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शहर के पार्को का नहीं हो सका सौंदर्यीकरण

Wed, 22 Jan 2020 01:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 01:06 AM IST
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parks of the city could not be beautiful
ललितपुर। नगर पालिका परिषद द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी पार्कों की दशा नहीं सुधर पाई है। आज भी अधिकांश पार्क सुविधाओं की जूझ रहे हैं। किसी पार्क में बैठक व्यवस्था का अभाव है तो कहीं फुटपाथ दुरुस्त नहीं है। सबसे खराब स्थिति राज्यवैद्य तुलसीराम पार्क की है। जहां न तो बैठने के लिए बैंच है और न ही पीने के पानी की व्यवस्था। आसपास गंदे पानी का जमाव है। इससे लोग पार्को से दूरियां बना रहे हैं।
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नगर पालिका परिषद ने शहर को सुंदर बनाने एवं नागरिकों को दो पल सुकुन से गुजारने के लिए जगह-जगह पार्कों का निर्माण कराया है, लेकिन इनका रखरखाव ठीक से नहीं किया जा रहा है। इसके कारण अधिकांश पार्क बदहाल अवस्था में है। अंग्रेजों के जमाने का कंपनी बाग, जो अब चंद्रशेखर उद्यान पार्क से पहचाना जाता है। इसमें भी व्यवस्थाएं सुधर नहीं पाई हैं। फुटपाथ के पटिया जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गए हैं या फिर उखड़ गए हैं। फव्वारे भी कभी-कभार ही चलते हैं। वरना, महीनों बंद पड़े रहते हैं। चाइना हट भी देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त होने लगा है। उद्यान विभाग के कर्मियों ने क्यारियों में पौध लगाने की शुरुआत की है, लेकिन औपचारिकता निभाई जा रही है। कई लॉन की क्यारियां खाली पड़ी हैं। यही नहीं, घास की कटिंग भी नहीं हो सकी है।
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सिविल लाइन स्थित राज्यवैद्य तुलसीराम पार्क की हालत बेहद खराब है। पार्क के अंदर बड़ी-बड़ी घास है, जिसकी लंबे समय से कटिंग नहीं कराई गई है। पार्क के आसपास नाली का गंदा फैल रहा है। इसी तरह जेल चौराहे के पास कांशीराम पार्क उजड़ा सा नजर आता है। आईटीआई के पीछे कांशीराम कॉलोनी के बीच में बने पार्क का सौंदर्यीकरण अधूरा है। अन्य कॉलोनियों में पार्को की हालत खराब है। इनमें गंदगी व जहरीली घास खड़ी है। अम्रुत योजना के तहत बच्चों का पार्क बनाया जा रहा है, जिसमें काम गति नहीं पकड़ पा रहा है।
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शहर में कई पार्क बने हैं। इनमें से चंद्रशेखर उद्यान पार्क ही ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा लोग पहुंचते हैं। अन्य पार्कों में कम ही लोग जाते हैं। चंद्रशेखर उद्यान पार्क की क्यारियां फूलों से अभी तक सज नहीं पाई हैं। वर्षों पहले इस पार्क में सर्दी का मौसम आते ही क्यारियां विभिन्न रंगों के फूलों से सज जाती थी।
- संजीव कुमार जैन, दुकानदार
शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए पार्को का निर्माण किया जाता है। यहां भी कई पार्क बनाए गए हैं, लेकिन चंद्रशेखर उद्यान पार्क के मुकाबले अन्य कोई पार्क दिखाई नहीं देता है। इस पार्क में भी काम कराने की आवश्यकता है। यहां के फव्वारे शोपीस साबित हो रहे हैं।

- अभिलेष कुमार पांडे, व्यवसायी
वैसे तो अतिक्रमण ने पूरे शहर को कसबा की तरह बना दिया है। इससे पार्क भी अछूूते नहीं हैं, स्वामी विवेकानंद पार्क के मुख्य द्वार से ही अतिक्रमण शुरू हो जाता है। दूर से पार्क का पता ही नहीं चलता है। अन्य महापुरुषों के नाम पर पार्कों की हालत किसी से छिपी नहीं है।
- प्रिंस जैन
अम्रुत योजना में पार्क के सौंदर्यीकरण के लिए धनराशि की मांग की गई है, लेकिन अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। शासन दोबारा पत्र लिखा जा रहा है।
- डा. संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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