800 वर्गफुट दर्ज था।  इसी तरह  मुहल्ले की एक गली की चौड़ाई करीब 8 फुट के जगह छह फुट दर्ज पाई  गई। ऐसी गड़बड़ियां बड़े पैमाने पर हुई है।


केस- 02
रेलवे  स्टेशन मार्ग पर स्थित औद्यौगिक क्षेत्र में टीम की कार्रवाई से हड़कंप मच  गया है। पहले तो उद्यामियों द्वारा पालिका की टीम का विरोध किया गया।  उद्यामियों ने कहा कि जमीन जिला उद्योग विभाग की है, इसलिए कर विभाग ही अदा  करेगा और नाप नहीं दी। इसके बाद पालिका टीम ने उद्यमियों से एग्रीमेंट की  कापी मांगी गई, जिससे स्थिति साफ हुई की सभी तरह का कर उद्यामियों द्वारा ही  अदा किया जाएगा। इसके बाद टीम को नाप करने दी। नाप के दौरान लगभग सभी के  क्षेत्रफल में गड़बड़ी पाई गई। कंपनी ने इस पूरे क्षेत्र की नाप कंपनियां द्वारा नहीं की गई।
इनका कहना
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कंपनी का भुगतान नहीं किया गया है, विभागीय जांच में कमियां उजागर हुई। कमियों व अनियमित्ताओं को दूूर कराने के बाद ही कंपनी का भुगतान किया जाएगा।
-राकेश कुमार
- नगर पालिका अधिशासी अधिकारी
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