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भोजन की गुणवत्ता पर राजनीति
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:17 AM IST
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hosla yojna, lalitpur news
- फोटो : demo
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तालबेहट (ललितपुर)। हौसला परियोजना के दूसरे दिन क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर घटिया और गुणवत्ताहीन खाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया। ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकत्री एक दूसरे पर दोषारोपण करती दिखीं।
शासन द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए बुधवार को प्रारंभ हुई हौसला योजना के दूसरे दिन गुरुवार को ही उसे ग्रहण सा लग गया। इस योजना के तहत मिड-डे मील के साथ गांव की गर्भवती महिलाओं को भोजन और कुपोषित बच्चों को खाद्यान्न देना था। कई केंद्र पर कुपोषित बच्चों को सामग्री देने के नाम पर खाना पूर्ति की गई। वहीं, अधिकांश स्थानों पर गर्भवती महिलाओं को घटिया क्वालिटी का खाना दिया गया।
पूरे दिन खाने की गुणवत्ता को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने आपत्ति उठाई। उनका कहना था कि ऐसा खाना देने से गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य गड़बड़ा सकता है।
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इस संबंध में जब हौसला योजना के जोनल प्रभारी जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डा. प्रताप सिंह से बात की तो उनका कहना था कि वह बाल विकास परियोजना अधिकारी को इसकी जांच करने के लिए कहेंगे। भोजन की गुणवत्ता से किसी भी सूरत में समझौता नहीं होने दिया जाएगा। वही, बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रीति भिलवारे का कहना था कि उन्हें इस तरह की शिकायतें मिली है, परन्तु खाना बनाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों की है। इस संबंध में जब ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि रवींद्र अगरिया से बात की तो उनका कहना था कि भोजन नियमानुसार बनाया जा रहा है। यदि कहीं कोई कमी है तो उसे दूर कर लिया जाएगा।
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शासन द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए बुधवार को प्रारंभ हुई हौसला योजना के दूसरे दिन गुरुवार को ही उसे ग्रहण सा लग गया। इस योजना के तहत मिड-डे मील के साथ गांव की गर्भवती महिलाओं को भोजन और कुपोषित बच्चों को खाद्यान्न देना था। कई केंद्र पर कुपोषित बच्चों को सामग्री देने के नाम पर खाना पूर्ति की गई। वहीं, अधिकांश स्थानों पर गर्भवती महिलाओं को घटिया क्वालिटी का खाना दिया गया।
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पूरे दिन खाने की गुणवत्ता को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने आपत्ति उठाई। उनका कहना था कि ऐसा खाना देने से गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य गड़बड़ा सकता है।
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इस संबंध में जब हौसला योजना के जोनल प्रभारी जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डा. प्रताप सिंह से बात की तो उनका कहना था कि वह बाल विकास परियोजना अधिकारी को इसकी जांच करने के लिए कहेंगे। भोजन की गुणवत्ता से किसी भी सूरत में समझौता नहीं होने दिया जाएगा। वही, बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रीति भिलवारे का कहना था कि उन्हें इस तरह की शिकायतें मिली है, परन्तु खाना बनाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों की है। इस संबंध में जब ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि रवींद्र अगरिया से बात की तो उनका कहना था कि भोजन नियमानुसार बनाया जा रहा है। यदि कहीं कोई कमी है तो उसे दूर कर लिया जाएगा।