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Lalitpur News: बंद होने के कगार पर पेवर ब्रिक्स का कारोबार
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ललितपुर। सरकारी ठेकों में जिले के पेवर ब्रिक्स की सप्लाई नहीं ली गई। ग्राम पंचायतों व निकाय क्षेत्र में गैर जनपदों के पेवर ब्रिक्स सप्लाई होने के कारण वर्तमान में यह कारोबार बंद होने के कगार पर है। दूसरा कारण इन औद्योगिक यूनिटों को पर्याप्त बिजली मिलना भी माना जा रहा है। जेनरेटर के इस्तेमाल से इनकी लागत भी बढ़ना एक कारण माना जा रहा है।
जिले में एक समय पर पेवर ब्रिक्स का व्यापार चरम पर पहुंच गया था। चंदेरा औद्योगिक आस्थान के अलावा अन्य जगहों पर उद्यमियों ने अपने प्लांट स्थापित किए थे। प्रारंभ में नगर पालिका, निकाय व ग्राम पंचायतों में यहां के पेवर ब्रिक्स डाले गए, इसके बाद ठेकेदारों ने सस्ता व निजी लाभ देखते हुए बाहर से पेवर ब्रिक्स मंगाने प्रारंभ कर दिए। धीरे-धीरे यह उद्योग जनपद से समाप्त होने के कगार पर है।
कभी चंदेरा में एक दर्जन यूनिट कार्यरत थी, तो वर्तमान में सिर्फ दो से तीन ही यूनिट कार्य कर रही हैं। साथ ही क्षेत्र में स्थापित प्लांट भी बंद हो गए हैं। इसके अलावा जनपद की विद्युत आपूर्ति को भी एक कारण बताया जा रहा है। वहीं कच्चे माल गिट्टी, डस्ट व सीमेंट के दामों में उतार चढ़ाव के कारण इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होती है। लेकिन, बाजार में उस हिसाब से इनकी कीमत नहीं मिल रही थी।
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इस उद्योग से रुका था कुछ हद तक पलायन
गैर जनपदों में कार्य करने वाले इस उद्योग के कुशल कारीगरों का पलायन रुक गया था। लेकिन, उद्योग बंद होने से एक बार फिर वह पलायन कर गए हैं।
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जिले में एक समय पर पेवर ब्रिक्स का व्यापार चरम पर पहुंच गया था। चंदेरा औद्योगिक आस्थान के अलावा अन्य जगहों पर उद्यमियों ने अपने प्लांट स्थापित किए थे। प्रारंभ में नगर पालिका, निकाय व ग्राम पंचायतों में यहां के पेवर ब्रिक्स डाले गए, इसके बाद ठेकेदारों ने सस्ता व निजी लाभ देखते हुए बाहर से पेवर ब्रिक्स मंगाने प्रारंभ कर दिए। धीरे-धीरे यह उद्योग जनपद से समाप्त होने के कगार पर है।
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कभी चंदेरा में एक दर्जन यूनिट कार्यरत थी, तो वर्तमान में सिर्फ दो से तीन ही यूनिट कार्य कर रही हैं। साथ ही क्षेत्र में स्थापित प्लांट भी बंद हो गए हैं। इसके अलावा जनपद की विद्युत आपूर्ति को भी एक कारण बताया जा रहा है। वहीं कच्चे माल गिट्टी, डस्ट व सीमेंट के दामों में उतार चढ़ाव के कारण इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होती है। लेकिन, बाजार में उस हिसाब से इनकी कीमत नहीं मिल रही थी।
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इस उद्योग से रुका था कुछ हद तक पलायन
गैर जनपदों में कार्य करने वाले इस उद्योग के कुशल कारीगरों का पलायन रुक गया था। लेकिन, उद्योग बंद होने से एक बार फिर वह पलायन कर गए हैं।