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प्लास्टिक कूड़ा जलाकर हवा में फैला रहे जहर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 May 2017 12:57 AM IST
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waste wan
- फोटो : demo
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रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे का नियमित रूप से निस्तारण व उठान नहीं हो जाने के कारण विभाग के कर्मचारियों द्वारा प्लास्टिक युक्त कचरे को नये टिकट घर के पास डंप करके जलाया जा रहा है। इससे परिसर में जमा गंदगी तो साफ हो रही है, लेकिन आस-पास का पर्यावरण लगातार दूषित हो रहा है।
आदर्श स्टेशन का दर्जा प्राप्त ललितपुर रेलवे स्टेशन सफाई के मामले में पहले से काफी बेहतर स्थिति हो गई है। स्टेशन पर तैनात सफाई कर्मचारी घंटों मशक्कत करके प्लेटफार्म व स्टेशन परिसर को गंदगी साफ कर रहे है। लेकिन सफाई कर्मचारी व रेलवे के स्थानीय अधिकारी इस स्वच्छता अभियान के चक्कर में वातावरण को प्रदूषण रहित बनाने का अभियान भूल गए है। ट्रेनों के अंदर व स्टेशन परिसर में बिकने वाली खाने-पीने की ज्यादातर सामग्री प्लास्टिक की बोतल या फिर प्लास्टिक की अन्य पैकिंग में आती है। इसलिए स्टेशनों से निकलने वाले कचरे में सबसे अधिक मात्रा प्लास्टिक सामग्री की होती है। सफाई कर्मचारी प्लेट फार्म व परिसर में झाड़ू लगाकर एकत्रित कचरे को टिकट घर के नवीन भवन के पास ही बने डंपिंग स्थल पर फेंक देते है। कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कर्मचारी हर रोज निकलने वाले प्लास्टिक युक्त इस कचरे को आग के हवाले कर देते है। प्लास्टिक के कचरे से निकलने वाले काले व जहरीले धुएं से पर्यावरण दूषित हो रहा है। इसके अलावा आस-पास बने घरों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। रेलवे विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बोलते हैं कि कचरे का उठान करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, लेकिन कचरा को जलाने के मामले में अधिकारी कर्मचारियों की गलती स्वीकार रहे है। जनपद में कहीं पर भी कचरा निस्तारण के लिए सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं है। प्लास्टिक युक्त कचरे के कारण इसका उपयोग खाद के रुप में भी नहीं हो पा रहा है। हर जगह कचरे को जलाकर ही उसका निस्तारण किया जा रहा है, जो पर्यावरण के नियमों के खिलाफ है।
बढ़ी मात्रा में निकलता है कचरा
रेलवे स्टेशन से निकलने वाले कचरे की मात्रा की बात करें तो इसका रेलवे में कोई स्थाई मानक नहीं है। स्टेशन से 24 घंटे में 180 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। इनमें से लगभग 70 ट्रेनें ऐसी है, जिनका स्टेशन पर ठहराव होता है। इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों व उन्होंने छोड़ने के लिए आने वाले परिजनों की संख्या चार से पांच हजार में होती है। हजारों की संख्या में ट्रेनों में यात्री सफर करते है जो स्टेशन पर खाना आदि खाने के बाद कचरे को वहीं फेंक देते है।
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नगर पालिका उठाती है कचरा
रेलवे स्टेशन परिसर में सफाई करने वाले कर्मचारी कचरे को टिकट घर के पास बने डंपिंग स्थल के पास डंप कर देते है। कचरे का उठान करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। कचरे कौन जला रहा है इसकी जानकारी नहीं है।
- एससी जैन
स्टेशन प्रबंधक
हमारे कार्यक्षेत्र से है बाहर
रेलवे स्टेशन परिसर में सफाई की जिम्मेदारी स्वयं रेलवे विभाग की है, जो हमारे कार्य क्षेत्र से बाहर है। यदि शहर में कहीं पर भी कचरा डंप किया जा रहा है तो उसको उठाने का काम नगर पालिका करती है। यदि विभाग व रेलवे के बीच इस संबंध में पूर्व में कोई अनुबंध हुआ हो तो पता करके कार्रवाई जरूर की जाएगी।
- राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।
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आदर्श स्टेशन का दर्जा प्राप्त ललितपुर रेलवे स्टेशन सफाई के मामले में पहले से काफी बेहतर स्थिति हो गई है। स्टेशन पर तैनात सफाई कर्मचारी घंटों मशक्कत करके प्लेटफार्म व स्टेशन परिसर को गंदगी साफ कर रहे है। लेकिन सफाई कर्मचारी व रेलवे के स्थानीय अधिकारी इस स्वच्छता अभियान के चक्कर में वातावरण को प्रदूषण रहित बनाने का अभियान भूल गए है। ट्रेनों के अंदर व स्टेशन परिसर में बिकने वाली खाने-पीने की ज्यादातर सामग्री प्लास्टिक की बोतल या फिर प्लास्टिक की अन्य पैकिंग में आती है। इसलिए स्टेशनों से निकलने वाले कचरे में सबसे अधिक मात्रा प्लास्टिक सामग्री की होती है। सफाई कर्मचारी प्लेट फार्म व परिसर में झाड़ू लगाकर एकत्रित कचरे को टिकट घर के नवीन भवन के पास ही बने डंपिंग स्थल पर फेंक देते है। कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कर्मचारी हर रोज निकलने वाले प्लास्टिक युक्त इस कचरे को आग के हवाले कर देते है। प्लास्टिक के कचरे से निकलने वाले काले व जहरीले धुएं से पर्यावरण दूषित हो रहा है। इसके अलावा आस-पास बने घरों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। रेलवे विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बोलते हैं कि कचरे का उठान करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, लेकिन कचरा को जलाने के मामले में अधिकारी कर्मचारियों की गलती स्वीकार रहे है। जनपद में कहीं पर भी कचरा निस्तारण के लिए सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं है। प्लास्टिक युक्त कचरे के कारण इसका उपयोग खाद के रुप में भी नहीं हो पा रहा है। हर जगह कचरे को जलाकर ही उसका निस्तारण किया जा रहा है, जो पर्यावरण के नियमों के खिलाफ है।
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बढ़ी मात्रा में निकलता है कचरा
रेलवे स्टेशन से निकलने वाले कचरे की मात्रा की बात करें तो इसका रेलवे में कोई स्थाई मानक नहीं है। स्टेशन से 24 घंटे में 180 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। इनमें से लगभग 70 ट्रेनें ऐसी है, जिनका स्टेशन पर ठहराव होता है। इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों व उन्होंने छोड़ने के लिए आने वाले परिजनों की संख्या चार से पांच हजार में होती है। हजारों की संख्या में ट्रेनों में यात्री सफर करते है जो स्टेशन पर खाना आदि खाने के बाद कचरे को वहीं फेंक देते है।
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नगर पालिका उठाती है कचरा
रेलवे स्टेशन परिसर में सफाई करने वाले कर्मचारी कचरे को टिकट घर के पास बने डंपिंग स्थल के पास डंप कर देते है। कचरे का उठान करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। कचरे कौन जला रहा है इसकी जानकारी नहीं है।
- एससी जैन
स्टेशन प्रबंधक
हमारे कार्यक्षेत्र से है बाहर
रेलवे स्टेशन परिसर में सफाई की जिम्मेदारी स्वयं रेलवे विभाग की है, जो हमारे कार्य क्षेत्र से बाहर है। यदि शहर में कहीं पर भी कचरा डंप किया जा रहा है तो उसको उठाने का काम नगर पालिका करती है। यदि विभाग व रेलवे के बीच इस संबंध में पूर्व में कोई अनुबंध हुआ हो तो पता करके कार्रवाई जरूर की जाएगी।
- राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।