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अपात्रों को चिह्नित करने को चलेगा अभियान
lalitpur
Updated Tue, 31 May 2016 01:48 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। पूर्ति विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पात्र गृहस्थियों में अपात्रों को चिह्नित करने के लिए अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। नगर में पूर्ति विभाग के कर्मी, नगर पालिका के कर्मी व बाट माप विभाग के कर्मी सूची के सत्यापन का काम करेंगे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय अफसरों से सत्यापन कराया जाएगा।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत निर्धन परिवारों को मुफ्त अनाज दिया जाना है। इसकी पात्र गृहस्थियों में बड़े पैमाने पर अपात्रों की घुसपैठ है, जिससे योजना का शत-प्रतिशत लाभ पात्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसे ध्यान में रखकर 30 मई के अमर उजाला के अंक में पेज नंबर तीन पर मुफ्त अनाज पाने की कतार में सरकारी कर्मी नामक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया। इस समाचार के प्रकाशित होते ही विभाग में खलबली मच गई, जिन सरकारी कर्मियों के नाम उजागर हुए, उन्होंने भी विभागीय कर्मियों से संपर्क साधा। आखिरकार विभागीय अफसरों को पात्र गृहस्थियों में शामिल अपात्रों की छटनी करने का निर्णय लेना पड़ा।
पूर्ति निरीक्षक अशोक कुमार का कहना है कि अपात्रों का चिह्नींकरण किया जा रहा है। अभी तक करीब दो हजार अपात्रों को सूची से पृथक किया जा चुका है। इसके बाद भी सूची में जो अपात्र रह गए हैं, उन्हें अभियान चलाकर चिह्नित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जिलास्तरीय अफसरों एवं नगर में नगर पालिका कर्मी, बांट माप विभाग के कर्मी के साथ पूर्ति कर्मी भी सत्यापन का कार्य करेंगे।
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तलब किए बिक्री रजिस्टर
जिन उचित दर विक्रेता की दुकानों से जुड़े गृहस्थियों की सूची में अपात्रों के नाम सामने आए हैं, उन विक्रेताओं के बिक्री रजिस्टर की जांच की जाएगी। जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि अपात्रों ने कहीं योजना का अनाज तो नहीं लिया।
राशन कार्डों की जांच की जाए
शिक्षक हेमंत तिवारी, अनंत तिवारी व संजीव गिदरौरिया ने डीएम को शिकायती पत्र देकर फर्जी राशन कार्डो की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से राशन कार्ड बनवाने का संदेह प्रतीत हो रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत निर्धन परिवारों को मुफ्त अनाज दिया जाना है। इसकी पात्र गृहस्थियों में बड़े पैमाने पर अपात्रों की घुसपैठ है, जिससे योजना का शत-प्रतिशत लाभ पात्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसे ध्यान में रखकर 30 मई के अमर उजाला के अंक में पेज नंबर तीन पर मुफ्त अनाज पाने की कतार में सरकारी कर्मी नामक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया। इस समाचार के प्रकाशित होते ही विभाग में खलबली मच गई, जिन सरकारी कर्मियों के नाम उजागर हुए, उन्होंने भी विभागीय कर्मियों से संपर्क साधा। आखिरकार विभागीय अफसरों को पात्र गृहस्थियों में शामिल अपात्रों की छटनी करने का निर्णय लेना पड़ा।
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पूर्ति निरीक्षक अशोक कुमार का कहना है कि अपात्रों का चिह्नींकरण किया जा रहा है। अभी तक करीब दो हजार अपात्रों को सूची से पृथक किया जा चुका है। इसके बाद भी सूची में जो अपात्र रह गए हैं, उन्हें अभियान चलाकर चिह्नित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जिलास्तरीय अफसरों एवं नगर में नगर पालिका कर्मी, बांट माप विभाग के कर्मी के साथ पूर्ति कर्मी भी सत्यापन का कार्य करेंगे।
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तलब किए बिक्री रजिस्टर
जिन उचित दर विक्रेता की दुकानों से जुड़े गृहस्थियों की सूची में अपात्रों के नाम सामने आए हैं, उन विक्रेताओं के बिक्री रजिस्टर की जांच की जाएगी। जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि अपात्रों ने कहीं योजना का अनाज तो नहीं लिया।
राशन कार्डों की जांच की जाए
शिक्षक हेमंत तिवारी, अनंत तिवारी व संजीव गिदरौरिया ने डीएम को शिकायती पत्र देकर फर्जी राशन कार्डो की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से राशन कार्ड बनवाने का संदेह प्रतीत हो रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।