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जीवन संवारने में धार्मिक संस्कार श्रेयस्कर
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Thu, 21 Jan 2016 01:46 AM IST
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बानपुर/ललितपुर। राष्ट्रसंत सराकोद्धारक आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज ने कहा जीवन को संवारने के लिए धार्मिक संस्कार ही श्रेयस्कर हैं। नित्य देवदर्शन, पूजन-अर्चन और स्वाध्याय ही ऐसा माध्यम है, जिसमें श्रावकों को स्व का बोध होता है
और प्रभु के चरणों में पहुंचकर अच्छे कार्यों की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि जितना अधिक समय प्रभु के ध्यान और गुरु के सानिध्य में बीतेगा, उतना अधिक ही परिणामों में विशुद्धि आएगी। वह धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
आचार्यश्री बुधवार ग्राम सूरी कलां से पदविहार करते हुए कस्बा बानपुर पहुंचे, जहां श्रावकों ने गाजे-बाजे के साथ आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज संघस्थ मुनि ज्ञेयसागर और शिवानंद सागर महाराज की अगुवाई की। जगह-जगह आचार्यश्री की आरती उतारी गई और पादप्रक्षालन किया गया।
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आचार्यश्री जैन नया मंदिर पहुंचे, जहां मूलनायक पार्श्वनाथ नेमिनाथ भगवान के दर्शन किए। मध्याह्न में आचार्यश्री ने श्रावकों के बीच स्वाध्याय के दौरान कहा कि ज्ञान ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जिससे जीवन को संवारने की सीख मिलती है।
आचार्यश्री को सुरेश चंद मारौरा शिवपुरी और अनिल अलया ललितपुर ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष महेंद्र कुमार नायक, अखिलेश चौधरी, राजेश सिंघई, इंद्रकुमार सिंघई, वीरेंद्र सिंघई, प्रकाश चंद सिंघई, प्रदीप मडवैया, सुरेंद्र सराफ, अरुण मडवैया, सुनील सिंघई, ज्ञान चंद मडवैया, निर्मल जैन, गोल्डी जैन, सुरेश सिंघई, पुष्पेंद्र मडवैया, ज्ञानचंद जैन आदि मौजूद रहे।
इससे पूर्व ग्राम सूरीकलां के लिए आचार्यश्री के पदविहार में कस्बा बार के आनंद जैन, राहुल जैन, जग्रेश जैन, चिगलौआ से लालचंद जैन, वीरेंद्र जैन आदि सम्मलित हुए।
प्रवचन आज
आचार्यश्री के 21 जनवरी को कस्बा बानपुर के जैन मंदिर में प्रात: प्रवचन होंगे। मध्याह्न मेें अतिशय क्षेत्र श्री क्षेत्रपाल मंदिर में विराजमान अहरनाथ, कुंथनाथ एवं शांतिनाथ भगवान की प्रतिमाओं के आचार्यश्री दर्शन करेंगे।
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और प्रभु के चरणों में पहुंचकर अच्छे कार्यों की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि जितना अधिक समय प्रभु के ध्यान और गुरु के सानिध्य में बीतेगा, उतना अधिक ही परिणामों में विशुद्धि आएगी। वह धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
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आचार्यश्री बुधवार ग्राम सूरी कलां से पदविहार करते हुए कस्बा बानपुर पहुंचे, जहां श्रावकों ने गाजे-बाजे के साथ आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज संघस्थ मुनि ज्ञेयसागर और शिवानंद सागर महाराज की अगुवाई की। जगह-जगह आचार्यश्री की आरती उतारी गई और पादप्रक्षालन किया गया।
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आचार्यश्री जैन नया मंदिर पहुंचे, जहां मूलनायक पार्श्वनाथ नेमिनाथ भगवान के दर्शन किए। मध्याह्न में आचार्यश्री ने श्रावकों के बीच स्वाध्याय के दौरान कहा कि ज्ञान ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जिससे जीवन को संवारने की सीख मिलती है।
आचार्यश्री को सुरेश चंद मारौरा शिवपुरी और अनिल अलया ललितपुर ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष महेंद्र कुमार नायक, अखिलेश चौधरी, राजेश सिंघई, इंद्रकुमार सिंघई, वीरेंद्र सिंघई, प्रकाश चंद सिंघई, प्रदीप मडवैया, सुरेंद्र सराफ, अरुण मडवैया, सुनील सिंघई, ज्ञान चंद मडवैया, निर्मल जैन, गोल्डी जैन, सुरेश सिंघई, पुष्पेंद्र मडवैया, ज्ञानचंद जैन आदि मौजूद रहे।
इससे पूर्व ग्राम सूरीकलां के लिए आचार्यश्री के पदविहार में कस्बा बार के आनंद जैन, राहुल जैन, जग्रेश जैन, चिगलौआ से लालचंद जैन, वीरेंद्र जैन आदि सम्मलित हुए।
प्रवचन आज
आचार्यश्री के 21 जनवरी को कस्बा बानपुर के जैन मंदिर में प्रात: प्रवचन होंगे। मध्याह्न मेें अतिशय क्षेत्र श्री क्षेत्रपाल मंदिर में विराजमान अहरनाथ, कुंथनाथ एवं शांतिनाथ भगवान की प्रतिमाओं के आचार्यश्री दर्शन करेंगे।