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Lalitpur News: बांध से रिसाव बंद करने में पुणे की तकनीकी टीम करेगी मदद
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ललितपुर। जामनी बांध से रिसाव बंद करने के अब तक के उपाय नाकाफी साबित हुए हैं। अब सिंचाई विभाग सेंट्रल वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन पुणे की मदद लेगा। इसके लिए पत्राचार करने की तैयारी की जा रही है। पुणे की तकनीकी टीम यहां आकर बांध से हो रहे रिसाव को बंद करने के उपाय बताएगी।
तहसील मड़ावरा क्षेत्र में जामनी नदी पर करीब 52 साल पूर्व बांध का निर्माण किया गया था। इसका पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर और न्यूनतम जलस्तर 396.39 मीटर है। बांध के पूर्ण रूप से भरने पर इसमें रिसाव शुरू हो जाता है। इसे बंद करने के लिए सिंचाई विभाग ने गर्मी के सीजन में अपस्ट्रीम साइड में ब्लैकशाॅटन व फिल्टर डालकर उस पर पिचिंग करने जैसे उपाय किए थे। अधिकारियों को पूरी उम्मीद थी कि इस बार बांध से रिसाव नहीं होगा। लेकिन, जब मानसून सीजन में बांध लबालब हुआ तो रिसाव पुन: शुरू हो गया।
राहत की बात यह रही कि रिसाव के दौरान पानी के साथ मिट्टी नहीं आ रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पुणे की टीम यहां आएगी और बांध का स्थलीय निरीक्षण कर रिसाव बंद करने के तरीके बताएगी। इसके बाद इन उपायों पर काम कराया जाएगा। अभी सिंचाई विभाग ने फिल्टर से करीब 10 मीटर दूर तक कच्ची नाली बनाई है। इस नाली में रिसाव का पानी एकत्रित होकर आगे खदान में जा रहा है।
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बांध का चल रहा जीर्णोद्धार : बांध काफी पुराना होने के कारण इसके जीर्णोद्धार के लिए 17.91 करोड़ रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई थी। कार्यदायी संस्था बांध से सीपेज, लीकेज की मरम्मत सहित अन्य सुधार कार्य करा रही है। इसके साथ बांध के मैनुअल गेटों को ऑटोमेटिक करने की भी तैयारी की जा रही है।
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फैक्ट फाइल
- 92.87 एमसीएम भंडारण क्षमता
- 84 एमसीएम उपयोगी जल
- 67 एमसीएम सिंचाई के लिए आरक्षित
- 1.42 एमसीएम पेयजल व वाणिज्यिक उपयोग के लिए आरक्षित
- 230 किलोमीटर नहर प्रणाली
- 10000 हेक्टेयर भूमि सिंचित
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बांध से रिसाव बंद करने के लिए वर्ल्ड बैंक की गाइडलाइन के अनुसार काम कराया गया था। अब कम मात्रा में रिसाव हो रहा है। इसे पूरी तरह बंद करने के लिए सेंट्रल वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन पुणे की मदद ली जाएगी।
जितेंद्र सिंह कनौजिया, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्यमंडल
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तहसील मड़ावरा क्षेत्र में जामनी नदी पर करीब 52 साल पूर्व बांध का निर्माण किया गया था। इसका पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर और न्यूनतम जलस्तर 396.39 मीटर है। बांध के पूर्ण रूप से भरने पर इसमें रिसाव शुरू हो जाता है। इसे बंद करने के लिए सिंचाई विभाग ने गर्मी के सीजन में अपस्ट्रीम साइड में ब्लैकशाॅटन व फिल्टर डालकर उस पर पिचिंग करने जैसे उपाय किए थे। अधिकारियों को पूरी उम्मीद थी कि इस बार बांध से रिसाव नहीं होगा। लेकिन, जब मानसून सीजन में बांध लबालब हुआ तो रिसाव पुन: शुरू हो गया।
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राहत की बात यह रही कि रिसाव के दौरान पानी के साथ मिट्टी नहीं आ रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पुणे की टीम यहां आएगी और बांध का स्थलीय निरीक्षण कर रिसाव बंद करने के तरीके बताएगी। इसके बाद इन उपायों पर काम कराया जाएगा। अभी सिंचाई विभाग ने फिल्टर से करीब 10 मीटर दूर तक कच्ची नाली बनाई है। इस नाली में रिसाव का पानी एकत्रित होकर आगे खदान में जा रहा है।
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बांध का चल रहा जीर्णोद्धार : बांध काफी पुराना होने के कारण इसके जीर्णोद्धार के लिए 17.91 करोड़ रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई थी। कार्यदायी संस्था बांध से सीपेज, लीकेज की मरम्मत सहित अन्य सुधार कार्य करा रही है। इसके साथ बांध के मैनुअल गेटों को ऑटोमेटिक करने की भी तैयारी की जा रही है।
फैक्ट फाइल
- 92.87 एमसीएम भंडारण क्षमता
- 84 एमसीएम उपयोगी जल
- 67 एमसीएम सिंचाई के लिए आरक्षित
- 1.42 एमसीएम पेयजल व वाणिज्यिक उपयोग के लिए आरक्षित
- 230 किलोमीटर नहर प्रणाली
- 10000 हेक्टेयर भूमि सिंचित
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बांध से रिसाव बंद करने के लिए वर्ल्ड बैंक की गाइडलाइन के अनुसार काम कराया गया था। अब कम मात्रा में रिसाव हो रहा है। इसे पूरी तरह बंद करने के लिए सेंट्रल वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन पुणे की मदद ली जाएगी।
जितेंद्र सिंह कनौजिया, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्यमंडल