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ये है बस नाम मात्र का आदर्श स्टेशन
lalitpur
Updated Sun, 10 Jul 2016 01:15 AM IST
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रेलवे
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। नगर के रेलवे स्टेशन को भले ही आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया गया है, लेकिन यहां पर यात्रियों को देने वाली आदर्श रेलवे स्टेशन की श्रेणी जैसी सुविधाऐं कोसों दूर है। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 50 से अधिक गाड़ी ठहरती है, इनमें पैसेंजर, एक्सप्रेस, सुपर फास्ट व शताब्दी जैसी भी ट्रेनें शामिल हैं। रेलवे स्टेशन पर 24 घंटे में हजारों यात्रियों को आवागमन होता है। पूर्व में रेल विभाग द्वारा स्थानीय रेलवे स्टेशन को आदर्श रेलवे स्टेशन की उपाधि दी गई थी। लेकिन स्थानीय रेलवे स्टेशन पर आदर्श स्टेशन की श्रेणी तो दूरी की बात, आम स्टेशन की तरह भी यात्रियों को सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। स्टेशन परिसर पर पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई व्यवस्था का अभाव है। रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही जानवरों द्वारा गंदगी फैलाई गंदगी का अंबार लगा रहता है। स्टेशन परिसर पर आग लगने की स्थित में बचाव के लिए प्लेट फार्म पर रखी अग्निरोधक बाल्टियों में बालू की जगह गंदगी भरी हुई है। लोगों द्वारा इन बालू की बाल्टियों को पीक दान बना दिया गया है। वहीं महिलाओं की सुविधाओं के लिए प्लेट फार्म नंबर 01 पर महिला शौचालय बनाया गया है, लेकिन इस शौचालय पर हमेशा ही ताला जड़ा रहता है। इससे महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कब लगेगी आवारा जानवरों पर रोक
रेलवे स्टेशन परिसर पर आवारा जानवरों को जाने से रोकने के लिए रेलिंग की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद प्लेट फार्म पर घूमने वाले आवारा जानवरों पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पा रहा है। यह आवारा जानवर कई बार यात्रियों पर हमला करने का आमादा हो जाते हैं।
यात्री खुद ही डाल रहे अपनी जान जोखिम में
एक प्लेट फार्म से दूसरे प्लेट फार्म तक जाने के लिए यात्रियों परेशानी न उठाना पड़े इसके लिए स्टेशन पर आगे व पीछे की ओर दोनों जगह पुल बनाए गए है। दो पुल होने के बावजूद भी यात्री अपनी जान जोखिम मे डालकर एक प्लेट फार्म से दूसरे पर जाने के लिए पटरियों का उपयोग करते हैं। यात्रियों को पटरियों पर उतरने से रोकने के लिए पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन यात्रियों को स्वयं ही अपनी जान की परवाह करनी चाहिए। कई बार देेखा गया है कि महिलाऐं अपने छोटे-छोटे बच्चों की जान भी जोखिम में डाल देती हैं।
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टिकट काउंटरों पर लटकर रहता है बोर्ड
अनारक्षित टिकट के लिए रेलवे स्टेशन पर तीन काउंटरों की व्यवस्था की गई है, लेकिन ऐसा कभी ही हुआ हो कि टिकट बनाने के लिए तीनों काउंटर एक साथ खुले हों। आम तौर पर मात्र दो ही काउंटर खुले होते हैं और एक काउंटर पर क्लोज का बोर्ड लटका दिया जाता है। कभी-कभी तो एक ही काउंटर पर टिकट बिलने से लंबी-लंबी कतार लग जाती है। टिकट काउंटरों पर तैनात कर्मियों की लापरवाही से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। टिकट के इंतजार में लगे यात्रियों की कई बार ट्रेन ही निकल जाती है पर उनका नंबर नहीं आ पाता है। टिकट कक्ष में शीतल पेयजल के लिए वाटर कूलर स्थापित कराया गया है, लेकिन यह अनियोजित तरीके से स्थापित कर दिया गया है। इससे वहां गिरने वाला पानी पूरे कक्ष में फैल जाता है और कीचड़ फैल जाता है। यात्रियों की सुविधा के लिए आरक्षित टिकिट का स्टेटस चेक करने के लिए टिकट कक्ष में एक आनलाईन मशीन लगाई गई है, लेकिन यह मशीन पिछले कई महीनों से बंद पड़ी हुई है। यात्रियों की सुविधाओं के लिए लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यात्रियों को उनका लाभ नहीं मिल पर रहा है।
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कब लगेगी आवारा जानवरों पर रोक
रेलवे स्टेशन परिसर पर आवारा जानवरों को जाने से रोकने के लिए रेलिंग की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद प्लेट फार्म पर घूमने वाले आवारा जानवरों पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पा रहा है। यह आवारा जानवर कई बार यात्रियों पर हमला करने का आमादा हो जाते हैं।
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यात्री खुद ही डाल रहे अपनी जान जोखिम में
एक प्लेट फार्म से दूसरे प्लेट फार्म तक जाने के लिए यात्रियों परेशानी न उठाना पड़े इसके लिए स्टेशन पर आगे व पीछे की ओर दोनों जगह पुल बनाए गए है। दो पुल होने के बावजूद भी यात्री अपनी जान जोखिम मे डालकर एक प्लेट फार्म से दूसरे पर जाने के लिए पटरियों का उपयोग करते हैं। यात्रियों को पटरियों पर उतरने से रोकने के लिए पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन यात्रियों को स्वयं ही अपनी जान की परवाह करनी चाहिए। कई बार देेखा गया है कि महिलाऐं अपने छोटे-छोटे बच्चों की जान भी जोखिम में डाल देती हैं।
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टिकट काउंटरों पर लटकर रहता है बोर्ड
अनारक्षित टिकट के लिए रेलवे स्टेशन पर तीन काउंटरों की व्यवस्था की गई है, लेकिन ऐसा कभी ही हुआ हो कि टिकट बनाने के लिए तीनों काउंटर एक साथ खुले हों। आम तौर पर मात्र दो ही काउंटर खुले होते हैं और एक काउंटर पर क्लोज का बोर्ड लटका दिया जाता है। कभी-कभी तो एक ही काउंटर पर टिकट बिलने से लंबी-लंबी कतार लग जाती है। टिकट काउंटरों पर तैनात कर्मियों की लापरवाही से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। टिकट के इंतजार में लगे यात्रियों की कई बार ट्रेन ही निकल जाती है पर उनका नंबर नहीं आ पाता है। टिकट कक्ष में शीतल पेयजल के लिए वाटर कूलर स्थापित कराया गया है, लेकिन यह अनियोजित तरीके से स्थापित कर दिया गया है। इससे वहां गिरने वाला पानी पूरे कक्ष में फैल जाता है और कीचड़ फैल जाता है। यात्रियों की सुविधा के लिए आरक्षित टिकिट का स्टेटस चेक करने के लिए टिकट कक्ष में एक आनलाईन मशीन लगाई गई है, लेकिन यह मशीन पिछले कई महीनों से बंद पड़ी हुई है। यात्रियों की सुविधाओं के लिए लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यात्रियों को उनका लाभ नहीं मिल पर रहा है।