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राहत किट में तेल का खेल
lalitpur
Updated Wed, 20 Jul 2016 01:45 AM IST
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स्वाास्थ्य
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। सूखा प्रभावित बुंदेलखंड में प्रदेश सरकार द्वारा बांटी जा रही राहत सामग्री में शामिल सरसों के तेल के नाम पर कई ठेकेदार खेल कर रहे हैं। टेंडर के मुताबिक गरीबों को दी जा रही किट में पांच लीटर सरसों के तेल की जगह ठेकेदार मुनाफा के फेर में पाम ऑयल या राइस ब्राउन ऑयल दे रहे हैं। हैरानी वाली बात यह है कि जिस बोतल में तेल दिया जा रहा है, उसमें स्पष्ट लिखा है कि ब्लेंडेड वेजीटेबिल ऑयल है। साथ ही रैपर पर उल्लेख है कि बोतल में 70 फीसदी पाम व राइस ब्राउन ऑयल है, इसमें केवल 30 फीसदी ही सरसों का तेल है। इसके बावजूद अफसर इस ओर से आंखें मूंदे हुए हैं। जबकि, ज्यादा मात्रा में पाम ऑयल या राइस ब्राउन ऑयल का उपयोग करने पर कई प्रकार की बीमारियां होती हैं।
जनपद में कुल 24 हजार राहत किट का वितरण किया जा रहा है। एक किट के साथ पांच लीटर सरसों का तेल बांटा जा रहा है। इस प्रकार कुल एक लाख 20 हजार लीटर तेल पूरे जनपद में राहत सामग्री किट के जरिये बांटा जा रहा है। बाजार में सरसों के तेल की कीमत 80 से 90 रुपये प्रति लीटर है। जबकि ठेकेदारों द्वारा पिछले महीने के टेंडर के मुताबिक 102 रुपये प्रति लीटर की दर से ठेका लिया गया था। बाजार में फुटकर में पाम या राइस ब्राउन ऑयल 55 से 60 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है। इस प्रकार ठेकेदारों द्वारा प्रति लीटर 35 से 40 रुपये तक मुनाफा कमाकर गरीब लोगों को देने वाले सरसों के तेल में कमाई कर रहे हैं। देखा जाए तो ठेकेदार सरसों के नाम पर दूसरा तेल थमाकर शासन को 48 लाख रुपये प्रतिमाह चूना लगा रहे हैं।
क्यों नहीं आ रहा पकड़ में
बुंदेलखंड में सूखा राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल है, इसके बावजूद इस योजना में कमाई का जरिया ढूंढ लिया गया है। सरसों के तेल के नाम पर पाम ऑयल व राइस ऑयल ब्राउन तेल बांटा जा रहा है। राहत सामग्री किट वितरण के दौरान अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहते हैं, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाना तमाम सवाल उठाता है। नियमानुसार किट में दिए जाने वाले सामान की जांच की जानी चाहिए। देखना चाहिए कि टेंडर के मुताबिक सामान गुणवत्ता पूर्ण है या नहीं।
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राहत सामग्री किट में अगर सरसों तेल की जगह कोई दूसरा तेल बांटा जा रहा है, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रुपेश कुमार जिलाधिकारी
राइस ब्रान ऑयल व पाम आयल को अगर गुणवत्तापूर्वक नहीं बनाया गया है, तो इससे रक्तचाप व ह्दय रोग से जुड़ीं बीमारियां हो सकती है। इन दोनों तेलों के निर्माण के दौरान काफी तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा जाना जरूरी है। - डा. पवन सूद, फिजीशियन जिला अस्पताल
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जनपद में कुल 24 हजार राहत किट का वितरण किया जा रहा है। एक किट के साथ पांच लीटर सरसों का तेल बांटा जा रहा है। इस प्रकार कुल एक लाख 20 हजार लीटर तेल पूरे जनपद में राहत सामग्री किट के जरिये बांटा जा रहा है। बाजार में सरसों के तेल की कीमत 80 से 90 रुपये प्रति लीटर है। जबकि ठेकेदारों द्वारा पिछले महीने के टेंडर के मुताबिक 102 रुपये प्रति लीटर की दर से ठेका लिया गया था। बाजार में फुटकर में पाम या राइस ब्राउन ऑयल 55 से 60 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है। इस प्रकार ठेकेदारों द्वारा प्रति लीटर 35 से 40 रुपये तक मुनाफा कमाकर गरीब लोगों को देने वाले सरसों के तेल में कमाई कर रहे हैं। देखा जाए तो ठेकेदार सरसों के नाम पर दूसरा तेल थमाकर शासन को 48 लाख रुपये प्रतिमाह चूना लगा रहे हैं।
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क्यों नहीं आ रहा पकड़ में
बुंदेलखंड में सूखा राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल है, इसके बावजूद इस योजना में कमाई का जरिया ढूंढ लिया गया है। सरसों के तेल के नाम पर पाम ऑयल व राइस ऑयल ब्राउन तेल बांटा जा रहा है। राहत सामग्री किट वितरण के दौरान अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहते हैं, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाना तमाम सवाल उठाता है। नियमानुसार किट में दिए जाने वाले सामान की जांच की जानी चाहिए। देखना चाहिए कि टेंडर के मुताबिक सामान गुणवत्ता पूर्ण है या नहीं।
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राहत सामग्री किट में अगर सरसों तेल की जगह कोई दूसरा तेल बांटा जा रहा है, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रुपेश कुमार जिलाधिकारी
राइस ब्रान ऑयल व पाम आयल को अगर गुणवत्तापूर्वक नहीं बनाया गया है, तो इससे रक्तचाप व ह्दय रोग से जुड़ीं बीमारियां हो सकती है। इन दोनों तेलों के निर्माण के दौरान काफी तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा जाना जरूरी है। - डा. पवन सूद, फिजीशियन जिला अस्पताल