फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   samajwadi party lalitpur

सपा को छोड़, सबने लहराया परचम

Mon, 09 Jan 2017 12:52 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Mon, 09 Jan 2017 12:52 AM IST
विज्ञापन
samajwadi party lalitpur
नेता - फोटो : demo pic
प्रदेश के छोर पर बसे ललितपुर में आजादी के बाद से समाजवादी पार्टी को छोड़ बाकी प्रमुख दलों को जीत हासिल हुई। समाजवादी पार्टी को हर बार निराशा ही हाथ लगी। उसे लगातार पांच बार दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन

वर्ष 2012 में विधान सभा का परसीमन कर तीन न्याय पंचायतों को काट दिया गया था। वहीं तीन न्याय पंचायतों को इसमें जोड़ा गया। परसीमन में मुख्यालय से लगे हुए गांव जो कि अब नगर पालिका सीमा विस्तार क्षेत्र में आ गए हैं, उनको महरौनी विधानसभा से जोड़ दिया गया। जनपद की राजनीति में कांग्रेस, भाजपा, बसपा सहित कम्युनिस्ट पार्टी, जनता पार्टी के नुमाइंदे को भी जीत हासिल हुई।
विज्ञापन


प्रत्याशियों की स्थिति
भाजपा -  घोषित नहीं
बसपा-  संतोष कुशवाहा
कांग्रेस - घोषित नहीं
सपा- गुड्डु राजा (पहली लिस्ट के अनुसार), ज्योति लोधी (मुख्यमंत्री की  नई लिस्ट के अनुसार)

बसपा ने बनाया जिताऊ फार्मूला
वर्ष 2007 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने सिंचाई विभाग से रिटायर्ड इंजी नाथूराम कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया था। नाथूराम कुशवाहा ने सदर सीट के कुशवाहा वोट को पहली बार एकजुट किया। बसपा के परंपरागत वोट के सहयोग से जिताऊ फार्मूला तैयार किया। उनकी मौत के बाद उपचुनाव में पत्नी सुमन कुशवाहा व वर्ष 2012 के चुनाव में बसपा के रमेश कुशवाहा को जीत मिली। बसपा ने इसी समीकरण को साधते हुए इस बार  कुशवाहा समाज के संतोष कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कांग्रेस ने किया सबसे ज्यादा राज
वर्तमान में भले ही कांग्रेस की हालत पतली हो, लेकिन पूर्व में सदर सीट पर सबसे ज्यादा राज करने का मौका कांग्रेस को ही मिला है। कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर आखिरी बार जीत वर्ष 2002 के चुनाव में वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने दर्ज की थी। उसके बाद से कांग्रेस प्रत्याशी शुरुआती तीन में भी अपनी जगह नहीं बना सके। कांग्रेस के प्रतिनिधियों को सदर सीट से छह बार जीत हासिल हुई है।

क्रम जारी है
सदर सीट पर किसी पार्टी विशेष को लगातार मौका देने का चलन सा रहा है।  आजादी के बाद कांग्रेस को जीत मिलती रही, बीच में भारतीय जनसंघ और सीपीआई के प्रत्याशी को जीत मिली। इसके बाद फिर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, लेकिन 1989 के चुनाव से 1996 तक भाजपा के प्रत्याशी डा अरविंद जैन ने लगातार चार बार जीत दर्ज की। 2002 में कांग्रेस के खाते में सीट गई। 2007 के बाद से यह सीट लगातार बसपा के कब्जे में है। इस बार बसपा के विधायक के बगावत करने से पार्टी को कठिन चुनौती मिल सकती है।


पिछड़ी जातियां जिताने की स्थिति में
वर्तमान में सदर विधानसभा सीट पर करीब साढ़े चार लाख मतदाता हैं।  कुशवाहा जाति के लगभग 60 हजार, लोधी 55 हजार, यादव 47 हजार, ब्राहमण 26 हजार, ठाकुर 22 हजार, मुसलमान 12 हजार, जैन 10 हजार, अहिरवार 35 हजार, सहारिया 25 हजार, ढीमर 20 हजार, रजक 10 हजार, कोरी लगभग 11 हजार हैं। इसके अलावा अन्य जातियों का वोट भी है।

अब तक यह चुने गए
-------------------
1951 -  कृष्ण चंद्र शर्मा  कांग्रेस
1957  - रामनाथ खैरा   निर्दलीय
1962 -  अयोध्या प्रसाद   कांग्रेस
1967 -  अयोध्या प्रसाद   कांग्रेस
1969 -  भगवत दयाल   भारतीय जनसंघ
1974 -  चंदन सिंह कामरेड   सीपीआई
1977 -  सुदामा प्रसाद गोस्वामी  जनता पार्टी
1980-  ओमप्रकाश रिछारिया   कांग्रेस
1985 - राजेश खैरा   कांग्रेस
1989- डा अरविंद जैन  भाजपा
1991- डा अरविंद जैन  भाजपा
1993-  डा अरविंद जैन भाजपा
1996 - डा अरविंद जैन  भाजपा
2002 - वीरेंद्र सिंह बुंदेला  कांग्रेस
2007- नाथू राम कुशवाहा  बसपा
2009  सुमन कुशवाहा   बसपा(उपचुनाव)
2012-  रमेश कुशवाहा बसपा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed