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अब फिर हो सकेगा राक फास्फेट का खनन
lalitpur
Updated Wed, 28 Dec 2016 01:54 AM IST
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ललितपुर (ब्यूरो)। खनिज संपदा से भरे जनपद में जल्द ही बड़े पैमाने पर एक बार फिर रॉक फास्फेट का खनन शुरू हो सकेगा। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। केंद्रीय वन मंत्रालय से राज्य सरकार की बात लगभग तय हो गई है। खनन की अनुमति के लिए वन मंत्रालय से बात चल रही है, जिसकी जल्द ही अनुमति मिलने की संभावना है।
मड़ावरा तहसील के ग्राम सौंरई के पास 1981 में शासन की संस्था यूपीएसएमडीसी द्वारा एक हजार हेक्टेयर में रॉक फास्फेट का खनन किया जाता था। वन व पर्यावरण मंत्रालय के नियमों में परिवर्तन होने के चलते यहां वर्ष 2000 से काम बंद हो गया था। खनन बंद होने से यूपीएसएमडीसी के अधिकारियों व कर्मियों को दूसरे विभागों में समायोजित कर दिया गया था।
अब एक बार फिर खनिज विभाग द्वारा ग्राम सौंरई में रॉक फॉस्फेट की खदानों को दोबारा शुरू कराने का निर्णय लिया है। पिछले हफ्ते विशेष सचिव खनिज संतोष राय ने ग्राम सौंरई का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। विभागीय जानकारी के अनुसार इस बार केवल 874 हेक्टेयर में ही रॉक फास्फेट का खनन किया जाएगा। साथ ही अन्य जमीन पर खनन करने की अनुमति के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय से राज्य सरकार की बातचीत चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि वन मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही यहां पर बड़े पैमाने पर खनन का काम शुरु हो जाएगा। खनिज अधिकारी अरविंद कुमार बताते हैं, कि ग्राम सौंरई में रॉक फास्फेट की खदानों को दोबारा शुरु कराने को लेकर गंभीरता से काम किया जा रहा है। जरूरी औपचारिकता पूरी होने के बाद यहां पर खनन शुरू हो सकेगा।
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इसमें होता है उपयोग
रॉक फास्फेट का उपयोग सबसे ज्यादा खाद बनाने में किया जाता है। इसके साथ ही सौंदर्य प्रसाधन, जंग रोधी लेप बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
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मड़ावरा तहसील के ग्राम सौंरई के पास 1981 में शासन की संस्था यूपीएसएमडीसी द्वारा एक हजार हेक्टेयर में रॉक फास्फेट का खनन किया जाता था। वन व पर्यावरण मंत्रालय के नियमों में परिवर्तन होने के चलते यहां वर्ष 2000 से काम बंद हो गया था। खनन बंद होने से यूपीएसएमडीसी के अधिकारियों व कर्मियों को दूसरे विभागों में समायोजित कर दिया गया था।
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अब एक बार फिर खनिज विभाग द्वारा ग्राम सौंरई में रॉक फॉस्फेट की खदानों को दोबारा शुरू कराने का निर्णय लिया है। पिछले हफ्ते विशेष सचिव खनिज संतोष राय ने ग्राम सौंरई का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। विभागीय जानकारी के अनुसार इस बार केवल 874 हेक्टेयर में ही रॉक फास्फेट का खनन किया जाएगा। साथ ही अन्य जमीन पर खनन करने की अनुमति के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय से राज्य सरकार की बातचीत चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि वन मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही यहां पर बड़े पैमाने पर खनन का काम शुरु हो जाएगा। खनिज अधिकारी अरविंद कुमार बताते हैं, कि ग्राम सौंरई में रॉक फास्फेट की खदानों को दोबारा शुरु कराने को लेकर गंभीरता से काम किया जा रहा है। जरूरी औपचारिकता पूरी होने के बाद यहां पर खनन शुरू हो सकेगा।
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इसमें होता है उपयोग
रॉक फास्फेट का उपयोग सबसे ज्यादा खाद बनाने में किया जाता है। इसके साथ ही सौंदर्य प्रसाधन, जंग रोधी लेप बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।