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परिषदीय विद्यालयों का लौटेगा ऐतिहासिक वैभव
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Mon, 19 Oct 2015 01:35 AM IST
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ललितपुर। प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी ने परिषदीय विद्यालयों के प्रति उदासीनता दिखाने पर जनप्रतिनिधियों को नसीहत दी है। उन्होंने पत्र में लिखा कि जनप्रतिनिधि परिषदीय स्कूल में एक दिन के लिए अध्यापक बनकर लोकसेवक का धर्म निभाएं। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश को तय समयावधि में लागू करने का भी भरोसा दिया है और परिषदीय विद्यालयों का ऐतिहासिक वैभव लौटने का भरोसा जताया।
उन्होंने प्रबुद्ध वर्ग के लोगों को पत्र में लिखा कि पिछले दिनों उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने सभी के बच्चों की शिक्षा राज्य के परिषदीय स्कूलों में ग्रहण कराने के आदेश दिया है। इसके लिए न्यायालय ने छह माह का समय प्रदान किया है। राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री के रूप में उच्च न्यायालय के इस आदेश का न केवल पूरी तरह से पालन कराना है, बल्कि तय समयावधि में न्यायालय को आदेश के अनुपालन की सूचना देनी है। उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपनी पौत्री की शिक्षा परिषदीय विद्यालय में ग्रहण कराने का निर्णय लिया है। बेसिक शिक्षा के उन्नयन के लिए पहले से ही कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन अभिभावकों का भरोसा कान्वेंट और पब्लिक स्कूलों पर है, जिससे परिषदीय स्कूलों में छात्रों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने में सभी के समर्थन की आवश्यकता है।
उन्होंने लिखा कि अनेक कार्यक्रमों, मंचों, भारत सरकार की महत्वपूर्ण बैठकों, विधानसभा और विधानपरिषद में सभी जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों से अपने बच्चों को परिषदीय स्कूल में भेजने का आह्वान किया है। यही नहीं, स्कूलों में जाकर बच्चों की सामान्य ज्ञान परीक्षा लेने को कहा है, लेकिन किसी ने स्कूलों की सुध नहीं ली।
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स्कूल के शिक्षक हों या ग्राम प्रधान या उनसे ऊपर के जनप्रतिनिधि यह भूल गए हैं कि बेसिक स्कूलों ने ही देश को कई महान विभूतियां दी हैं। उन्होंने लिखा कि क्या लोकसेवकों ने परिषदीय स्कूल में एक दिन एक कक्षा के अध्यापक की भूमिका निभाने का लोक धर्म निभाया? परिषदीय स्कूलों में जिला प्रशासन या शासन में बैठे लोक सेवक, जनप्रतिनिधियों व समाज के सभी वर्गों के बच्चे पठन पाठन के लिए पहुंचें, इस पर सरकार काम कर रही है।
उन्होंने यह पत्र समस्त सांसद, विधायक, राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव, महापौर, पार्षद, नपाध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष, जिपं अध्यक्ष, सदस्य, बीडीसी, ग्राम प्रधान, समस्त अध्यक्ष आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक एसोसिएशन, राज्य कर्मचारी एसोसिएशन, सेंट्रल बार व स्टेट बार एसोसिएशन को लिखा है।
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उन्होंने प्रबुद्ध वर्ग के लोगों को पत्र में लिखा कि पिछले दिनों उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने सभी के बच्चों की शिक्षा राज्य के परिषदीय स्कूलों में ग्रहण कराने के आदेश दिया है। इसके लिए न्यायालय ने छह माह का समय प्रदान किया है। राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री के रूप में उच्च न्यायालय के इस आदेश का न केवल पूरी तरह से पालन कराना है, बल्कि तय समयावधि में न्यायालय को आदेश के अनुपालन की सूचना देनी है। उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपनी पौत्री की शिक्षा परिषदीय विद्यालय में ग्रहण कराने का निर्णय लिया है। बेसिक शिक्षा के उन्नयन के लिए पहले से ही कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन अभिभावकों का भरोसा कान्वेंट और पब्लिक स्कूलों पर है, जिससे परिषदीय स्कूलों में छात्रों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने में सभी के समर्थन की आवश्यकता है।
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उन्होंने लिखा कि अनेक कार्यक्रमों, मंचों, भारत सरकार की महत्वपूर्ण बैठकों, विधानसभा और विधानपरिषद में सभी जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों से अपने बच्चों को परिषदीय स्कूल में भेजने का आह्वान किया है। यही नहीं, स्कूलों में जाकर बच्चों की सामान्य ज्ञान परीक्षा लेने को कहा है, लेकिन किसी ने स्कूलों की सुध नहीं ली।
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स्कूल के शिक्षक हों या ग्राम प्रधान या उनसे ऊपर के जनप्रतिनिधि यह भूल गए हैं कि बेसिक स्कूलों ने ही देश को कई महान विभूतियां दी हैं। उन्होंने लिखा कि क्या लोकसेवकों ने परिषदीय स्कूल में एक दिन एक कक्षा के अध्यापक की भूमिका निभाने का लोक धर्म निभाया? परिषदीय स्कूलों में जिला प्रशासन या शासन में बैठे लोक सेवक, जनप्रतिनिधियों व समाज के सभी वर्गों के बच्चे पठन पाठन के लिए पहुंचें, इस पर सरकार काम कर रही है।
उन्होंने यह पत्र समस्त सांसद, विधायक, राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव, महापौर, पार्षद, नपाध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष, जिपं अध्यक्ष, सदस्य, बीडीसी, ग्राम प्रधान, समस्त अध्यक्ष आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक एसोसिएशन, राज्य कर्मचारी एसोसिएशन, सेंट्रल बार व स्टेट बार एसोसिएशन को लिखा है।