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अशांति को मिटाने का पर्व है पर्यूषण : आचार्य सागर
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ललितपुर। वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि संसार के प्रदूषण को मिटाने के लिए जैनों का त्योहार पर्यूषण पर्व आ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व सिर्फ जैनियों का नहीं, प्राणी मात्र का पर्व है। पर्यूषण पर्व अशांति को मिटाने, विनय भावना, कोमलता और अपने आप में खो जाने के लिए आता है। वह मंगलवार को आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
आचार्यश्री ने कहा कि अपनी आत्मा को शुद्ध करने के लिए पर्यूषण पर्व आ रहा है। सामाजिक प्रदूषण, ईर्ष्या, नफरत, वैचारिक भिन्नता, गुटबाजी, राजनीतिक उठापटक को मिटाने के लिए पर्यूषण पर्व आता है। यह पर्व क्षमा रूपी धरती में फैला है और ब्रह्मचार रूपी आकाश में रहता है। उन्होंने कहा मुनि का न कोई ड्रेस है और न ही एड्रेस।
इस दौरान अहंकार नहीं करना, विवादों से दूर रहकर संवाद स्थापित करना है। यह भावना बनी है कि मैं भी भगवान बन जाऊं, क्योंकि जो जैसा सोचता और करता है वह वैसा ही बन जाता है। अतः व्यक्ति को वही सोचना और करना चाहिए जैसा वह बनना चाहता है। प्रवचन से पूर्व कुशल चंद्र जैन व सौरभ कुमार ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किया। धर्मसभा से पहले पुण्यार्जक परिवारों ने शांति धारा की। सभा का संचालन कैप्टन राजकुमार जैन मंत्री जैन पंचायत ने किया। संवाद
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आचार्यश्री ने कहा कि अपनी आत्मा को शुद्ध करने के लिए पर्यूषण पर्व आ रहा है। सामाजिक प्रदूषण, ईर्ष्या, नफरत, वैचारिक भिन्नता, गुटबाजी, राजनीतिक उठापटक को मिटाने के लिए पर्यूषण पर्व आता है। यह पर्व क्षमा रूपी धरती में फैला है और ब्रह्मचार रूपी आकाश में रहता है। उन्होंने कहा मुनि का न कोई ड्रेस है और न ही एड्रेस।
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इस दौरान अहंकार नहीं करना, विवादों से दूर रहकर संवाद स्थापित करना है। यह भावना बनी है कि मैं भी भगवान बन जाऊं, क्योंकि जो जैसा सोचता और करता है वह वैसा ही बन जाता है। अतः व्यक्ति को वही सोचना और करना चाहिए जैसा वह बनना चाहता है। प्रवचन से पूर्व कुशल चंद्र जैन व सौरभ कुमार ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किया। धर्मसभा से पहले पुण्यार्जक परिवारों ने शांति धारा की। सभा का संचालन कैप्टन राजकुमार जैन मंत्री जैन पंचायत ने किया। संवाद
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