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आवश्यकता पड़ने पर निजी चिकित्सकों से लिया जाएगा सहयोग
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- फोटो : corona hotspot 1.jpg
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ललितपुर। कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने की तैयारियां अंतिम पड़ाव में चल रही हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी तैयारियों में बाधा बन रही है। ऐसे में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग आवश्यकता पड़ने पर निजी चिकित्सकों का भी सहयोग लेगा।
जनपद स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अधिक पिछड़ा है। यहां पर उपचार के लिए अधिकांश लोग जिला मुख्यालय व अन्य महानगरों की ओर रुख करते हैं। सरकारी चिकित्सकों की कमी तो है ही निजी चिकित्सकों का भी टोटा बना हुआ है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ता है।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग तमाम तैयारियां कर रहा है। इसमें गंभीर बच्चों के लिए पीकू वार्ड का निर्माण किया गया है। ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए प्लांटों की स्थापना की जा रही है। वैक्सीनेशन भी किया जा रहा है। इसके साथ ही बचाव व सुरक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है। लेकिन तमाम तैयारियों के बीच जिले में चिकित्सकों की कमी बाधा बन रही है। स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी व तालबेहट में दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर जिला महिला अस्पताल व जिला अस्पताल समेत कुल पांच चिकित्सक हैं। व्यवस्थाओं के सापेक्ष चार अस्पतालों में सात चिकित्सक तैनात हैं। जबकि एक पीकू वार्ड में कम से कम तीन चिकित्सकों की आवश्यकता है। ऐसे में तीसरी लहर के दौरान चिकित्सकों का भारी टोटा रहेगा।
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चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारियां कर रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। जिसके लिए शासन से पत्राचार किया गया है। साथ ही निजी चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जाएगा। जिसका तय अनुसार भुगतान भी किया जाएगा।
जनपद में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। संभावित तीसरी लहर में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी पर निजी चिकित्सकों से भी सहयोग लिया जाएगा। - डॉ. गोविंद प्रसाद शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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जनपद स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अधिक पिछड़ा है। यहां पर उपचार के लिए अधिकांश लोग जिला मुख्यालय व अन्य महानगरों की ओर रुख करते हैं। सरकारी चिकित्सकों की कमी तो है ही निजी चिकित्सकों का भी टोटा बना हुआ है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ता है।
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कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग तमाम तैयारियां कर रहा है। इसमें गंभीर बच्चों के लिए पीकू वार्ड का निर्माण किया गया है। ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए प्लांटों की स्थापना की जा रही है। वैक्सीनेशन भी किया जा रहा है। इसके साथ ही बचाव व सुरक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है। लेकिन तमाम तैयारियों के बीच जिले में चिकित्सकों की कमी बाधा बन रही है। स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी व तालबेहट में दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर जिला महिला अस्पताल व जिला अस्पताल समेत कुल पांच चिकित्सक हैं। व्यवस्थाओं के सापेक्ष चार अस्पतालों में सात चिकित्सक तैनात हैं। जबकि एक पीकू वार्ड में कम से कम तीन चिकित्सकों की आवश्यकता है। ऐसे में तीसरी लहर के दौरान चिकित्सकों का भारी टोटा रहेगा।
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चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारियां कर रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। जिसके लिए शासन से पत्राचार किया गया है। साथ ही निजी चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जाएगा। जिसका तय अनुसार भुगतान भी किया जाएगा।
जनपद में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। संभावित तीसरी लहर में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी पर निजी चिकित्सकों से भी सहयोग लिया जाएगा। - डॉ. गोविंद प्रसाद शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी