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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Schools could not start the process of buying

विद्यालयों में शुरू नहीं हो सकी खरीद की प्रक्रिया

Wed, 26 Aug 2015 11:34 PM IST
ललितपुर ब्यूरो
ललितपुर ब्यूरो Updated Wed, 26 Aug 2015 11:34 PM IST
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ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों में गठित स्कूल प्रबंध समिति की उदासीनता ड्रेस वितरण पर भारी पड़ रही है। अधिकांश विद्यालयों में खरीद की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है, न तो ठेकेदार से कुटेशन लिए गए हैं और न ही टेंडर का प्रकाशन हुआ है, ऐसे में तय समय सीमा में ड्रेस का वितरण नामुमकिन सा प्रतीत हो रहा है।
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सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत राजकीय, सहायता एवं परिषदीय विद्यालयों में कक्षा आठ तक के बच्चों को नि:शुल्क दो जोड़ी ड्रेस वितरित किए जाते हैं। इस साल जिले के 1,049 प्राथमिक, 492 पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं अठारह माध्यमिक विद्यालयों में ड्रेस वितरण किया जाना है। शासन ने चार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि अवमुक्त कर दी है। बीएसए रामपाल सिंह ने इस राशि का हस्तांतरण विद्यालय प्रबंध समितियों के खाते में कर दिया है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि ड्रेस का वितरण तीस अगस्त तक पूर्ण कर लिया जाए। इसके बाद भी न तो टास्क फोर्स और न ही विभागीय अधिकारी विद्यालयों के निरीक्षण के लिए फुर्सत निकाल पा रहे हैं। शायद यही वजह है कि विद्यालय प्रबंध समिति खरीद के प्रति उदासीन हैं। अधिकांश विद्यालयों में तो क्रय समिति की बैठक नहीं हो सकी है, जिससे ड्रेस की खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। इन हालात में स्कूली बच्चे पिछले साल की फटी ड्रेस पहनने को विवश हैं।
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यह है प्रक्रिया
विकास खंड स्तर पर क्रय प्रक्रिया प्रारंभ करने से पहले विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं सचिव को ब्लाक स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाना है, इसमें वित्तीय एवं प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी जाएगी। विशेषकर यूनिफार्म वितरण के दिशा निर्देश, क्रय नियम, सैंपल प्राप्त कर उसकी गुणवत्ता चेक  करना, शर्ट पेंट, स्कर्ट ब्लाउज एवं सलवार कुर्ते के रंग की भिन्नता चेक करना शामिल है। इस प्रशिक्षण को देने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
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नहीं धुलवाया जा रहा ड्रेस का सैंपल
विद्यालय प्रबंध समिति कपड़े धोने वाले साबुन से सैंपल धुलवाएगी। इसके बाद गुणवत्ता से संतुष्ट होने पर कुटेशन और टेंडर का अनुमोदन किया जाएगा।

ठेकेदार काट रहे चक्कर
नियम विपरीत ड्रेस वितरण करने के लिए अनेक ठेकेदार चक्कर लगा रहे हैं। कोई सत्तारूढ़ दल के नेताओं का बरदहस्त प्राप्त कर रहा है तो कोई सीधे बीएसए का दरवाजा खटखटा रहा है। कई अन्य भी अपने-अपने प्रभाव का इस्तेेमाल कर रहे हैं, जिससे ड्रेस वितरण गति नहीं पकड़ पा रहा है।


जखौरा ब्लाक की घटी मांग
पिछले सालों में ठेकेदारों की पहली पसंद ब्लाक जखौरा हुआ करती थी। लेकिन, खंड शिक्षा अधिकारी बदलते ही ब्लाक से ठेकेदारों ने किनारा कर लिया है।  ननौरा, बांसी न्याय पंचायत में ही ठेकेदार सक्रिय हैं।
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